ललन सिंह के साथ कई MLA गायब, निशांत संभाल रहे JDU की कमान; पटना की बैठक में 'गुटबाजी' की Inside Story
jdu patna meeting inside story पटना में जदयू की बैठक में ललन सिंह और रामनाथ ठाकुर की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक ...और पढ़ें

नीतीश कुमार, निशांत कुमार और ललन सिंह
HighLights
ललन सिंह और रामनाथ ठाकुर की गैरमौजूदगी पर विधायकों ने सवाल उठाए।
निशांत कुमार को बैठक में विशेष महत्व मिला, उन्होंने संबोधित किया।
जदयू अध्यक्ष ने निशांत को पार्टी का भविष्य बताया, नेतृत्व पर चर्चा।
डिजिटल डेस्क, पटना। पटना में जदयू की बैठक ऊपर से विधायकों और विधान पार्षदों के लिए एक सामान्य ओरिएंटेशन कार्यक्रम थी, लेकिन अंदर से कई राजनीतिक सवाल छोड़ गई।
सबसे ज्यादा चर्चा वरिष्ठ नेता ललन सिंह और रामनाथ ठाकुर की गैरमौजूदगी को लेकर हुई। बैठक में छह विधायकों ने दोनों नेताओं को नहीं बुलाए जाने पर सवाल उठाए।
बैठक का एजेंडा ट्रेनिंग, लेकिन सवाल सियासत के
कार्यक्रम में PRS Legislative Research के विशेषज्ञों ने विधायी जिम्मेदारियों, कानून बनाने की प्रक्रिया, बजट और सदन की कार्यप्रणाली की जानकारी दी।
यानी आधिकारिक तौर पर फोकस विधायकों को बेहतर तरीके से सदन चलाने की तैयारी कराने पर था। लेकिन वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने कार्यक्रम की राजनीतिक चर्चा बढ़ा दी।
ललन सिंह नहीं पहुंचे तो विधायकों ने पूछ लिया सवाल
बैठक में विधायकों ने सवाल उठाया कि ललन सिंह और रामनाथ ठाकुर जैसे वरिष्ठ नेताओं को इस कार्यक्रम में क्यों नहीं बुलाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, नचिकेता मंडल, पंकज मिश्रा, रामानंद मंडल, मंजीत सिंह, शालिनी मिश्रा और मीना कामत ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी।
पार्टी का जवाब- सांसदों के लिए था ही नहीं कार्यक्रम
सवाल उठने के बाद जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने स्थिति संभाली और सारी बात स्पष्ट की। उनका कहना था कि कार्यक्रम विधायकों के लिए था।
खास तौर पर नए निर्वाचित विधायकों को ध्यान में रखकर आयोजित किया गया था। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि किसी सांसद को कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था।
फिर निशांत अचानक क्यों बने सेंटर ऑफ स्टेज?
यहीं से इस बैठक की दूसरी तस्वीर भी सामने आई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की मौजूदगी और उनके संबोधन को खास महत्व मिला।
उन्होंने नीतीश कुमार की नीतियों को आगे बढ़ाने और 'ट्रिपल सी' यानी क्राइम, करप्शन और कम्यूनलिज्म से समझौता नहीं करने की बात कही।
उन्होंने अपने पिता के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने कभी भी इस 'ट्रिपल सी' से समझौता नहीं किया।
मंच से मिला भविष्य का संकेत?
जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कार्यक्रम में निशांत कुमार को पार्टी का भविष्य बताया और कहा कि पार्टी का भविष्य मजबूत हाथों में है।
यह बयान ऐसे समय में आया जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चा तेज है। एमएलसी चुनाव को लेकर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच बयानबाजी तेज है।
निशांत की भूमिका अब सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं?
सियासी जानकारों का मानना है कि बैठक में निशांत का सार्वजनिक संबोधन और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी का उनके भविष्य पर खुलकर भरोसा जताना उनकी बढ़ती राजनीतिक दृश्यता का संकेत जरूर देता है।
हालांकि, इससे यह निष्कर्ष निकालना अलग बात है कि संगठन की पूरी कमान तत्काल उनके हाथ में आ गई है। मौजूदा घटनाक्रम में इतना जरूर साफ है कि निशांत अब जदयू के सार्वजनिक राजनीतिक विमर्श में पहले से ज्यादा प्रमुखता से दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में इस बैठक को सिर्फ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम मानें या बदलते राजनीतिक समीकरणों की झलक, इसका जवाब आने वाले संगठनात्मक फैसलों और बैठकों के जरिए ज्यादा साफ हो पाएगा।
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