बिहार में जल्द बनेगी नई सरकार, नीतीश के बेटे निशांत को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की चर्चा तेज हो गई ...और पढ़ें

राज्यसभा सदस्यता के साथ नीतीश की गरिमापूर्ण विदाई की तैयारी, नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन का पर्चा दाखिल करने के साथ ही राज्य में भाजपा की अगुआई में नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। तिथि की घोषणा भाजपा और जदयू के शीर्ष नेता आपसी विमर्श के बाद करेंगे। इसे नीतीश कुमार के लिए मुख्यमंत्री पद से गरिमापूर्ण विदाई के रूप में देखा जा रहा है।
2020 के विधानसभा चुनाव के बाद भी नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के प्रति अनिच्छा जाहिर की थी। उस समय उन्हें पद पर बने रहने के लिए मनाया गया। राज्यसभा में नीतीश कुमार के कार्यकाल की शुरुआत इस साल 10 अप्रैल से होगी। इससे पहले सरकार के गठन की संभावना है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि वह अपनी इच्छा से राज्यसभा में जा रहे हैं। चारों सदनों की सदस्यता उनकी थी। कुमार अभी विधान परिषद के सदस्य हैं। इससे पहले वे विधानसभा और लाेकसभा के सदस्य रह चुके हैं।
होली के दिन आई खबर
होली के दिन जब राज्य के लोग उमंग में डूबे हुए थे, नीतीश के राज्यसभा में जाने की खबर आई। पहले तो लोगों ने इसे होली का मजाक समझा, लेकिन शाम तक यह साफ हो गया कि राज्यसभा में जाने की पहल उनकी ही है। इस मुद्दे पर उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों के अलावा स्वजनों से भी विमर्श किया।
स्वजनों की नहीं मानी बात
स्वजनों की राय थी कि अभी उन्हें कुछ दिनों तक बिहार में ही रहना चाहिए। वे इसके लिए राजी नहीं हुए। स्वजनों ने कहा कि नीतीश जो कुछ तय कर लेते हैं, उससे पीछे नहीं हटते हैं। राज्यसभा में जाने का निर्णय भी ऐसा ही है।
उनके नामांकन को महत्वपूर्ण बनाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह विशेष विमान से पटना पहुंचे। वे मुख्यमंत्री निवास गए और वहां से काफिला विधानसभा पहुंचा। राज्यसभा के लिए विधानसभा सचिव के समक्ष नामांकन करना होता है। नामांकन के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री निवास लौट आए।
अब होगी निशांत की पॉलिटिकल एंट्री
नई सरकार के गठन के साथ ही मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत के राजनीति में प्रवेश की भी चर्चा शुरू हो गई है।पार्टी सूत्रों के अनुसार, निशांत ने राज्यसभा में जाने के बदले बिहार में बिहार में रह कर राजनीति करने की इच्छा जाहिर की है।
वे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे। राज्यसभा में जाने के बाद नीतीश कुमार विधान परिषद की सदस्यता से त्याग पत्र देंगे। परिषद में नीतीश का कार्यकाल 2030 तक है। निशांत अगर राजनीति में सक्रिय होते हैं तो उन्हें परिषद में नीतीश कुमार का बचा हुआ कार्यकाल दिया जा सकता है।
क्या निशांत को मिलेगी जदयू की कमान?
निशांत की हाल के दिनों में सक्रियता बढ़ी है। वह राजनीति में अपनी रूचि दिखा रहे हैं। जदयू की कमान निशांत को मिले, जदयू के बड़े हिस्से की यह पुरानी मांग है। इसे क्षेत्रीय दलों की इस प्रवृति से जोड़ कर देखा जा रहा है, जिसमें दल के सर्वोच्च नेता की संतान को ही उत्तराधिकार मिलता है।
राज्य के दो क्षेत्रीय दल राजद और लोजपा (रा) इसी सूत्र पर अस्तित्व बचा रहे हैं। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी संस्थापक के पुत्रों को ही उत्तराधिकार सौंपने की राह पर हैं।
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