किसी ने लुटाया रिटायरमेंट फंड, किसी ने बेची जमीन; 100 करोड़ की ठगी का मास्टरमाइंड 2 साल बाद लखनऊ से अरेस्ट
शेयर मार्केट में 30-50% मुनाफे का लालच देकर 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले श्रीधर पाठक को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है।

100 करोड़ की ठगी का मास्टरमाइंड 2 साल बाद लखनऊ से अरेस्ट
HighLights
श्रीधर पाठक 100 करोड़ से अधिक की ठगी के आरोप में गिरफ्तार।
शेयर मार्केट में ऊंचे मुनाफे का लालच देकर ठगी करता था।
दो साल से फरार आरोपी लखनऊ से पकड़ा गया।
जागरण संवाददाता, पटना। शेयर मार्केट में पैसा लगाकर मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाने वाला श्रीधर पाठक पुलिस के हत्थे चढ़ गया। करीब दो साल से फरार चल रहे श्रीधर को पुलिस ने पांच अक्टूबर को लखनऊ से गिरफ्तार किया। पुलिस टीम उसे पटना लेकर पहुंची तो उसके खिलाफ शिकायत करने वाले पीड़ितों की भीड़ कोतवाली पहुंचने लगी।
किसी ने बेटी की शादी के लिए रखे पैसे लगाए थे, तो किसी ने रिटायरमेंट के बाद मिली जीवनभर की जमा पूंजी। कई पीड़ितों का आरोप है कि श्रीधर ने शुरुआत में मुनाफा देकर उनका भरोसा जीता और जब बड़ी रकम उसके पास पहुंच गई तो पैसे लौटाना बंद कर फरार हो गया।
100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने का आरोप श्रीधर पर लगा है। एएसपी लॉ एंड ऑर्डर कृष्ण मुरारी प्रसाद ने बताया कि लखनऊ से श्रीधर को गिरफ्तार किया गया है। इसके पास से कई सारे चेक और दस्तावेज मिले है। कई लोगों से रुपये की ठगी की गई है।
श्रीधर लोगों को शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 30 से 50 प्रतिशत तक मुनाफे का लालच देता था। इसके लिए उसने दीघा के मखदुमपुर स्थित गेट नंबर-93 के पास कार्यालय खोल रखा था। वह निवेशकों को भरोसा दिलाता था कि उसके जरिए पैसा लगाने पर कम समय में अच्छी-खासी रकम वापस मिलेगी।
ठगी का तरीका भी ऐसा था कि शुरुआत में निवेशकों को करीब 10 से 12 महीने तक मुनाफा दिया गया। इससे लोगों को लगा कि पैसा सही जगह लगाया गया है। जिन लोगों को शुरुआती फायदा मिला, उन्होंने न केवल खुद और रकम लगाई, बल्कि अपने परिचितों को भी श्रीधर के पास निवेश करने की सलाह दी।
इसी भरोसे के बाद कई लोगों ने लाखों और करोड़ों रुपये तक लगा दिए। श्रीधर करीब दो साल से पुलिस की पकड़ से बाहर था। बताया जा रहा है कि वह विदेश भागने की तैयारी में था। इसी दौरान पुलिस ने उसकी लोकेशन का पता लगाकर लखनऊ में उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे पटना लेकर पहुंची। श्रीधर के पकड़े जाने की खबर जैसे ही निवेशकों तक पहुंची, वे अपनी शिकायतें लेकर कोतवाली पहुंचने लगे। पीड़ितों का कहना है कि लंबे समय से वे आरोपी की तलाश और अपनी रकम की वापसी के लिए परेशान थे।
भरोसा बढ़ा तो रकम भी बढ़ती गई
शुरुआती भुगतान ने श्रीधर के लिए सबसे बड़ा भरोसा तैयार किया। निवेशकों को जब समय पर मुनाफा मिलने लगा तो उन्होंने अपनी जमा पूंजी निकालकर उसके पास लगानी शुरू कर दी। किसी ने शादी के लिए रखे पैसे लगाए, किसी ने जमीन बेचकर रकम जुटाई और किसी ने रिटायरमेंट के बाद मिली राशि निवेश कर दी।
आरोप है कि जब रकम करोड़ों तक पहुंच गई तो मुनाफे का भुगतान बंद हो गया। निवेशक अपनी रकम मांगने लगे, लेकिन उन्हें अलग-अलग बहाने मिलते रहे। इसके बाद श्रीधर फरार हो गया।
आनंद पंडित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने श्रीधर के जरिए शेयर मार्केट में एक करोड़ 72 लाख रुपये लगाए थे। उनका कहना है कि अलग-अलग जगहों और खातों के माध्यम से रकम दी गई।
श्रीधर ने छह महीने में रकम 50 प्रतिशत बढ़ाकर देने का भरोसा दिया था। समय बीतने के बाद न मुनाफा मिला और न मूल रकम वापस हुई। श्रीधर के फरार होने के बाद आनंद समेत कई निवेशक अपनी रकम के लिए भटकते रहे।
बहन की शादी के लिए लगाए 25 लाख, जमीन बेचकर करनी पड़ी शादी
मो. नूर आलम के मुताबिक, उन्होंने श्रीधर को करीब 25 लाख रुपये दिए थे। श्रीधर ने तीन महीने में मुनाफा देने की बात कही थी।
नूर आलम ने बताया कि वह लांड्री का काम करते हैं और बहन की शादी के लिए रकम की जरूरत थी। उन्हें उम्मीद थी कि निवेश से मिलने वाले मुनाफे से बहन की शादी हो जाएगी, लेकिन पैसा वापस नहीं मिला। आखिरकार उन्हें जमीन बेचकर बहन की शादी करनी पड़ी।
नूर आलम का आरोप है कि जब उन्होंने श्रीधर से अपनी रकम मांगी तो उन्हें केस में फंसाने की धमकी भी दी गई।
मुस्ताक अहमद ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में नौ लाख रुपये लगाए थे। पहले उन्हें फायदा मिला तो भरोसा बढ़ गया। बेटी की शादी को देखते हुए उन्होंने और रकम निवेश कर दी। बाद में श्रीधर ने मुनाफा देना बंद कर दिया।
मुस्ताक के मुताबिक, वह शिक्षक पद से रिटायर हुए थे और रिटायरमेंट के बाद मिली रकम को निवेश किया था। अब उन्हें अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की उम्मीद पुलिस से है। उनके नाम से जारी एक चेक भी बाउंस होने की बात सामने आई है।
टिंकू ने बताया कि उन्होंने करीब 15 लाख रुपये लगाए थे। उनके पड़ोस में रहने वाले पंकज पटेल ने उन्हें श्रीधर के निवेश के बारे में बताया था। शुरुआत में उन्हें एक-दो बार फायदा मिला, जिससे उन्हें लगा कि निवेश सुरक्षित है। इसके बाद उन्होंने रकम बढ़ा दी, लेकिन कुछ समय बाद भुगतान बंद हो गया।
टिंकू का कहना है कि जब वह श्रीधर को खोजते हुए उसके घर पहुंचे तो परिवार ने उससे किसी तरह का लेनदेन होने से इनकार कर दिया।
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