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कार, गहने या नया घर? रवि-पुष्य के महामुहूर्त में जानें आपकी राशि के लिए क्या खरीदना रहेगा सबसे लकी

Published: Sun, 01 Nov 2026 07:00 AM (IST)

दीपावली से पहले कार्तिक कृष्ण अष्टमी को रवि-पुष्य योग का महा मुहूर्त बन रहा है। यह योग खरीदारी, नए कारोबार ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

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HighLights

  1. रवि-पुष्य योग दीपावली से पहले बन रहा है।

  2. खरीदारी, निवेश और नए कार्य के लिए शुभ।

  3. स्वर्ण, चांदी, भूमि आदि खरीदना अत्यंत लाभकारी।

जागरण संवाददाता, पटना। कार्तिक कृष्ण अष्टमी में आज रविवार को रवि-पुष्य योग का महा मुहूर्त संयोग बना है। वैदिक ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को सुख, समृद्धि, स्थिरता व निरंतर उन्नति का प्रतीक माना गया है।

इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवगुरु बृहस्पति और स्वामी शनि हैं। पुष्य नक्षत्र में सभी प्रकार की खरीदारी, नए कारोबार की शुरुआत, निवेश, बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदारी करना उत्तम रहेगा।

रवि-पुष्य में स्वर्ण, चांदी, भूमि-भवन, तांबे की वस्तु, लोहा व कीमती धातुओं की खरीदारी, निवेश तथा सोम-पुष्य में कपड़ा, अनाज, बर्तन, रजत पात्र, मोती, बही खाता, परिधान व अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ होगा।

ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि कार्तिक मास में दीपावली से पहले पुष्य नक्षत्र का उत्तम संयोग बन रहा है। यह नक्षत्र रविवार की सुबह 10:49 बजे से शुरू होगा तथा सोमवार दो नवंबर की सुबह 09:18 बजे तक रहेगा।

रविवार को रवि-पुष्य योग के अलावे सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग एवं त्रिपुष्कर योग का महा मुहूर्त बन रहा है। रविवार को पुष्य नक्षत्र पड़ने से रवि-पुष्य योग बनता है।

इसमें सूर्य की ऊर्जा, गुरु की समृद्धि और शनि की स्थिरता का दुर्लभ संयोग होता है। इसके अलावा इस दिन बुधादित्य और लक्ष्मी-नारायण योग का पावन संयोग रहेगा। ऐसे उत्तम संयोग में चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, बर्तन, वाहन, लोहा, मशीनरी, जमीन या मकान, नए बही-खाता, इत्र, पूजा सामग्री, चंदन, शंख, कौड़ी, स्वस्तिक चिह्न, मिट्टी के दीपक तथा श्रीयंत्र की खरीदारी करना शुभ रहेगा।

शुभता का प्रतीक है पुष्य नक्षत्र

पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में 8वां नक्षत्र एवं नक्षत्रों का राजा होता है। अन्य सभी नक्षत्रों के तुलना में इस नक्षत्र को सबसे शुभ और उत्तम माना गया है।

शनि की स्थिरता और बृहस्पति की शुभता का योग ही इस नक्षत्र को शुभ व महान बनाता है। ऋग्वेद में इस नक्षत्र को मंगलकर्ता कहा गया है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पुष्य नक्षत्र को स्थायी नक्षत्र होता है और इसमें खरीदी गई वस्तु अधिक समय तक उपयोगी तथा अक्षय होती है। पुष्य नक्षत्र को स्वास्थ्य के लिए भी शुभ माना गया है।

राशि अनुसार खरीदारी से अक्षय लाभ

  • मेष: सोना, बर्तन, वाहन।
  • वृष: चांदी, आभूषण, वस्त्र, सजावटी सामान।
  • मिथुन: जरूरत के अनुसार उपकरण की खरीदारी करें।
  • कर्क: चांदी के बर्तन, मोती, रसोई सामग्री।
  • सिंह: स्वर्ण धातु, तांबा के पात्र, वाहन।
  • कन्या: बही-खाता, मशीनरी के सामग्री।
  • तुला: हीरे के आभूषण, चांदी, वस्त्र, सजावटी सामान।
  • वृश्चिक: सोना, तांबा, भूमि-भवन, घरेलू उपकरण।
  • धनु: धार्मिक पुस्तक, पूजा सामग्री, वाहन, सोना।
  • मकर: भूमि, मकान, सामान्य बर्तन।
  • कुंभ: वाहन, तकनीकी उपकरण, अनाज।
  • मीन: सोना-चांदी, पीतल के बर्तन, धार्मिक पुस्तक।

रवि-पुष्य योग में खरीदारी का मुहूर्त

  • अमृत काल मुहूर्त: सुबह 10:09 बजे से 11:33 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:11 बजे से 11:55 बजे तक
  • शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 12:56 बजे से 02:20 बजे तक
  • प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 05:07 बजे से 07:50 बजे तक
  • शुभ-अमृत-चर मुहूर्त: शाम 05:07 बजे से रात्रि 09:57 बजे तक

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