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करवा चौथ 2026: रात को इतने बजे निकलेगा चांद, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम

Published: Thu, 29 Oct 2026 05:30 AM (IST)

सुहागिन महिलाएं आज पति की दीर्घायु और दांपत्य सुख के लिए करवा चौथ का निर्जला व्रत रखेंगी। शुभ योगों के ...और पढ़ें

पति की दीर्घायु और दांपत्य जीवन की कामना से सुहागिनें आज करेंगी करवा चौथ का व्रत

पति की दीर्घायु और दांपत्य जीवन की कामना से सुहागिनें आज करेंगी करवा चौथ का व्रत

HighLights

  1. पति की दीर्घायु और दांपत्य सुख के लिए निर्जला व्रत।

  2. शुभ योगों में भगवान शिव, पार्वती और चंद्रदेव की पूजा।

  3. चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर व्रत का समापन।

जागरण संवाददाता, पटना। प्रेम, विश्वास और समर्पण के भाव से जुड़ा करवा चौथ का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना से सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखेंगी।

शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और करवा माता की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करेंगी।

इस बार ग्रह-गोचर और शुभ योगों के संयोग में मनाया जा रहा यह पर्व दांपत्य जीवन में प्रेम, परस्पर सम्मान और सुख-समृद्धि की कामना का संदेश देगा।

ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार, सनातन परंपरा में पति-पत्नी के बीच प्रेम, संतोष और सम्मान को सुखी गृहस्थ जीवन का आधार माना गया है। करवा चौथ इसी भाव को अभिव्यक्त करने वाला पर्व है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए और द्रौपदी ने पांडवों के संकट दूर करने के उद्देश्य से व्रत किया था। पर्व में करवा माता की पूजा, पौराणिक कथा का श्रवण और चंद्रदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है।

शुभ योगों के त्रिवेणी संयोग में पूजा

करवा चौथ पर गुरुवार, रोहिणी के बाद मृगशिरा नक्षत्र तथा परिघ योग के साथ बुधादित्य और लक्ष्मीनारायण योग का संयोग बन रहा है। इ

न शुभ योगों में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, चंद्रदेव और करवा माता की पूजा करने से सुखी दांपत्य जीवन, आरोग्यता, दीर्घायु और समृद्धि की कामना की जाती है।

धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना गया है। ऐसे में चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने जीवनसाथी के सुखद और दीर्घ जीवन की प्रार्थना करेंगी।

चंद्र दर्शन के बाद पूरा होगा व्रत

करवा चौथ पर महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को 16 शृंगार करेंगी और विधि-विधान से पूजा करेंगी। चंद्रोदय के बाद चलनी में दीपक रखकर चंद्रमा के दर्शन करने और फिर उसी चलनी से पति को देखने की परंपरा है।

इसके बाद चंद्रदेव को जल अर्पित कर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। अर्घ्य में जल के साथ दूध, शहद, मिश्री और नारियल का प्रयोग भी परंपरा के अनुसार किया जाता है। अंत में पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत पूरा किया जाएगा।

करवा चौथ पूजा मुहूर्त

  • प्रदोष काल: शाम 5:09 बजे से 7:51 बजे तक
  • चंद्रमा को अर्घ्य: रात्रि 8:56 बजे के बाद

पूजन सामग्री का धार्मिक महत्व

  • मिट्टी का करवा: धरती से जुड़ाव, सादगी और जीवन के पोषण का प्रतीक।
  • करवा का जल: जीवन की निरंतरता और शीतलता का संदेश।
  • दीपक: अंधकार पर प्रकाश की विजय और सुख-समृद्धि का प्रतीक।
  • चलनी: जीवनसाथी को प्रेम और विश्वास की दृष्टि से देखने का भाव।
  • चंद्रमा को अर्घ्य: प्रकृति के प्रति श्रद्धा और वैवाहिक मंगलकामना।
  • रोली, अक्षत और फूल: शुभता, समृद्धि और स्नेह के प्रतीक।

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