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सेंसर बताएगा नसों का हाल, कदमों से तय होगा उपचार; पटना में 50+ देशों के साइंटिस्ट ने पेश किए रिसर्च पेपर 

Published: Mon, 28 Sep 2026 10:43 AM (IST)

अब न्यूरो संबंधी रोगों के उपचार में एक नई सेंसर मशीन का उपयोग होगा, जो मरीज के कदमों की चाल मापकर नसों की कमजोरी बताएगी।

एआई जनरेटेड फोटो

एआई जनरेटेड फोटो

HighLights

  1. नई सेंसर मशीन नसों की कमजोरी का सटीक आकलन करेगी।

  2. मरीज के कदमों की चाल से उपचार की दिशा तय होगी।

  3. विश्व फिजियोथेरेपी कांफ्रेंस में इस तकनीक पर चर्चा हुई।

जागरण संवाददाता, पटना। अब न्यूरो यानी नसों व तंत्रिका तंत्र संबंधी रोगों से जूझ रहे मरीज के उपचार में सिर्फ चिकित्सक की नजर नहीं होंगी। सेंसर मशीन आपके हर कदम को माप कर बताएगी कि नसों में अभी कितनी कमजोरी शेष है।

जब रोगी इस सेंसर मशीन पर चलेंगे तो उनके कदमों की गति, लंबाई व समय को रिकार्ड कर वह दोनों पैरों की चाल में अंतर और असंतुलन की रिपोर्ट देगा।

दोनों पैरों में कितना भार पड़ रहा है, संतुलन कहां बिगड़ा, हाथ-पैर की गतिविधियों में कितना सुधार हुआ, चलने में लड़खड़ाहट, कमजोरी या लय में गड़बड़ी तो नहीं है, इसे डॉक्टर आसानी से समझ सकेंगे। इन तथ्यों के बाद हर रोगी के लिए और अधिक सटीक फिजियोथेरेपी तकनीक अपनाई जा सकेगी।

ये बातें रविवार को आइजीआइएमएस के वरीय फिजियोथेरेपिस्ट सह योग इंचार्ज डॉ. रत्नेश चौधरी व न्यूरो फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अविनाश कुमार दिल्ली में विश्व फिजियोथेरेपी कांफ्रेंस में कहीं।

दुनिया के 50 से अधिक देशों के दस हजार से अधिक फिजियोथेरेपिस्ट, चिकित्सक, वैज्ञानिक, छात्र हिस्सा ले रहे हैं। इसमें 1853 से अधिक वैज्ञानिक शोधपत्र और पोस्टर प्रस्तुत किए गए।

वैज्ञानिक सत्रों में आस्ट्रेलिया, हांगकांग, सिंगापुर, जापान, म्यांमार, कनाडा, अमेरिका समेत कई देशों के विशेषज्ञों ने शोध और अनुभव साझा किए।

उम्र बढ़ी अब फिजियोथेरेपी व आइसीयू रिहैब की बढ़ेगी जरूरत

डॉ. रत्नेश चौधरी व डॉ. अविनाश कुमार ने बताया कि कांफ्रेंस में टेली-रिहैब, एआइ और होम-आइसीयू जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इस तकनीक की मदद से घर पर रह रहे मरीज की गतिविधियों की निगरानी और उसके अनुसार फिजियोथेरेपी की योजना बनाना आसान होगा।

उन्होंने बताया कि हड्डी-नस की समस्या, न्यूरोलाजिकल रोग, मोटापा और फिटनेस में फिजियोथेरेपी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। रोबोटिक थेरेपी, वर्चुअल रियलिटी, इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और टेली-रिहैबिलिटेशन ने न्यूरो रिहैब को नई तकनीक से जोड़ दिया है। बिहार से डॉ. हेमेन्दु, डॉ. वैभव, डॉ. अपराजिता, डॉ. अपेक्षा, डॉ. कोमल और डॉ. सुमन व अन्य शामिल हुए।

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