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पटना में फर्जी कागजात और गायब जमीनों पर 1.60 करोड़ रुपये का गबन, 8 पर FIR

Published: Thu, 24 Sep 2026 06:48 PM (IST)

बैंक ऑफ बड़ौदा की पटना स्थित कदमकुआं शाखा में 1.60 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। फर्जी ...और पढ़ें

पटना में फर्जी कागजात और गायब जमीनों पर 1.60 करोड़ रुपये का गबन, 8 पर FIR (AI Generated Image)

पटना में फर्जी कागजात और गायब जमीनों पर 1.60 करोड़ रुपये का गबन, 8 पर FIR (AI Generated Image)

HighLights

  1. पटना बैंक ऑफ बड़ौदा में 1.60 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर।

  2. फर्जी कागजात और गायब संपत्तियों पर लोन स्वीकृत किए गए।

  3. पांच कर्जदार, दो एजेंट और एक सत्यापन एजेंसी पर एफआईआर।

जागरण संवाददाता, पटना। कदमकुआं स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की खजांची रोड शाखा में बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। फर्जी नियोक्ता विवरण, फर्जी बैंक स्टेटमेंट और धरातल पर गायब संपत्तियों के कागजात दिखाकर बैंक को 1,59,66,000 रुपये का चूना लगाया गया है।

घोटाला उजागर तब हुआ जब लोन खातों के एनपीए होने पर बैंक अधिकारियों ने मौके पर जाकर बंधक रखी गई संपत्तियों की जांच की। जांच के दौरान मौके पर लोन से जुड़ी किसी भी संपत्ति की पहचान नहीं हो सकी। जिस जमीन के कागजात को बैंक में बंधक रखा गया था वह वहां थी ही नहीं।

यही नहीं कागजात भी फर्जी थे। शाखा प्रबंधक नवीन कुमार ने पटना के हवाई अड्डा, अलमगंज, फतुहा और कदमकुआं थाना क्षेत्रों से जुड़े पांच लोन धारकों, दो डायरेक्ट सेलिंग एजेंटों (डीएसए) और दिल्ली की एक थर्ड पार्टी सत्यापन एजेंसी सहित कुल आठ अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।

बैंक द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, धोखाधड़ी का यह पूरा खेल अक्टूबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच रचा गया।

मुजफ्फरपुर के सराय निवासी और वर्तमान में खजांची रोड शाखा के प्रबंधक नवीन कुमार ने बताया कि आरोपितों ने आपस में सांठ-गांठ कर बैंक की होम लोन योजना और सुविधा ऋण योजना के तहत करोड़ों रुपये स्वीकृत कराए।

ऋण की राशि खातों में आते ही उसे योजनाबद्ध तरीके से बचत खातों में स्थानांतरित कर दिया गया, ताकि बैंकर चेक और आरटीजीएस के जरिए पैसे निकाले जा सकें। शुरुआती कुछ महीनों तक खातों में सामान्य लेन-देन दिखाकर बैंक को गुमराह किया गया, जिससे किसी को संदेह न हो।

नामजद आरोपियों में पांच कर्जदार, दो एजेंट और दिल्ली की सत्यापन एजेंसी शामिल

पुलिस को दी गई आवेदन सूची में जिन आठ लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया गया है, उनमें खाजपुरा (हवाई अड्डा थाना) निवासी चंदा देवी और उनके पति धनंजय कुमार शामिल हैं, जिन्होंने होम लोन के तहत 32.28 लाख और सुविधा ऋण के तहत 3.71 लाख रुपये लिए।

इसके अलावा फतुहा के छोटी रानीपुर निवासी विजय कुमार चौधरी ने 47.40 लाख का होम लोन व 3.67 लाख का सुविधा ऋण, पटना सिटी (अलमगंज थाना) की रेखा देवी ने 40 लाख का होम लोन व 4.50 लाख का सुविधा ऋण और पटना सिटी के सिमली मुरारपुर निवासी दिनेश कुमार चौधरी ने लगभग 50 लाख रुपये का होम लोन लिया।

इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने में बांका के रंजोधा निवासी कंचन कुमारी और पटना के कुरकुरी निवासी गौतम गंभीर ने बतौर डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (डीएसए) मुख्य भूमिका निभाई।

सत्यापन एजेंसी की मिलीभगत और आंतरिक जांच में बड़ा खुलासा

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि लोन स्वीकृत करने से पूर्व आवेदकों के दस्तावेजों और जमीनों का भौतिक सत्यापन करने की जिम्मेदारी दिल्ली के रंजीत नगर स्थित एमएस क्रक्स रिस्क मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (सीपीवी एजेंसी) को दी गई थी।

एजेंसी ने बिना जमीनी हकीकत जाने फर्जी सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर बैंक को सौंपी, जिसके आधार पर लोन की फाइलें पास होती गईं। जब खाते एनपीए हुए और बैंक अधिकारियों ने स्वयं भौतिक निरीक्षण किया, तब पता चला कि बंधक रखी गई जमीनों का कोई वास्तविक वजूद ही नहीं है।

इसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच बैठाई और 1 दिसंबर 2023 को इसे आधिकारिक रूप से संदिग्ध धोखाधड़ी घोषित किया। शाखा प्रबंधक ने स्पष्ट किया है कि फर्जीवाड़े से जुड़े सभी मूल दस्तावेज बैंक के पास सुरक्षित हैं, जिन्हें पुलिस अनुसंधान के लिए सौंपा जा रहा है।

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