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फुलझड़ी से रॉकेट तक... दीवाली की चमक में छिपे हैं 8 बड़े खतरे, एक चिंगारी पड़ सकती है भारी

Published: Sat, 07 Nov 2026 06:53 PM (IST)

दिवाली पर पटाखों की चमक के पीछे छिपे 8 बड़े खतरों पर यह लेख प्रकाश डालता है। फुलझड़ी से लेकर ...और पढ़ें

फुलझड़ी छोटी है, लेकिन चिंगारी का असर बड़ा

फुलझड़ी छोटी है, लेकिन चिंगारी का असर बड़ा

HighLights

  1. फुलझड़ी की चिंगारी आंखों और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है।

  2. रॉकेट की दिशा बिगड़ने से आग लगने का खतरा रहता है।

  3. तेज आवाज वाले पटाखे कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

जागरण संवाददाता, पटना। दिवाली की रात आसमान में रंगीन रोशनी, घरों के बाहर पटाखों की गूंज और बच्चों के चेहरे पर उत्साह... त्योहार का यह नजारा हर किसी को पसंद आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस फुलझड़ी को आप सबसे सुरक्षित समझकर बच्चों के हाथ में थमा देते हैं, वही उनकी आंखों और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है?

जिस अनार से रंगीन फव्वारा निकलता है, उसकी चिंगारी कपड़ों में आग लगा सकती है। रॉकेट की दिशा जरा सी बिगड़ी तो वह बालकनी, खिड़की या बिजली के तारों तक पहुंच सकता है। यानी हर पटाखे की अपनी चमक है तो अपना खतरा भी।

फुलझड़ी छोटी है, लेकिन चिंगारी का असर बड़ा!

फुलझड़ी की चमक देखकर इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। जलने के दौरान इससे निकलने वाले गर्म कण हाथ की अंगुलियों, हथेली और चेहरे को झुलसा सकते हैं। चिंगारी आंख में जाने पर कार्निया को चोट पहुंच सकती है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह ज्यादा जोखिम भरी हो सकती है।

अनार का फव्वारा खूबसूरत, लेकिन चिंगारी से बचना जरूरी

अनार से निकलने वाली रंगीन चिंगारियां देखने में आकर्षक लगती हैं, लेकिन इनके गर्म कण त्वचा और कपड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आसपास पर्दे, सूखे पत्ते या अन्य ज्वलनशील सामान होने पर आग लगने का खतरा भी रहता है। इसे जलाने के बाद तुरंत सुरक्षित दूरी बना लें।

चकरी घूमेगी गोल-गोल, चिंगारी पहुंच सकती है आपके पास

चकरी जमीन पर तेजी से घूमती है और चारों तरफ चिंगारियां छोड़ती है। असमतल सतह पर इसकी दिशा बदल सकती है। ऐसे में यह पैरों या कपड़ों तक पहुंच सकती है। इसे हाथ या पैर से रोकने की कोशिश बिल्कुल न करें। बुझी हुई चकरी को भी तुरंत न छुएं।

रॉकेट की उड़ान में रोमांच, दिशा बिगड़ी तो आफत

रॉकेट की सबसे बड़ी समस्या इसकी अनिश्चित दिशा है। हवा या गलत लांचिंग स्थिति के कारण यह मकान की खिड़की, बालकनी, पेड़ या बिजली के तारों की ओर जा सकता है। इससे आग लगने और लोगों को चोट पहुंचने का खतरा रहता है। इसे कभी हाथ में पकड़कर या कांच की बोतल में रखकर नहीं छोड़ना चाहिए।

पटाखों की लड़ी: धमाके पर धमाका, कानों पर असर

लड़ी में एक के बाद एक कई पटाखे फूटते हैं। लगातार तेज आवाज से कानों में घंटी बजने, दर्द और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। इससे निकलने वाला धुआं भी सांस संबंधी परेशानी बढ़ा सकता है। फूटते समय उसके पास खड़े होकर वीडियो बनाने का जोखिम न लें।

फ्लावर पॉट का फव्वारा भी नहीं है खतरे से खाली

फ्लावर पॉट से निकलने वाली रंगीन रोशनी और गर्म चिंगारियां आसपास खड़े लोगों के चेहरे, हाथ और कपड़ों तक पहुंच सकती हैं। सूखी घास या ज्वलनशील सामान पास होने पर आग लग सकती है। इसे खुले स्थान पर रखें और पैकेट पर लिखी सुरक्षा दूरी का पालन करें।

तेज धमाके वाले पटाखे: कुछ सेकेंड का शोर, कानों को लंबा नुकसान

तेज आवाज वाले पटाखों का धमाका कानों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे कान में घंटी बजने, दर्द और सुनाई कम देने जैसी समस्या हो सकती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए अचानक होने वाले तेज धमाके परेशानी बढ़ा सकते हैं।

धुआं छोड़ने वाले पटाखे: रंगीन नजारा, सांसों पर भारी

पटाखों से निकलने वाले धुएं में सूक्ष्म कण और गैसें होती हैं, जो आंखों और गले में जलन पैदा कर सकती हैं। अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बंद जगह या भीड़ में पटाखे जलाने से बचें। धुएं की दिशा में खड़े न हों।

पटाखे जलाने से पहले याद रखें ये पांच जरूरी बातें

  • गुणवत्ता जांचें: केवल वैध और प्रमाणित पटाखे लाइसेंस प्राप्त विक्रेता से खरीदें। पैकेट पर दिए गए निर्देश और सुरक्षा दूरी जरूर पढ़ें।
  • कपड़ों का रखें ध्यान: सूती और शरीर से सटे कपड़े पहनें। ढीले सिंथेटिक और नायलान के कपड़ों से बचें।
  • पानी और रेत रखें: पटाखे जलाने वाली जगह पर पानी की बाल्टी और रेत उपलब्ध रखें।
  • बच्चों को अकेला न छोड़ें: पटाखे जलाते समय वयस्क की निगरानी जरूरी है।
  • नहीं जला तो दोबारा न छुएं: जो पटाखा नहीं फूटे, उसे दोबारा जलाने, खोलने या उठाने की कोशिश न करें। सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

पटाखे से हादसा हो जाए तो घबराएं नहीं, जानिए क्या करें

  • हाथ या शरीर जलने पर: जले हिस्से को 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। बर्फ, टूथपेस्ट या तेल न लगाएं। चिपके कपड़े न खींचें।
  • आंख में चिंगारी जाने पर: आंख न रगड़ें और न दबाएं। तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
  • कान में तेज आवाज के बाद सुनाई कम देने पर: शोर से दूर जाएं और ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराएं।
  • धुआं सांस में जाने पर: तुरंत स्वच्छ हवा में जाएं। सांस फूलने या सीने में दर्द होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
  • कपड़ों में आग लगने पर: दौड़ें नहीं। रुकें, जमीन पर लेटें और लुढ़ककर आग बुझाएं।
  • गंभीर रूप से जलने पर: घरेलू नुस्खों में समय न गंवाएं। तत्काल अस्पताल पहुंचें या आपातकालीन सहायता लें।

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