पुलिस और CBI का डर दिखाकर 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट, पटना में रिटायर्ड टीचर से 30 लाख की ठगी
साइबर अपराधियों ने दिल्ली पुलिस और सीबीआई का डर दिखाकर पटना के एक सेवानिवृत्त शिक्षक को 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।
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एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
सेवानिवृत्त शिक्षक को 15 दिन डिजिटल अरेस्ट में रखा।
दिल्ली पुलिस, सीबीआई का डर दिखाकर 30 लाख ठगे।
फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग आरोप में एफडी तुड़वाई गई।
जागरण संवाददाता, पटना। साइबर अपराधियों ने दिल्ली पुलिस, सीबीआई और न्यायालय के नाम पर कार्रवाई का डर दिखाकर दानापुर थाना क्षेत्र के सगुना मोड़ निवासी एक सेवानिवृत्त शिक्षक को 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनसे 30 लाख रुपये ठग लिये।
अपराधियों ने शिक्षक को मनी लॉन्ड्रिंग के 6.80 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन में फंसाने, गैर-जमानती वारंट जारी होने और गिरफ्तार कर जेल भेजने की धमकी दी।
लगातार मानसिक दबाव बनाकर उनसे उनकी फिक्स्ड डिपाजिट (एफडी) तुड़वायी और रकम अपने बताये खाते में ट्रांसफर करा ली। बाद में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने को कहने पर शिक्षक को शक हुआ।
भतीजे से सलाह लेने के बाद उन्होंने पटना साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पीड़ित शिक्षक जवाहर नवोदय विद्यालय से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन संविदा पर मुरादाबाद स्थित एक आवासीय विद्यालय में पढ़ाते हैं। उनके मुताबिक, 20 सितंबर को उनके वाट्सएप पर एक महिला का फोन आया।
महिला ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर एक सिम जारी किया गया है। इसी वजह से उनके इस्तेमाल वाले मोबाइल नंबर को बंद किया जाना है।
शिक्षक ने जब इसकी वजह पूछी, तो महिला ने दिल्ली के बाराखंबा थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज होने की बात कही और शिकायत संख्या भी बतायी। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर दिल्ली पुलिस से जोड़ दिया गया।
वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने शिकायत संख्या पूछी और फिर मुख्यालय से संपर्क कराने के नाम पर उन्हें दूसरे व्यक्ति से बात करायी। वहां शिक्षक को बताया गया कि उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है और वारंट पर उनका नाम, पता तथा आधार कार्ड का विवरण दर्ज है।
शातिरों ने एक फर्जी पासबुक भेजा, जिसमें लगा था शिक्षक का फोटो
साइबर अपराधियों ने शिक्षक पर विदेश से मनी लॉन्ड्रिंग के 6.80 करोड़ रुपये उनके नाम से खुले खाते में आने का आरोप लगाया।
भरोसा जीतने के लिए उन्होंने दिल्ली के चांदनी चौक स्थित एक बैंक शाखा की कथित पासबुक भी दिखाई, जिसमें शिक्षक का फोटो, नाम और पता दर्ज था। इसके बाद उन्हें एक कथित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से बात करायी गयी।
अधिकारी ने सीबीआई की टीम के लीडर प्रदीप कुमार सिंह के नाम से आवेदन देने को कहा, ताकि ऑनलाइन जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जा सके।
आरोपितों ने यह भी दावा किया कि सुदीप कुमार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिसके पास से 180 पासबुक बरामद हुई हैं। उसी के हवाले से शिक्षक पर खाता उपलब्ध कराने के बदले दो लाख रुपये और मनी लॉन्ड्रिंग की रकम का 10 प्रतिशत यानी 68 लाख रुपये कमीशन लेने का आरोप लगाया गया।
शिक्षक के अनुसार, आरोपित उनके बैंक खातों, संबंधित शाखाओं और उनमें जमा राशि की जानकारी दे रहे थे। इससे उन्हें लगा कि वास्तव में सरकारी एजेंसियां जांच कर रही हैं।
ठगों ने कथित तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि की मौजूदगी का हवाला दिया और दिल्ली सेशन कोर्ट के नाम पर एक आदेश की प्रति भी दिखाई। गिरफ्तारी का भय पैदा करने के लिए हथकड़ी पहने पांच लोगों की तस्वीर या दृश्य भी दिखाये गये।
मुरादाबाद से पटना पहुंचे और फिर एफडी तुड़वाए
लगातार मानसिक दबाव के बीच शिक्षक मुरादाबाद से पटना आये और वरिष्ठ नागरिक के रूप में जमा अपनी एफडी तुड़वा दी। इसके बाद आरोपितों के निर्देश पर 30 लाख रुपये खाते में ट्रांसफर कर दिये।
उन्हें आईसीआईसीआई बैंक के माध्यम से रकम भेजने को कहा गया। आरोपितों ने भरोसा दिलाया कि जांच में सब कुछ सही मिलने पर 24 घंटे के भीतर पूरी रकम लौटा दी जाएगी।
रकम ट्रांसफर करने के दो दिन बाद आरोपितों ने शिक्षक से सोना बैंक में रखकर कर्ज लेने या उसे गलाकर उसकी वास्तविकता से संबंधित प्रमाण भेजने को कहा।
इस मांग से उन्हें संदेह हुआ कि उनके साथ साइबर ठगी की जा रही है। इसके बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत अपने भतीजे को पूरी घटना बतायी।
भतीजे ने बातचीत और घटनाक्रम को समझने के बाद इसे साइबर अपराधियों की साजिश बताया। ठगी का एहसास होने पर शिक्षक ने पटना साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी। पुलिस अब मामले की जांच में जुटी है।
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