दीपावली पर घर में जरूर रखें ये 12 चीजें, धन पोटली से जुड़ी हैं मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि की मान्यताएं
दीपावली और धनतेरस पर धन पोटली बनाने की परंपरा का महत्व बताया गया है, जो धन, सुख-शांति और समृद्धि लाती ...और पढ़ें

हल्दी-कौड़ी से लेकर कमलगट्टे तक का विशेष महत्व
HighLights
धन पोटली में रखी हर वस्तु का है विशेष धार्मिक महत्व।
हल्दी, कौड़ी, कमलगट्टा, चांदी के सिक्के धन के प्रतीक।
सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए दीपावली पर रखें धन पोटली।
जागरण संवाददाता, पटना। दीपावली पर हर कोई चाहता है कि उसके घर में मां लक्ष्मी का वास हो, धन की कमी न रहे और परिवार में सुख-शांति बनी रहे। इसी कामना के साथ धनतेरस और दीपावली पर धन पोटली तैयार करने की परंपरा निभाई जाती है। खास बात यह है कि इस छोटी-सी पोटली में रखी जाने वाली हर वस्तु का अपना अलग धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बताया गया है।
हल्दी से लेकर कौड़ी, कमलगट्टा और चांदी के सिक्के तक इसमें शामिल किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये वस्तुएं धन, वैभव, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक हैं। धनतेरस पर बाजारों में इन सामग्रियों की खरीदारी को लेकर भी लोगों में उत्साह देखने को मिला।
हल्दी-कौड़ी से लेकर कमलगट्टे तक का विशेष महत्व
ज्योतिष आचार्य पंडित राघव नाथ झा के अनुसार, धन पोटली में शामिल वस्तुएं अलग-अलग ग्रहों और देवी-देवताओं से जुड़ी मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
साबुत हल्दी को देवगुरु बृहस्पति का प्रतीक माना जाता है। इसे पोटली में रखने के पीछे भाग्य, ज्ञान और आर्थिक उन्नति की कामना होती है।
वहीं, कौड़ी को माता लक्ष्मी का प्रिय प्रतीक माना गया है। प्राचीन समय में मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होने वाली कौड़ी को धन और ऐश्वर्य से जोड़कर देखा जाता है।
कमलगट्टा और गोमती चक्र से जुड़ी है समृद्धि की मान्यता
कमलगट्टा माता लक्ष्मी की पूजा में विशेष महत्व रखता है। इसे धन वृद्धि, व्यापार में उन्नति और स्थायी समृद्धि की कामना से पोटली में रखा जाता है।
वहीं, गोमती चक्र को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से संबंधित शुभ प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसे सौभाग्य और बाधाओं से मुक्ति की कामना के साथ रखा जाता है।
चावल-सुपारी से घर में बरकत की कामना
धन पोटली में अरवा चावल यानी अक्षत भी रखा जाता है। इसे पूर्णता, अन्न और मंगल का प्रतीक माना गया है। इसकी मौजूदगी घर में अन्न-धन की निरंतरता की कामना से जुड़ी है।
सुपारी को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। इसे रखने के पीछे आर्थिक और व्यावसायिक कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
चांदी और सोने के सिक्के का भी है खास महत्व
पोटली में चांदी का सिक्का रखने की भी परंपरा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चांदी का संबंध चंद्रमा से है, जिसे सुख, शांति और मानसिक शीतलता का कारक माना जाता है।
वहीं, सोने का सिक्का सूर्य के तेज, प्रतिष्ठा और वैभव का प्रतीक है। इसे घर में संपन्नता और सम्मान बनाए रखने की कामना से रखा जाता है।
केसर, लौंग-इलायची और लाल चंदन भी होते हैं शामिल
धन पोटली में केसर को गुरु की शुभता और सूर्य के तेज से जोड़कर देखा जाता है। लौंग को नकारात्मकता से रक्षा और इलायची को परिवार में प्रेम एवं मधुरता का प्रतीक माना जाता है।
वहीं, लाल चंदन शक्ति, साहस और आत्मबल का प्रतीक है। इन सामग्रियों को पोटली में शामिल करने के पीछे परिवार की खुशहाली और जीवन में सफलता की कामना रहती है।
साबुत धनिया को माना जाता है बरकत का प्रतीक
साबुत धनिया भी धन पोटली की प्रमुख सामग्रियों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसे समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक माना जाता है।
पंडित राकेश झा के अनुसार, धन पोटली सुख-समृद्धि और सौभाग्य से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं का प्रतीक है। धनतेरस पर इसकी खरीदारी को शुभ माना जाता है।
धन पोटली में रखी जाने वाली इन सभी वस्तुओं का महत्व केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह परिवार में सुख, शांति, अन्न, सम्मान और खुशहाली की कामना का प्रतीक भी है। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद इसे श्रद्धा के साथ रखने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
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