नीतीश के बाद बिहार का नया 'बॉस' कौन? रेस में बचे 2 नाम; क्या यादव चेहरे पर दांव खेलेगी BJP
नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया, जिससे बिहार में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल का अंत तय हो गया ...और पढ़ें

अमित शाह और नरेंद्र मोदी।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, पटना। जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस कदम को बिहार की राजनीति में एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
इसके साथ ही, राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार के कार्यकाल का अंत लगभग तय हो गया है, जिससे भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
अब कौन होगा अगला मुख्यमंत्री?
बिहार विधानसभा चुनाव में 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा अब अपना मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में है। रेस में दो प्रमुख नाम चर्चा में हैं:
सम्राट चौधरी: वर्तमान उपमुख्यमंत्री, जो कोइरी (OBC) समाज से आते हैं।
नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और संघ के पुराने कार्यकर्ता, जो यादव समाज से ताल्लुक रखते हैं।
अचानक लिए फैसले से पार्टी में हलचल
होली के अगले दिन जब नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर संसद लौटने के अपने इरादे की घोषणा की, जिससे उनके कार्यकर्ता हैरान रह गए।
आक्रोशित जेडीयू कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की और आरोप लगाया कि भाजपा ने ललन सिंह और संजय झा जैसे "भीतरी लोगों" की मदद से नीतीश कुमार को किनारे करने की साजिश रची है। हालांकि, इन दोनों नेताओं ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
नीतीश कुमार ने जनता के प्रति जताया आभार
नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने भावुक संदेश में कहा, "दो दशकों से अधिक समय तक बिहार की जनता ने मुझ पर भरोसा जताया। इसी विश्वास के बल पर हमने पूरे समर्पण के साथ राज्य की सेवा की है। आज बिहार विकास और सम्मान के जिस नए मुकाम पर है, वह आपके समर्थन की ही शक्ति है।"
उन्होंने आगे कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही यह इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों (विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य बनें।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे राज्यसभा जाने के बाद भी बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे और नई सरकार को अपना मार्गदर्शन देते रहेंगे।
बिहार में अब सत्ता परिवर्तन की तैयारी
नामांकन के समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उनके साथ मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार संसद सदस्य के रूप में शपथ लेने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। इस बीच, जेडीयू में उनके बेटे निशांत को राजनीति में लाने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है, जिसे पार्टी को टूटने से बचाने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, नीतीश कुमार ने भाजपा नेतृत्व को यह भी सुझाव दिया है कि उनके उत्तराधिकारी के रूप में किसी दलित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया जाए या फिर जेडीयू के किसी नेता को उपमुख्यमंत्री का पद दिया जाए।
विपक्ष के आरोप: "बिहार में हुआ महाराष्ट्र जैसा खेल"
आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा ने बिहार में भी "महाराष्ट्र जैसा खेल" किया है। उन्होंने नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि वे खुद अपनी स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। वहीं, कांग्रेस ने इसे "नेतृत्व का तख्तापलट" करार दिया है।
(पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- नीतीश कुमार से नाराज JDU कार्यकर्ताओं ने पार्टी दफ्तर में किया हंगामा, बर्तन फेंके और गमले तोड़े
यह भी पढ़ें- चारों सदन में जाने वाले बिहार के 5वें नेता होंगे नीतीश कुमार, पूरा करेंगे अपना अधूरा सपना
