मां ने नाबालिग बेटी को चाय की दुकान पर बैठाया? पिता के आरोप पर पटना हाईकोर्ट सख्त, जांच के आदेश
पटना हाईकोर्ट ने दरभंगा के एक पारिवारिक विवाद में नाबालिग बच्ची की सुरक्षा को लेकर गंभीर रुख अपनाया है।

पटना हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
नाबालिग बच्ची से चाय दुकान पर काम कराने का आरोप।
पटना हाईकोर्ट ने जांच के दिए सख्त निर्देश।
तीन महीने में अभिरक्षा विवाद सुलझाने का आदेश।
जागरण संवाददाता, पटना। नाबालिग बच्ची की सुरक्षा और हित को सर्वोपरि बताते हुए पटना हाईकोर्ट ने दरभंगा के एक पारिवारिक विवाद में गंभीर रुख अपनाया है।
कोर्ट ने इस आरोप की जांच कराने का निर्देश दिया है कि एक मां अपनी नाबालिग बेटी से चाय की दुकान पर काम करवा रही है।
कोर्ट ने कहा कि यदि बच्ची को दुकान पर बैठाकर काम कराया जा रहा है और उसे देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता है, तो उसकी सुरक्षा के लिए उचित आदेश पारित किया जाए।
न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद और न्यायाधीश सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने अनुग्रह की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दरभंगा के प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय को यह निर्देश दिया।
मामला पिता और मां के बीच नाबालिग बेटी की अभिरक्षा से जुड़ा है। कोर्ट ने पाया कि परिवार न्यायालय ने पांच अप्रैल 2025 के अंतरिम आदेश में बच्ची की अभिरक्षा मां के पास रखते हुए पिता को प्रत्येक शनिवार शाम से रविवार शाम तक मिलने और बच्ची को अपने साथ रखने का अधिकार दिया था।
मां ने नहीं किया निर्देशों का पालन
इसके अलावा स्कूल की पढ़ाई, छुट्टियों में मुलाकात और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क की भी व्यवस्था की गई थी। पिता का आरोप है कि मां इन निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं और बच्ची से चाय दुकान पर काम कराया जा रहा है।
खंडपीठ ने परिवार न्यायालय को निर्देश दिया कि इस आरोप की दो सप्ताह के भीतर जांच कराई जाए और अंतरिम आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही, मां को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देते हुए अनावश्यक स्थगन से बचने तथा अभिरक्षा मामले का तीन महीने के भीतर निष्पादन करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच में बच्ची को देखभाल और संरक्षण की जरूरत सामने आने पर उसके हित में उचित आदेश पारित किया जाए।
यह भी पढ़ें- पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षक भर्ती में गेस्ट टीचर्स को नहीं मिलेगा अनुभव का बोनस अंक