पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षक भर्ती में गेस्ट टीचर्स को नहीं मिलेगा अनुभव का बोनस अंक
पटना हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में गेस्ट टीचरों की शिक्षक भर्ती में अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक देने की मांग खारिज कर दी है।

शिक्षक भर्ती में गेस्ट टीचरों को अनुभव का लाभ नहीं, हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
HighLights
गेस्ट टीचरों की अनुभव वेटेज मांग खारिज।
न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त करना अनिवार्य।
नए अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए।
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में गेस्ट टीचर के रूप में कार्यरत अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती में अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक देने की मांग खारिज कर दी है।
कोर्ट ने विज्ञापन संख्या 22/2024 के तहत नियुक्ति प्रक्रिया में प्रत्येक वर्ष के अनुभव पर पांच अंक, अधिकतम 25 अंक तक वेटेज देने की मांग स्वीकार नहीं की।
न्यायाधीश हरीश कुमार की एकलपीठ ने अभिषेक कुमार सिंह सहित 29 अभ्यर्थियों की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे बिहार के विभिन्न सरकारी स्कूलों में अलग-अलग विषयों के गेस्ट टीचर के रूप में काम कर रहे हैं।
उन्होंने 29 मई 2024 को एक अन्य मामले में पारित आदेश और माध्यमिक शिक्षा निदेशक के 31 मई 2024 के पत्र (ज्ञाप संख्या 1470) का हवाला देते हुए समान आधार पर अनुभव का वेटेज देने की मांग की थी।
उनका तर्क था कि अनुभव के अंक जुड़ने पर वे विज्ञापन संख्या 22/2024 के तहत निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक हासिल कर चयनित हो सकते थे।
वहीं, बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से दलील दी गई कि विज्ञापन की कंडिका-4 में न्यूनतम अर्हता अंकों की शर्त स्पष्ट है।
इसके समर्थन में कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के संकल्प संख्या 2374, दिनांक 6 जुलाई 2007 और पत्र संख्या 6706, दिनांक 1 अक्टूबर 2008 का हवाला दिया गया।
आयोग की ओर से कहा गया कि अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित न्यूनतम अर्हता अंक हासिल करना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि संबंधित विषय का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन आयोग की ओर से निर्धारित न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त करना भी अनिवार्य है।
अनुभव के आधार पर लाभ पाने से पहले अभ्यर्थियों को विषय में अपनी योग्यता साबित करनी होगी। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि भर्ती प्रक्रिया में नए अभ्यर्थियों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।
इन परिस्थितियों में कोर्ट ने विज्ञापन में निर्धारित शर्तों को सही ठहराते हुए पूर्व के फैसलों के आधार पर याचिका खारिज कर दी।
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