स्वाति-विशाखा नक्षत्र में होगी गोवर्धन पूजा, 11 नवंबर को कायस्थ समाज करेगा अपने अराध्य की पूजा
दीपावली के बाद अब गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और भाई दूज की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 9 नवंबर को गोवर्धन ...और पढ़ें

गोवर्धन पूजा। सांकेतिक फोटो
HighLights
9 नवंबर को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट पर्व, श्रीकृष्ण और गौ पूजा।
11 नवंबर को भाई दूज, भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक पर्व।
इसी दिन कायस्थ समाज मनाएगा भगवान चित्रगुप्त की पूजा।
जागरण संवाददाता, पटना। दीपोत्सव के उल्लास के बीच अब गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और भाई दूज की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि की उपस्थिति में 9 नवंबर सोमवार को स्वाति और विशाखा नक्षत्र तथा सौभाग्य योग में गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा करने की परंपरा है। वहीं, 11 नवंबर बुधवार को कार्तिक शुक्ल उदय कालिक द्वितीया तिथि में भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन कायस्थ समाज के लोग अपने आराध्य भगवान चित्रगुप्त की पूजा-अर्चना करेंगे।
गोवर्धन पूजा के अवसर पर महिलाएं घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएंगी। उसे फूलों और अन्य पूजन सामग्रियों से सजाकर पारंपरिक लोकगीत गाते हुए पूजा करेंगी। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग अर्पित करेंगे।
क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज वासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था। इसके बाद से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई।
यह पर्व प्रकृति, पर्वत और गौ वंश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी प्रतीक है। इस दिन गौ माता की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु गौशालाओं में गायों को स्नान कराकर उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाएंगे।
इसके बाद चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, मिठाई और फल अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे। गायों को हरा चारा और गुड़ खिलाकर उनकी परिक्रमा भी की जाएगी। कई स्थानों पर अन्नकूट प्रसाद का वितरण होगा। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के पकवानों और व्यंजनों का भोग लगाकर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद बांटा जाएगा।
भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है भाई दूज
दीपोत्सव के अंतिम प्रमुख पर्व भाई दूज को लेकर भी घरों में तैयारियां होंगी। कार्तिक शुक्ल उदय कालिक द्वितीया तिथि में 11 नवंबर बुधवार को बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करेंगी। इसके बाद भाइयों को मिठाई और पारंपरिक पकवान खिलाएंगी।
भाई भी बहनों को उपहार भेंट कर जीवनभर उनकी रक्षा और सहयोग का संकल्प लेंगे। कायस्थ समाज के लोग अपने आराध्य भगवान चित्रगुप्त की पूजा करेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त मनुष्य के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं। इस अवसर पर श्रद्धालु कलम, दवात, बही-खाता और लेखन सामग्री स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना करेंगे। परिवार की सुख-समृद्धि, ज्ञान और व्यवसाय में उन्नति की कामना की जाएगी।
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