विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिहार: 'मेडिकल में स्पर्म न मिलना, दुष्कर्म न होने का सबूत नहीं', 8 साल की मासूम के दरिंदे की उम्रकैद बरकरार

Published: Wed, 23 Sep 2026 06:59 PM (IST)

पटना हाई कोर्ट ने दरभंगा में 8 वर्षीय बच्ची से दरिंदगी के दोषी बमबम मुखिया की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।

8 साल की मासूम के दरिंदे की उम्रकैद बरकरार

8 साल की मासूम के दरिंदे की उम्रकैद बरकरार

HighLights

  1. बमबम मुखिया की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी गई।

  2. पीड़िता को बिहार पीड़ित मुआवजा योजना के तहत 6 लाख मिलेंगे।

  3. जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट (Patna High Court News) ने दरभंगा की एक 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले में निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दोषी बमबम मुखिया की ताउम्र कैद की सजा बरकरार रखी है।

न्यायाधीश बिबेक चौधरी और न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने आपराधिक अपील को खारिज करते हुए साफ कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में दोषी किसी भी राहत का हकदार नहीं है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि पीड़िता की गवाही में मामूली उतार-चढ़ाव या समय के फेरबदल से मुख्य अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि मेडिकल रिपोर्ट में शुक्राणु न मिलने का मतलब यह नहीं है कि दुष्कर्म नहीं हुआ।

क्या था मामला?

मामला 1-2 मई 2017 की रात का है। पीड़िता की मां झंझारपुर गई थी, घर में वह और उस का 5 साल का भाई था। रात करीब 3 बजे पड़ोसी बमबम मुखिया ने घर में घुसकर मुंह दबाकर दुष्कर्म किया, जिससे बच्ची को गंभीर रक्तस्राव हुआ।

चीख सुनकर चाची रामदई देवी पहुंची तो आरोपी भाग गया। बच्ची को दरभंगा के डीएमसीएच में भर्ती कराया गया और 2 मई को महिला थाना में केस दर्ज हुआ।

दरभंगा के पॉक्सो न्यायालय ने 28 सितंबर 2018 को धारा 376(2)(आई) आईपीसी और धारा 6 पॉक्सो में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 30 हजार जुर्माना का सजा दी।सजा आदेश को हाई कोर्ट में आपराधिक अपील दायर कर चुनौती दी गई।

मामले की जांच में सामने आई घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने दरभंगा महिला थाना की तत्कालीन जांच अधिकारी नीलम कुमारी के रवैये की सख्त निंदा की।

कोर्ट ने कहा कि घटनास्थल का नक्शा न बनाना, स्वतंत्र गवाहों से पूछताछ न करना और आरोपी का मेडिकल न कराना जांच अधिकारी की गैर-जिम्मेदारी को दर्शाता है। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि पुलिस की नाकारा जांच के कारण दोषी को बरी नहीं किया जा सकता।

पीठ ने दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि उक्त जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए और 3 महीने में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाए।

फैसले अदालत ने दोषी बमबम मुखिया की आजीवन कारावास और 30,000 रुपये के जुर्माने की सजा को बनाए रखा। इसके अलावा, बिहार पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता को 6 लाख रुपये की राशि 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया गया है।

यह भी पढ़ें- दरभंगा जिला परिषद विवाद: अविश्वास प्रस्ताव बरकरार, हाई कोर्ट ने खारिज की सीता देवी की याचिका

यह भी पढ़ें- कैदियों की सजा में छूट पर नहीं चलेगी मनमानी, पटना हाई कोर्ट का बिहार सरकार पर शिकंजा