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बिहार में अपनों के बीच मनानी थी दीपावली, ट्रेनों की लेटलतीफी से अब सफर में त्योहार

Published: Sun, 08 Nov 2026 07:30 AM (IST)

दीपावली पर घर लौटने वाले हजारों यात्रियों को रेलवे की स्पेशल ट्रेनों की भारी लेटलतीफी का सामना करना पड़ा, जिससे त्योहार की खुशियां फीकी पड़ गईं।

ट्रेनों में भीड़। फोटो जागरण

ट्रेनों में भीड़। फोटो जागरण

HighLights

  1. दीपावली पर घर लौट रहे यात्रियों को भारी लेटलतीफी झेलनी पड़ी।

  2. स्पेशल ट्रेनें 5 से 35 घंटे तक देरी से चल रही हैं।

  3. यात्रियों ने समयबद्ध परिचालन और बेहतर सुविधाओं की मांग की।

जागरण संवाददाता, पटना। घर में दीप जलाने थे, बच्चों के साथ खुशियां बांटनी थीं और अपनों के बीच दीपावली मनाने की तैयारी थी। लेकिन रेलवे की स्पेशल ट्रेनों की लेटलतीफी ने यात्रियों की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। त्योहार पर घर लौटने के लिए निकले हजारों यात्रियों का सफर ही परेशानी में बदल गया।

किसी की ट्रेन पांच घंटे लेट हुई तो किसी को 14 से 35 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। हालात ऐसे हैं कि दीपावली पर घर पहुंचने की आस लगाए यात्री ट्रेनों और स्टेशनों पर ही त्योहार गुजारने को मजबूर हो गए।

यात्रियों को राहत देने के लिए रेलवे ने अतिरिक्त फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें तो चलाईं, लेकिन समय पर परिचालन नहीं होने से यह व्यवस्था यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।

ट्रेनों की लेटलतीफी का सबसे बड़ा उदाहरण उधना-मधुबनी स्पेशल ट्रेन संख्या 09035 है, जो करीब 35 घंटे 15 मिनट विलंब से चल रही है। वहीं, सीएसएमटी से मुजफ्फरपुर आने वाली ट्रेन संख्या 01081 लगभग 14 घंटे 47 मिनट की देरी से परिचालित हो रही है।

हावड़ा से नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन संख्या 04053 भी नौ घंटे एक मिनट विलंब से चल रही है। पटना आने वाली ट्रेनों की स्थिति भी चिंताजनक है। आनंद विहार टर्मिनल से पटना आने वाली ट्रेन संख्या 03294 आठ घंटे से अधिक लेट है।

उधना फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन संख्या 09036 करीब आठ घंटे 26 मिनट और गोंदिया-पटना स्पेशल ट्रेन संख्या 08895 पांच घंटे 11 मिनट विलंब से चल रही है। इसके अलावा दाउदपुर, बक्सर और नई दिल्ली से आने-जाने वाली अन्य स्पेशल ट्रेनें भी तीन से सात घंटे तक देरी से परिचालित हो रही हैं।

प्लेटफॉर्म पर इंतजार, आंखों में घर पहुंचने की उम्मीद

ट्रेन के निर्धारित समय पर स्टेशन पहुंचने के बाद भी यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बार-बार बदलते आगमन समय ने परेशानी और बढ़ा दी है।

यात्रियों को समझ नहीं आ रहा कि प्लेटफार्म पर ही बैठे रहें या कहीं दूसरी जगह जाकर समय बिताएं। जिन लोगों ने दीपावली और छठ पर घर पहुंचने के लिए नौकरी से छुट्टी ली थी, उनका पूरा कार्यक्रम बिगड़ गया है।

लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों की आगे की यात्रा और त्योहार की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं। घंटों विलंब के बाद जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंचती है, सामान्य और स्लीपर कोच के दरवाजों पर यात्रियों की भीड़ जमा हो जाती है।

ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को भी रास्ता नहीं मिल पाता। दूसरी ओर, ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में चढ़ने वाले यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है। सामान और बच्चों के साथ सफर करने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को कोच तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

बच्चों और बुजुर्गों के साथ प्लेटफार्म पर कट रही रात

पटना जंक्शन समेत प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ के कारण बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है। परिवार के साथ यात्रा कर रहे लोगों को बच्चों और बुजुर्गों के साथ घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

लंबी प्रतीक्षा के कारण पेयजल, खानपान और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में त्योहार की खुशियों के बजाय यात्रियों को थकान, परेशानी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

त्योहारों में अतिरिक्त ट्रेनें चलाने का रेलवे का उद्देश्य यात्रियों की भीड़ कम करना और उन्हें घर पहुंचने में सहूलियत देना है। लेकिन जब यही ट्रेनें कई-कई घंटे विलंब से चलें तो यात्रियों को राहत कैसे मिलेगी?

यात्रियों का कहना है कि केवल स्पेशल ट्रेनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, उनका समयबद्ध परिचालन भी सुनिश्चित होना चाहिए। साथ ही ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान की सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। यात्रियों ने स्टेशनों पर पेयजल, शौचालय और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की मांग भी की है।

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