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पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में UG की 70000 सीटें खाली, अप्रेंटिसशिप कोर्स में भी रुचि नहीं ले रहे छात्र 

Published: Wed, 07 Oct 2026 03:30 PM (GMT+05:30)

पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में 2026-27 सत्र के यूजी रेगुलर कोर्स में करीब 70 हजार सीटें खाली रह गईं, पारंपरिक के साथ ...और पढ़ें

PPU। फाइल फोटो

PPU। फाइल फोटो

HighLights

  1. पीपीयू में 70 हजार यूजी सीटें खाली, पारंपरिक कोर्स में भी कमी।

  2. अप्रेंटिसशिप आधारित नए कोर्स भी छात्रों को आकर्षित करने में विफल रहे।

  3. विश्वविद्यालय अगले सत्र के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की योजना बना रहा है।

जागरण संवाददाता, पटना। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में 2026-27 सत्र के यूजी रेगुलर कोर्स में करीब 70 हजार सीटें खाली रह गई हैं। पारंपरिक पाठ्यक्रमों में जहां बड़ी संख्या में सीटें रिक्त हैं।

वहीं उद्योग से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किए गए चार वर्षीय अप्रेंटिसशिप आधारित नए कोर्स भी विद्यार्थियों को आकर्षित नहीं कर सके।

इन कोर्सों में पढ़ाई के साथ उद्योग में काम करने, अनुभव हासिल करने और स्टाइपेंड पाने का अवसर दिया जाना है।

विश्वविद्यालय में बीकाम में सबसे अधिक करीब 38 हजार सीटें खाली रह गई हैं। इसके बाद बीएससी गणित में 7,180 और रसायन शास्त्र में 7,055 सीटें रिक्त हैं।

दूसरी ओर, संबद्ध कॉलेजों में एईडीपी (अप्रेंटिसशिप एंबेडेड डिग्री प्रोग्राम) के तहत शुरू किए गए कुछ नए पाठ्यक्रमों में भी नामांकन बेहद कम रहा।

BFSI और डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स में आधी सीटें भी नहीं भरीं

जेडी वीमेंस कालेज में पहली बार शुरू किए गए बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस (बीएफएसआई) कोर्स में 60 सीटों के विरुद्ध केवल सात विद्यार्थियों ने नामांकन लिया।

इस तरह 53 सीटें खाली रह गईं। वहीं, कालेज आफ कामर्स, आर्ट्स एंड साइंस में शुरू किए गए डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स में 60 में से सिर्फ 12 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया।

यहां 48 सीटें रिक्त रह गईं। इन दोनों पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ उद्योग में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलना है।

इससे उन्हें कार्य अनुभव के साथ आर्थिक सहायता भी मिलेगी। साथ ही उद्योग का एक्सपोजर मिलने और आगे संबंधित कंपनियों में रोजगार के अवसर बनने की संभावना रहेगी।

पढ़ाई के साथ अनिवार्य अप्रेंटिसशिप, फिर भी दिलचस्पी कम

अप्रेंटिसशिप आधारित इन चार वर्षीय पाठ्यक्रमों को इस तरह तैयार किया गया है कि डिग्री की पढ़ाई के साथ निर्धारित अवधि की अप्रेंटिसशिप भी कराई जाए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को क्लासरूम शिक्षा के साथ उद्योग की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है।

अप्रेंटिसशिप के दौरान 12 हजार रुपये तक स्टाइपेंड दिए जाने का प्रविधान है। इसके बावजूद इस वर्ष इन नए पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की रुचि कम रही।

विश्वविद्यालय के अनुसार छात्रों और अभिभावकों को इन कोर्सों की उपयोगिता, करियर संभावनाओं और अप्रेंटिसशिप की गुणवत्ता की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पाठ्यक्रमों के बारे में व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने की बात कही है, ताकि अगले सत्र में नामांकन बढ़ाया जा सके।

एक आवेदन आया, इसलिए रिटेल ऑपरेशंस कोर्स टला

जेडी वीमेंस कालेज में इसी सत्र से एईडीपी के तहत रिटेल आपरेशंस कोर्स शुरू किया जाना था। लेकिन, इसमें केवल एक आवेदन आने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस वर्ष कोर्स शुरू नहीं करने का निर्णय लिया। अब इसे अगले सत्र से शुरू करने की तैयारी है।

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