'बिहार में न्यायपालिका के भविष्य को लेकर डर लगता है', फैमिली कोर्ट के फैसले पर पटना हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
पटना हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक अपील की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट के फैसले और उसकी कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है।

पटना परिवार न्यायालय के फैसले पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी।
HighLights
पटना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया।
फैमिली कोर्ट ने तलाक के लिए गलत कानून का इस्तेमाल किया।
हाईकोर्ट ने पति को 50 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया।
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक अपील की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट के फैसले और उसकी कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है।
न्यायाधीश बिबेक चौधरी और न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह की पीठ ने पटना स्थित फैमिली कोर्ट के अपर प्रधान न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश पर आश्चर्य व्यक्त किया।
न्यायाधीश की ओर से घोर लापरवाही
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 'यह देखकर खेद होता है कि पटना स्थित फैमिली कोर्ट के अपर प्रधान न्यायाधीश के रैंक के एक न्यायिक अधिकारी ने मामले का फैसला करने के लिए लागू कानून की पुष्टि किए बिना ही एक मुकदमे में आदेश पारित कर दिया।
यह न केवल अनभिज्ञता है, बल्कि संबंधित विचारण न्यायाधीश की ओर से घोर लापरवाही है। यदि ऐसा होता है, तो हमें बिहार राज्य में न्यायपालिका के भविष्य को लेकर डर लगता है।'
क्या है मामला ?
मामले के अनुसार, अपर प्रधान न्यायाधीश ने ईसाई जोड़े के तलाक के मामले पर 'इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872' की धारा 10(1) के तहत विचार किया था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उक्त अधिनियम भारत में ईसाई जोड़ों के विवाह विच्छेद को नियंत्रित नहीं करता है, बल्कि इसके लिए 'डिवोर्स एक्ट, 1869' ही लागू कानून है।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रद करते हुए अपील को स्वीकार कर लिया और अलगाव के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री मंजूर की। इसके साथ ही पति को 50 लाख रुपये की स्थायी गुजारा भत्ता राशि तीन महीने के भीतर चुकाने का निर्देश दिया।
