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Bihar MLC Chunav में RJD का 'खेला': तीसरी वरीयता के वोटों से पलटी बाजी, लेकिन स्ट्राइक रेट में BJP आगे

Published: Thu, 29 Oct 2026 09:42 PM (IST)Updated: Thu, 29 Oct 2026 10:32 PM (IST)

राजद ने विधान परिषद की दरभंगा (स्नातक) और पटना (शिक्षक) सीटें जीतकर विधानसभा चुनाव की हार की पीड़ा को कम ...और पढ़ें

तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी।

तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी।

विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। विधान परिषद की दरभंगा (स्नातक) सीट भी जीतकर राजद विधानसभा चुनाव की करारी पराजय को भूल-सा गया है, जो उसे जब-तब असह्य पीड़ा दे जाती है। बहरहाल, उच्च सदन के लिए शिक्षक और स्नातक कोटे की आठ सीटों पर हुए चुनाव में सबसे अधिक लाभ उसे ही हुआ है।

इनमें से एक भी सीट उसके खाते की नहीं थी, लेकिन जीत दो पर मिली है। वह भी तब जबकि महागठबंधन में पांच सीटों पर दोस्ताना संघर्ष हुआ। अगर महागठबंधन एकजुट होकर चुनाव मैदान में होता, तो राजद के साथ दूसरे घटक दलों के लिए भी परिणाम संभवत: और सुखद होता!

दरभंगा (स्नातक) सीट पर कांग्रेस को भी ठीकठाक वोट मिले। वोट इस कदर छितराए कि परिणाम की घोषणा में तीन दिन लग गए, क्योंकि हार-जीत का निर्धारण तीसरी वरीयता के वोटों से हुआ।

बुधवार रात तक भाजपा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त-सी थी। गुरुवार रात राजद के अनिल कुमार झा विजयी घोषित हुए। यानी तीसरी वरीयता के वोटों ने उन्हें एकमुश्त बढ़त दिलाई।

भाजपा के लिए यही संतोष का विषय है, क्योंकि उसके प्रत्याशी सर्वेश कुमार को प्रथम वरीयता के वोट राजद से अधिक मिले। यानी मतदाताओं की पहली पसंद भाजपा रही। कुछ ऐसी ही स्थिति शिक्षक कोटे की पटना सीट पर भी बनी। पिछले चार चुनावों में यहां भाजपा विजेता थी।

इस बार उसके प्रत्याशी नवल किशोर यादव को राजद के डॉ. संजीव कुमार ने पटखनी दे दी। इस सीट पर राजद को पहली बार जीत मिली है। यह विजय इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिक्षक कोटे में सर्वाधिक शहरी परिक्षेत्र वाली यही सीट है।

राजधानी का महत्व अतिरिक्त, जबकि शहरी और शिक्षित मतदाताओं पर भाजपा की पकड़ अपेक्षाकृत मजबूत मानी जाती है।

स्ट्राइक रेट में भाजपा के पीछे:

राजद के लिए सीख और भाजपा के लिए संतोष का एक दूसरा आधार स्ट्राइक रेट हो सकता है। सबसे बेहतर स्ट्राइक रेट भाजपा का रहा है। राजद और जदयू का स्ट्राइक रेट कमोबेश बराबर है।

सबसे खराब प्रदर्शन कांग्रेस और वाम दलों का रहा। जन सुराज पार्टी (जसुपा) के लिए संतोष मात्र यह कि आधिकारिक रूप से विधान परिषद में उसकी उपस्थिति हो गई।

अभी तक निर्दलीय आफाक आलम उसका चेहरा थे, जो इस बार जसुपा प्रत्याशी के रूप में सारण (शिक्षक) सीट पर मात खा गए।

अमान्य हुए मतों को लेकर मलाल अधिक:

स्नातक कोटे की कोसी और दरभंगा सीट पर निरस्त किए गए वोटों की संख्या सर्वाधिक रही है। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सार्वजनिक आपत्ति भी की है।

दरभंगा में 4299 और कोसी में 9086 वोट निरस्त हुए। राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन और एजाज अहमद एसआइआर की तरह इसे भी तीन-तिकड़म मान रहे।

हालांकि, इसके बावजूद राजद विजयी रहा। पटना (शिक्षक) सीट के मतगणना केंद्र में सीसीटीवी कैमरे को लेकर डॉ. संजीव भी खूब हाय-तौबा किए थे, लेकिन परिणाम से निहाल हो गए।

पहले जदयू और अब भाजपा से बदला:

विधानसभा चुनाव में राजद को सर्वाधिक नुकसान भाजपा और जदयू ने पहुंचाया। उसके बाद विधान परिषद में आरा स्थानीय प्राधिकार सीट पर उप चुनाव हुआ। राजद के सोनू राय ने जदयू से वह सीट छीन ली।

अब दो सीटें भाजपा से छीनी है। उल्लेखनीय है कि दरभंगा (स्नातक) सीट पर पिछली बार निर्दलीय विजयी रहे सर्वेश कुमार चुनाव से पहले तक भाजपा में ही थे और इस बार तो प्रत्याशी ही रहे।

दल प्रत्याशी विजय स्ट्राइक रेट
भाजपा 04 02 50%
जदयू 04 01 25%
राजद 07 02 28.57%
कांग्रेस 05 00 00%
भाकपा 01 00 00%
माकपा 01 00 00%
माले 01 00 00%
जसुपा 08 01 12.5%
निर्दलीय 119 02 1.68%

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