ईमानदारी हो तो ऐसी... बिहार में ऑटो ड्राइवर ने नकदी से भरा बैग लौटाया, इनाम लेने से भी किया इनकार
मनेर के ऑटो चालक विनोद कुमार तिवारी ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। उन्होंने सड़क पर मिला 70 हजार ...और पढ़ें
-1793508068662_m.webp)
ऑटो चालक विनोद कुमार ने लौटाया सामान से भरा बैग। फोटो जागरण
HighLights
ऑटो चालक विनोद तिवारी ने लौटाया खोया बैग।
बैग में थे 50 हजार का सामान, 20 हजार नकद।
ईमानदारी की मिसाल पेश कर इनाम ठुकराया।
उमा शंकर गुप्ता, मनेर। आज के दौर में जहां छोटी-छोटी चीजों के लिए लोग बेईमानी करने से भी नहीं हिचकते, वहीं मनेर के एक साधारण ऑटो चालक ने अपनी ईमानदारी और नेकदिली से समाज के सामने एक मिसाल पेश की है।
सड़क पर गिरे कीमती सामान और नकदी से भरे बैग को सुरक्षित रखकर उसके असली मालिक तक पहुंचाने वाले ऑटो चालक की हर तरफ सराहना हो रही है।
मनेर थाना क्षेत्र के खासपुर पंचायत निवासी विनोद कुमार तिवारी उर्फ पंडित जी दानापुर से पटना जंक्शन तक ऑटो चलाते हैं। शनिवार की रात पटना जीपीओ के समीप उन्हें एक ई-रिक्शा से गिरा हुआ बैग मिला।

उन्होंने तत्काल बैग उठाकर ई-रिक्शा पर सवार यात्रियों को आवाज लगाई, लेकिन चालक तेज गति से आगे निकल गया। विनोद ने काफी दूर तक उसका पीछा भी किया, लेकिन जाम के कारण वे ई-रिक्शा तक नहीं पहुंच सके।
इसके बाद उन्होंने बैग खोलकर देखा तो उसमें 2 मोबाइल फोन, करीब 50 हजार रुपये मूल्य के सामान और 20 हजार रुपये नकद थे। इतना कीमती सामान मिलने के बावजूद उनका ईमान नहीं डोला।
बैग में रखे मोबाइल पर 20 से अधिक कॉल आए थे, लेकिन साइलेंट रहने के कारण उन्हें पता नहीं चला। बाद में उन्होंने अपने मोबाइल से कॉल करने वाले नंबर पर संपर्क किया।
इनाम की राशि लेने से किया इनकार
पूछताछ में पता चला कि बैग सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र के मेहंदी गांव निवासी विनोद कुमार गुप्ता का है, जो झारखंड में कृषि निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
सूचना मिलने के बाद रविवार को विनोद कुमार गुप्ता खासपुर पहुंचे। वहां मुखिया प्रतिनिधि बोद्यनाथ यादव की मौजूदगी में बैग में रखे सभी सामान की जांच कर उन्हें सुरक्षित लौटा दिया गया।
सामान वापस मिलने पर गुप्ता ने ऑटो चालक को इनाम देना चाहा, लेकिन विनोद कुमार तिवारी ने यह कहते हुए इनाम लेने से इनकार कर दिया कि किसी का खोया सामान लौटाना उनका फर्ज है।
ऑटो चालक की इस ईमानदारी और इंसानियत की इलाके में खूब चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे लोग ही समाज में विश्वास और मानवता को जीवित रखे हुए हैं।
यह भी पढ़ें- पिता करते थे मजदूरी, बेटी ने सेल्फ स्टडी के दम पर हासिल की सरकारी नौकरी; रोहतास की ममता के संघर्ष की कहानी