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'नीतीश कुमार बस एक मिनट में कह दें ये बात, उम्मीदवार वापस ले लूंगा', प्रशांत किशोर की फ‍िर खुली चुनौती

Published: Fri, 09 Oct 2026 04:03 PM (GMT+05:30)

प्रशांत किशोर ने जदयू के नीरज कुमार पर तीखा हमला बोला, कहा कि वे अपनी औकात से ऊपर बोलने लगे ...और पढ़ें

पटना में पत्रकारों से बात करते प्रशांत क‍िशोर। सौ-पार्टी

पटना में पत्रकारों से बात करते प्रशांत क‍िशोर। सौ-पार्टी

HighLights

  1. प्रशांत किशोर ने नीरज कुमार पर 'औकात से ऊपर' बोलने का आरोप लगाया।

  2. नीतीश कुमार को नीरज कुमार के समर्थन पर स्पष्टीकरण देने की चुनौती दी।

  3. चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

डिजिटल डेस्क, पटना। बांकीपुर विधायक और जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने जदयू के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार नीरज कुमार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि नीरज कुमार अपनी औकात से ऊपर उठकर बोलने लगे थे, इसलिए उनका अंत सुनिश्चित कर दिया गया है।

प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी अपनी चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार मीडिया के सामने एक मिनट के लिए कह दें कि नीरज कुमार को उनका समर्थन प्राप्त है, तो वह अपना उम्मीदवार वापस ले लेंगे।

पीके शुक्रवार को पटना में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने एसआइआर को लेकर हो रहे विरोध, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और चुनाव में धनबल के इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी।

चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले आठ-दस वर्षों से आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।

पीके ने आरोप लगाया कि बिहार में मतदान से दो दिन पहले तक वोट खरीदे गए, लेकिन चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा। उन्होंने आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। 

बोले- जन सुराज लोकतंत्र को जिंदा कर रहा है

चुनाव को खर्चीला बनाने के आरोपों पर प्रशांत किशोर ने जन सुराज का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र को जिंदा करने का काम कर रही है।

पीके ने कहा कि पहले नेता लालू यादव के शासनकाल में जंगलराज की वापसी का डर दिखाकर चुनाव जीतते थे। उन्होंने आगे कहा कि अब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। पीके के अनुसार, जन सुराज की वजह से सरकार को चुनाव में अधिक मेहनत करनी पड़ी और पैसे खर्च करने पड़े।

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