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मां दुर्गा के हाथों में मौजूद अस्त्र-शस्त्र क्या दर्शाते हैं? त्रिशूल से लेकर चक्र तक का रहस्य

Published: Wed, 14 Oct 2026 06:00 PM (IST)

शारदीय नवरात्र के दौरान पूजी जाने वाली मां दुर्गा के हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं, जो केवल उनकी शक्ति ही नहीं, बल्कि जीवन के गहरे संदेश भी देते हैं।

मां दुर्गा के हाथों में मौजूद अस्त्र-शस्त्रों का गहरा रहस्य  (Picture Credit: AI Generated)

मां दुर्गा के हाथों में मौजूद अस्त्र-शस्त्रों का गहरा रहस्य  (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. मां दुर्गा के अस्त्र-शस्त्रों का आध्यात्मिक महत्व।

  2. विभिन्न देवताओं द्वारा भेंट किए गए दिव्य अस्त्र।

  3. प्रत्येक अस्त्र जीवन के लिए देता है संदेश।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र के दौरान माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा विधि-विधान से की जाती है। माता दुर्गा के स्वरूप को अत्यंत तेजस्वी माना जाता है। मां का नाम सुनते ही मन में शेर पर सवार देवी की छवि उभरती है, जिनके दसों हाथों में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र मौजूद होते हैं।

मां दुर्गा के ये अस्त्र केवल उनकी शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक नहीं होते हैं, बल्कि जीवन में साहस, ज्ञान, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश भी देते हैं। इन सभी अस्त्र-शास्त्रों का अपना अलग उद्देशय और महत्व है और यह किसी न किसी देवता से प्राप्त हैं।

ऐसी मान्यता है कि माता दुर्गा को विभिन्न देवताओं ने ये दिव्य अस्त्र उपहार स्वरूप दिए थे और इन्हीं से माता दुर्गा ने महिषासुर जैसे दुष्टों का संहार किया था। आइए आपको बताते हैं माता दुर्गा के हाथों में मौजूद इन सभी अस्त्र-शस्त्रों के धार्मिक महत्व और इनके रहस्य के बारे में।

सुदर्शन चक्र

माता दुर्गा के हाथों में मौजूद सुदर्शन चक्र को भगवान विष्णु का अस्त्र माना जाता है जो उन्होंने माता को भेंट में दिया था। से जोड़कर देखा जाता है।

इस चक्र को सृष्टि के संचालन, समय की गति और बुराई के विनाश का प्रतीक माना जाता है। इसका संदेश है कि संसार में अधर्म कितना भी बढ़ जाए, अंत में विजय धर्म की ही होती है।

त्रिशूल

भगवान शिव से प्राप्त त्रिशूल के तीन सिरे सत्व, रज और तम नामक गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सत्व सद्गुण और शांति, रज सांसारिक इच्छाओं कौर तम अज्ञान तथा नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीक माना जाता है।

तलवार

मां दुर्गा के हाथों में मौजूद तलवार ज्ञान, विवेक और अज्ञान के नाश का प्रतीक मानी जाती है। तलवार और ढाल भी देवी के युद्ध स्वरूप का प्रतीक हैं और दुर्गा सप्तशती के अनुसार उन्हें काल द्वारा तलवार और ढाल प्रदान की गई थी।

धनुष और बाण

शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि सूर्यदेव और पवनदेव ने माता दुर्गा को धनुष और बाण भेंट स्वरूप दिए थे। धनुष को स्थितिज ऊर्जा और बाण को गतिज ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

शंख

माता दुर्गा के हाथों में मौजूद शंख वरुण देव से उन्हें भेंट स्वरूप मिला था। शंख की ध्वनि शुभता, सकारात्मकता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक मानी जाती है। शंखनाद से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भक्तों के मन में साहस जागृत होता है।

गदा

गदा को शारीरिक और मानसिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। भगवान विष्णु ने महिषासुर के वध के लिए माता दुर्गा को गदा प्रदान की थी।

कमल

मां दुर्गा के हाथों में मौजूद कमल का फूल उन्हें ब्रह्मा जी ने भेंट में दिया था। ऐसा माना जाता है कि जिस प्रकार से कमल कीचड़ में खिलकर भी उससे अछूता रहता है। उसी प्रकार मनुष्य को सांसारिक मोह, लोभ और लालच से दूर रहकर अपने विचारों को पवित्र बनाए रखना चाहिए।

वज्र

वज्र माता दुर्गा को देवराज इंद्र ने भेंट में दिया था और यह दृढ़ता और अटूट संकल्प का प्रतीक माना जाता है। यह हमें बताता है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों से कभी डरना नहीं चाहिए, बल्कि डटकर उनका सामना करना चाहिए।

कुल्हाड़ी व परशु

माता के हाथ में मौजूद कुल्हाड़ी उन्हें विश्वकर्मा जी से मिली थी। इसे बुराई को समाप्त करने की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह हमें कठिनाइयों से बिना डरे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

अग्नि

अग्नि माता दुर्गा का ऐसा अस्त्र है जो उन्हें अग्नि देव से भेंट में मिला था। यह शुद्धता और परिवर्तन की शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो नकारात्मकता को जलाकर समाप्त करती है।

दुर्गा सप्तशती के द्वितीय और तृतीय अध्याय में इस बात का वर्णन विस्तार से मिलता है कि माता दुर्गा के हाथों में मौजूद अलग-अलग शस्त्र उन्हें विभिन्न देवताओं ने महिषासुर के विनाश के लिए भेंट में दिए थे।

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