गंगा घाटों में दलदल और गंदगी, पैरों में चुभ रहे ईंटों के टुकड़े; बिहार में कैसी चल रही छठ महापर्व की तैयारी?
पटना में छठ महापर्व से पहले गंगा घाटों की स्थिति चिंताजनक है, जहां दलदल, कीचड़ और गंदगी व्याप्त है। नगर ...और पढ़ें

छठ पूर्व विभिन्न घाटों का हाल - बांस घाट से गंगा पहुंच पथ पर जलजमाव एवं कीचड़। जागरण
HighLights
गंगा घाटों पर दलदल, कीचड़ और गंदगी से परेशानी।
पाटीपुल, दीघा, कलेक्ट्रेट घाटों की स्थिति खराब।
नगर निगम का 13 नवंबर तक घाट तैयार करने का लक्ष्य।
मनीष कुमार, पटना। गंगा किनारे आस्था का महासागर उमड़ने में 22 दिन शेष हैं, लेकिन घाटों तक पहुंचने की राह अभी दलदल, कीचड़ और गंदगी से अटी पड़ी है। कहीं गीली मिट्टी में पैर धंसने का डर है तो कहीं कचरे के ढेर पर मंडराते कौए और कुत्ते घाटों की बदहाली बयां कर रहे हैं।
पाटीपुल, दीघा के 83, 88 और 93 नंबर घाट से लेकर कलेक्ट्रेट घाट तक शुक्रवार को पड़ताल में छठ व्रतियों की राह आसान नजर नहीं आई। हालांकि, गंगा का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और तेज धूप से पानी से बाहर निकली बालू-मिट्टी भी सूख रही है।

ऐसे में उम्मीद है कि अगले 10 दिनों में दलदल और कीचड़ की स्थिति काफी सुधरेगी। इन पांच घाटों पर हर साल सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते हैं। पर्यटन घाट, बांस घाट, पहलवान घाट, कुर्जी घाट, राजापुर पुल घाट, एलसीटी घाट समेत अन्य गंगा घाटों पर भी कमोबेश यही स्थिति दिखी।

नगर निगम ने 13 नवंबर तक सभी छठ घाटों को तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अब देखना यह है कि आस्था के इस महापर्व से पहले घाटों की सूरत कितनी संवर पाती है।
इस बार लोक आस्था का महापर्व छठ 13 से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। 15 नवंबर को अस्ताचलगामी और 16 नवंबर को उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए गंगा घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ेगा। प्रस्तुत है प्रमुख छठ घाटों की जमीनी पड़ताल पर आधारित रिपोर्ट :-
पाटीपुल घाट : ईंट के टुकड़े और गंदगी से परेशानी
पाटीपुल घाट पर दलदल और कीचड़ की स्थिति भले ही खत्म हो चुकी है, लेकिन छठ व्रतियों की राह अब भी पूरी तरह आसान नहीं हुई है।
घाट पर जगह-जगह बिखरे ईंट के टुकड़े पैरों में चुभ रहे हैं। चारों ओर पसरी गंदगी और कचरे के ढेर पर मंडराते कौओं का झुंड घाट की बदहाली बयां कर रहा है।
ऐसे में छठ के दौरान अर्घ्य देने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है। महापर्व से पहले घाट की सफाई के साथ रास्ते से ईंट के टुकड़ों को हटाना जरूरी है, ताकि व्रतियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। साथ ही, श्रद्धालुओं के सुरक्षित आवागमन के लिए रास्ते को दुरुस्त करना होगा।
दीघा 83 नंबर घाट : अंडरपास में जलजमाव, कचरे पर मंडराते कुत्ते-कौए
दीघा 83 नंबर घाट पर छठ व्रतियों की राह में कई बाधाएं हैं। घाट तक पहुंचने वाले अंडरपास में अब भी पानी जमा है। जलकुंभी का ढेर लगा है, जबकि आसपास जगह-जगह कचरा पसरा हुआ है। कूड़े के ढेर पर कुत्तों और कौओं का झुंड मंडराता दिखा।
घाट पर दलदल और कीचड़ की स्थिति भी बनी हुई है, जो यहां की बदहाली बयां कर रही है। ऐसे में छठ के दौरान अर्घ्य देने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
महापर्व से पहले अंडरपास से पानी निकालने, जलकुंभी हटाने और घाट की सफाई कराने की जरूरत है। साथ ही, दलदल और कीचड़ से निजात दिलाना भी जरूरी है।
दीघा 88 नंबर घाट : बदहाल सड़क और जलजमाव से बढ़ेगी परेशानी
दीघा 88 नंबर घाट तक पहुंचने वाली सड़क की बदहाली श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा सकती है। घाट के रास्ते में पड़ने वाले अंडरपास में अब भी जलजमाव है। वहीं, घाट पर गंदगी पसरी है और कीचड़ व दलदल की स्थिति बनी हुई है।
ऐसे में छठ के दौरान अर्घ्य देने पहुंचने वाले व्रतियों और श्रद्धालुओं को आने-जाने में परेशानी हो सकती है। इस घाट का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यहां से होकर श्रद्धालु आसपास के दूसरे घाटों तक भी पहुंचते हैं।
ऐसे में रास्ते की बदहाली का असर कई घाटों पर आने-जाने वाले लोगों पर पड़ सकता है। महापर्व से पहले सड़क की मरम्मत, अंडरपास से पानी की निकासी और घाट की सफाई जरूरी है।
दीघा 93 नंबर घाट : कटाव और जलजमाव से बढ़ी परेशानी
दीघा के 93 नंबर घाट पर सबसे बड़ी समस्या गंगा किनारे हो रहे कटाव की है। किनारे पहुंचते ही मिट्टी ढहकर गंगा में समा रही है। घाट पर गंदगी और दलदल पसरा है, जबकि कचरे के आसपास कौओं का झुंड मंडराता दिखा।
घाट तक सीधे पहुंचने वाले अंडरपास में जलजमाव के साथ जलकुंभी का अंबार लगा है। फिलहाल दीघा गोलंबर की ओर से किसी तरह यहां पहुंचा जा सकता है।
वहीं, 88 नंबर घाट के अंडरपास से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु 93 नंबर घाट आते हैं, लेकिन वहां भी पानी जमा है। दोनों घाटों के बीच दलदल और कीचड़ के कारण रास्ता बेहद मुश्किल हो गया है। छठ से पहले इन समस्याओं का समाधान जरूरी है।
कलेक्ट्रेट घाट : मुख्य सड़क से दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर
मुख्य सड़क से कलेक्ट्रेट घाट की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है, लेकिन इस रास्ते को तय करना आसान नहीं है। जगह-जगह गड्ढों में गंगा का पानी जमा है। कलेक्ट्रेट से घाट की ओर बढ़ने पर कीचड़ और दलदल की स्थिति परेशानी बढ़ा रही है।
पानी सूखने के बाद भी घाट तैयार करने की राह आसान नहीं होगी। ऐसे में छठ महापर्व से पहले इस घाट को तैयार करना नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
घाट तक पहुंचने वाले रास्ते को दुरुस्त करने के साथ गड्ढों को भरना और दलदल हटाना जरूरी होगा। समय रहते सफाई और समतलीकरण नहीं हुआ तो अर्घ्य देने पहुंचने वाले व्रतियों और श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी हो सकती है।
