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Nitish Kumar News: कानून-व्यवस्था रही नीतीश कुमार की यूएसपी, पुलिसिंग का बदला चेहरा

Published: Thu, 05 Mar 2026 09:30 PM (IST)

नीतीश कुमार ने बिहार में कानून-व्यवस्था को अपनी यूएसपी बनाया। 2005 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने अपहरण उद्योग और ...और पढ़ें

कानून-व्यवस्था रही नीतीश कुमार की यूएसपी, पुलिसिंग का बदला चेहरा

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कुमार रजत, पटना। पहले शाम के बाद कोई घर से निकलता था जी... कितना अपहरण होता था? आज देखिए, रात भर लोग निश्चिंत होकर घूमते हैं। पिछले 20 वर्षों में बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खाते में तमाम उपलिब्धयां रहीं, मगर विधि-व्यवस्था को लेकर यह पंक्ति दो दशक बाद भी उनके भाषणों का नियमित हिस्सा रही।

फिर चाहे वह चुनावी भाषण हो या कोई जनकल्याण का आयोजन। मुख्यमंत्री यह हमेशा याद दिलाते कि बिहार किस हालात से निकलकर आज यहां तक पहुंचा है।

दरअसल, यह कहना उचित होगा कि कानून-व्यवस्था ही नीतीश कुमार की यूएसपी रही। इसी बिगड़ी कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के नाम पर उन्हें सत्ता मिली और आखिर तक वह इसे निभाते रहे। जनता का पुलिस पर भरोसा बने और पुलिस भी जनता के लिए हर समय उपलब्ध हो, यह उनकी प्राथमिकता में रहा।

यही कारण है कि जब उन्होंने 2005 में सत्ता संभाली तो कानून-व्यवस्था पर सबसे अधिक फोकस किया। अपहरण उद्योग, संगठित अपराध और बाहुबलियों के लिए बदनाम बिहार की पुरानी छवि को तोड़ा और बेहतर विधि-व्यवस्था वाले राज्य की छवि बनाई। नरसंहार के दौर से बिहार को बाहर निकाला। राज्य को माओवाद से भी मुक्त किया। पिछले माह ही पुलिस मुख्यालय ने इसकी घोषणा की है।

बेहतर पुलिसिंग के लिए दस बड़े कदम:

  • स्पीडी ट्रायल : जघन्य और संगठित अपराध में शामिल अपराधियों को जल्द सजा दिलाने के लिए स्पीडी ट्रायल की शुरुआत। बड़ी संख्या में फास्ट ट्रैक अदालतें शुरू की गईं।
  • पुलिस बहाली और आधुनिकीकरण : पुलिस में बंपर बहाली। दो दशक में तीन गुनी हुई संख्या। अत्याधुनिक वाहन से लेकर हथियार उपलब्ध कराए। नई पुलिस भवनों का निर्माण।
  • माओवादमुक्त बिहार : माओवाद का गढ़ रहे बिहार को इससे मुक्त कराया। पुलिस मुख्यालय का दावा, राज्य में अब एक भी हथियारबंद नक्सली नहीं।
  • शराबबंदी कानून : महिला सुरक्षा, बेहतर विधि-व्यवस्था और सामाजिक हित में अप्रैल, 2016 में राज्य में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया।
  • डायल 112 सेवा : पुलिस, एंबुलेंस समेत सभी आपात सेवाओं को डायल-112 से जोड़ा। मुख्यालय का दावा, राज्य के सभी इलाकों में औसत 14 मिनट में पहुंच रही पुलिस।
  • भ्रष्टाचार पर चोट : भ्रष्टाचार पर चोट के लिए आर्थिक अपराध इकाई, विशेष निगरानी इकाई आदि का किया गठन। बड़े भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू।
  • महिला पुलिसकर्मी : महिलाओं के लिए पुलिस में लगभग 35 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। नतीजा, आज देश में सर्वाधिक महिला पुलिसबल का प्रतिशत बिहार में।
  • सीसीटीवी से निगरानी : बिहार के सभी प्रमुख शहरों की सीसीटीवी से निगरानी। अब कस्बों और पंचायतों में भी सीसीटीवी लगाने की कार्ययोजना पर काम शुरू।
  • साइबर सुरक्षा : साइबर सुरक्षा के लिए अलग इकाई बनाई गई। साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर कई अंतरराज्यीय गिरोह का किया पर्दाफाश।
  • पुलिस प्रशिक्षण : पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण के लिए राजगीर पुलिस अकादमी की स्थापना। पुलिस प्रशिक्षण में तकनीक पर जोर। अत्याधुनिक हथियारों से प्रशिक्षण।

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