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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 31, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बिहटा-औरंगाबाद और सुल्तानगंज-देवघर के बीच बनेगी नई रेलवे लाइन, 730 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट

Published: Fri, 31 Jan 2025 06:00 AM (IST)

उपमुख्यमंत्री सम्राट ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की और बिहार में दो महत्वपूर्ण रेलवे लाइन परियोजनाओं पर चर्चा ...और पढ़ें

बिहटा-औरंगाबाद और सुल्तानगंज-देवघर के बीच बनेगी नई रेलवे लाइन (सांकेतिक तस्वीर)
बिहटा-औरंगाबाद और सुल्तानगंज-देवघर के बीच बनेगी नई रेलवे लाइन (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. बिहार में दो नई रेल लाइन परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू होगा
  2. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रेल मंत्री से की मुलाकात

राज्य ब्यूरो, पटना। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलने के बाद कहा कि बिहार में बिहटा-औरंगाबाद एवं सुल्तानगंज-देवघर रेलवे लाइन के निर्माण की कुल 730.59 करोड़ रुपये से अधिक लागत की दो परियोजनाओं पर काम जल्द शुरू होगा।

चौधरी ने कहा कि 290 करोड़ की लागत से सुल्तानगंज-देवघर के बीच नई रेल लाइन (78.08 किमी) बनने से श्रावणी मेले में जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम होगी।

इस रेलवे लाइन के चालू होने पर सुल्तानगंज, असरगंज, तारापुर, बेलहर और देवघर के लोग सीधे रेल सम्पर्क से जुड़ जाएंगे।

पटना और औरंगाबाद की दूरी होगी कम

उन्होंने कहा कि सरकार अनुग्रह नारायण रोड से औरंगाबाद (12.90 किलोमीटर) नई रेल लाइन के लिए 440.59 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर चुकी है। यह लाइन बिहटा-औरंगाबाद नई लाइन का ही एक भाग है।

इससे राजधानी पटना और औरंगाबाद की दूरी मात्र डेढ़-दो घंटे में तय हो जाएगी। इस रेल मार्ग के लिए 14 स्टेशन प्रस्तावित हैं।

मौनी अमावस्या पर रेलवे का रिकॉर्ड, प्रयागराज से चलीं 364 ट्रेनें

मौनी अमावस्या स्नान के लिए संगम पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने ऐतिहासिक कदम उठाया। रविवार को प्रयागराज के विभिन्न स्टेशनों से रिकॉर्ड 364 ट्रेनों का परिचालन किया गया, जो महाकुंभ मेले के दौरान किसी एक दिन में चलाई गई ट्रेनों की सर्वाधिक संख्या है।

इनमें 142 नियमित और 222 महाकुंभ मेला विशेष गाड़ियां शामिल रहीं। रेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे भवन स्थित वार रूम से पूरे अभियान की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई। तीनों रेलवे जोन के महाप्रबंधक और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह सक्रिय रहे और राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाए रखा।

रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टेशनों पर बड़े होल्डिंग एरिया बनाए, जहां श्रद्धालु आराम से बैठकर अपनी गाड़ी की प्रतीक्षा कर सकें। प्रशासन के निर्देशानुसार ही यात्रियों को स्टेशन की ओर भेजा गया, ताकि अव्यवस्था न हो। इनवर्ड और आउटवर्ड मिलाकर उत्तर मध्य रेलवे ने 280, उत्तर रेलवे ने 88 और पूर्वोत्तर रेलवे ने 73 गाड़ियों का संचालन किया।

उत्तर मध्य रेलवे ने सबसे अधिक 157 मेला विशेष गाड़ियां चलाईं। महाकुंभ मेले की संपूर्ण अवधि में रेलवे द्वारा 13,450 ट्रेनों के परिचालन की योजना बनाई गई है, जिसमें 10,028 नियमित और 3,400 से अधिक विशेष गाड़ियां शामिल हैं। अब तक 1,900 से अधिक विशेष गाड़ियां चलाई जा चुकी हैं।

रेलवे ने यात्रियों को पूर्व में दी गई सूचनाओं के आधार पर बताया कि कुछ गाड़ियों के मार्ग परिवर्तित किए गए हैं और कुछ का टर्मिनल स्टेशन प्रयागराज से बदलकर सूबेदारगंज किया गया है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे रेलवे द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और अपनी यात्रा को सुगम एवं सुरक्षित बनाएं।

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