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बिहार: 82 ATM कार्ड और लग्जरी कार के साथ पकड़े गए 3 'ग्रेजुएट' ठग, SP के रिश्तेदार को भी लगाया चूना

Published: Thu, 15 Oct 2026 06:08 PM (GMT+05:30)

श्रीकृष्णापुरी पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर लोगों के खातों से तीन करोड़ रुपये से अधिक निकालने वाले गिरोह के तीन स्नातक पास शातिरों को गिरफ्तार किया है।

पटना में एटीएम कार्ड बदलकर 3 करोड़ की ठगी, स्नातक पास तीन शातिर गिरफ्तार (AI Generated Image)

पटना में एटीएम कार्ड बदलकर 3 करोड़ की ठगी, स्नातक पास तीन शातिर गिरफ्तार (AI Generated Image)

HighLights

  1. एटीएम कार्ड बदलकर 3 करोड़ की ठगी।

  2. तीन स्नातक पास शातिर अपराधी गिरफ्तार।

  3. 82 एटीएम कार्ड, एसयूवी गाड़ी बरामद।

जागरण संवाददाता, पटना। एटीएम में मदद करने के बहाने लोगों के कार्ड बदलकर उनके बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ाने वाले गिरोह के तीन शातिर अपराधियों को श्रीकृष्णापुरी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सुधाकर उर्फ प्रियांश, प्रशांत कुमार और राकेश कुमार के रूप में हुई है।

पुलिस ने इनके पास से 82 एटीएम कार्ड, तीन मोबाइल फोन और एक एक्सयूवी 500 गाड़ी बरामद की है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने कुछ ही महीनों में लोगों के बैंक खातों से तीन करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है।

इसके निशाने पर एक पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में तैनात एसपी के रिश्तेदार समेत सैकड़ों लोग आ चुके हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार तीनों आरोपित स्नातक पास हैं और लंबे समय से एटीएम कार्ड बदलकर ठगी करने के धंधे में सक्रिय थे।

सुधाकर उर्फ प्रियांश इस गिरोह का सरगना है। उसके खिलाफ 17 मामले दर्ज हैं, जबकि प्रशांत कुमार और राकेश कुमार पर दो-दो मामले दर्ज हैं। सुधाकर और प्रशांत गया जिले के सिविल लाइंस, जबकि राकेश फतेहपुर का रहने वाला है।

कई थाना क्षेत्रों में कर चुके हैं वारदात

गिरोह पटना के श्रीकृष्णापुरी, पाटलिपुत्र, कोतवाली और बुद्धा कालोनी समेत कई इलाकों में वारदात कर चुका है। इसके अलावा गया, नवादा और सीतामढ़ी के साथ झारखंड के रांची, जमशेदपुर और सिंहभूम में भी लोगों को निशाना बनाया गया।

पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में तैनात एक एसपी के रिश्तेदार का एटीएम कार्ड बदलकर लाखों रुपये निकालने के बाद पुलिस ने गिरोह की तलाश तेज की और तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरोह के सदस्य उन एटीएम केंद्रों को निशाना बनाते थे, जहां सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं रहते थे। आरोपित मशीन में फेवीक्विक जैसी चिपकने वाली सामग्री लगा देते थे, जिससे कार्ड फंस जाता था।

इस दौरान वे आसपास खड़े होकर ग्राहक का पिन देख लेते थे। इसके बाद ग्राहक को मदद के नाम पर हेल्पलाइन नंबर देते थे या किसी बहाने एटीएम से बाहर बुला लेते थे।

ग्राहक के निकलते ही दूसरा सदस्य निकाल लेते थे रुपये

ग्राहक के बाहर निकलते ही गिरोह का दूसरा सदस्य एटीएम में पहुंचकर कार्ड के जरिये रुपये निकाल लेता था। कई मामलों में आरोपित मदद करने के बहाने ग्राहक का कार्ड ही बदल देते थे। पिन पहले से पता होने के कारण वे आसानी से खाते से रकम निकाल लेते थे।

पटना के अलावा रांची के कई एटीएम केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में गिरोह के सदस्यों की गतिविधियां कैद हुई थीं। फुटेज के आधार पर पुलिस को आरोपितों की पहचान करने में मदद मिली।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह में दो दर्जन से अधिक सदस्य सक्रिय हैं, जो पटना के अलग-अलग इलाकों में वारदात करते हैं। सिटी एसपी चंद्रप्रकाश के अनुसार, गिरोह के कई अन्य सदस्यों के नाम सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

ठगी की रकम से खरीदी कार, बैंक खातों में भी जमा की मोटी राशि

पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपित एटीएम कार्ड बदलकर या कार्ड फंसाकर प्रतिदिन दो से तीन लाख रुपये तक निकाल लेते थे। ठगी की रकम से महंगी गाड़ी खरीदी गई और बैंक खातों में भी बड़ी राशि जमा की गई। आरोपित इस पैसे का इस्तेमाल ऐशो-आराम पर भी करते थे।

पुलिस अब बरामदगी के साथ-साथ आरोपितों के बैंक खातों और आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही है। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि गया और नवादा जिलों में इस तरह की ठगी करने वाला एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है।

गिरोह के कुछ सदस्य प्रशिक्षक की भूमिका निभाते हैं और युवाओं को एटीएम कार्ड बदलकर रुपये निकालने के तरीके सिखाते हैं। इसके बाद उन्हें अलग-अलग इलाकों में वारदात के लिए लगाया जाता है। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी में जुटी है।

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