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UN में बिहारी सांसद का दमदार संदेश, दुनिया को बताई आधार-UPI और DBT की ताकत; विकासशील देशों की मदद करेगा भारत

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:26 PM (GMT+05:30)

भारत ने विकासशील देशों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके साथ विकास की साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र ...और पढ़ें

वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से सहयोग

वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से सहयोग

HighLights

  1. भारत विकासशील देशों को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करेगा।

  2. संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम में सांसद अरुण भारती ने भारत का पक्ष रखा।

  3. शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास में अनुभव और तकनीक साझा होगी।

राज्य ब्यूरो, पटना। विकासशील देशों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके साथ विकास की साझेदारी मजबूत करने की दिशा में भारत की भूमिका पर जोर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए-81) के अवसर पर आयोजित भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के नौवें वार्षिक कार्यक्रम में जमुई के सांसद और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय नेता अरुण भारती शामिल हुए।

कार्यक्रम में वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और साझा विकास के प्रयासों को आगे ले जाने पर चर्चा हुई।

विकासशील देशों के साथ साझा होंगे अनुभव और तकनीक

कार्यक्रम में सांसद अरुण भारती ने भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच विकास से जुड़े मुद्दों पर सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपने अनुभव, तकनीक और विकास से जुड़ी जानकारी साझा करता है। इसका उद्देश्य संबंधित देशों को उनकी जरूरतों के अनुरूप विकास करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है।

शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर जोर

विकास साझेदारी के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया। इन क्षेत्रों में अनुभव और तकनीक साझा करने से विकासशील देशों को अपनी चुनौतियों का समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम में साझा प्रयासों के माध्यम से विकास के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से सहयोग

कार्यक्रम में भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को भी रेखांकित किया गया। सांसद अरुण भारती ने कहा कि भारत आपसी सम्मान, विश्वास और सहयोग के आधार पर दूसरे देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

इस सोच के तहत विकास को केवल अपने तक सीमित रखने के बजाय दूसरे देशों के साथ अनुभव और संसाधनों से जुड़े ज्ञान को साझा करने पर बल दिया जाता है।

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