धनतेरस पर अपनी राशि के अनुसार करें खरीदारी, सोना-चांदी या पीतल... जानिए आपके लिए क्या है लकी
हस्त नक्षत्र और वैधृति योग के शुभ संयोग में धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा, जिसमें सुबह से देर रात तक खरीदारी के शुभ अवसर मिलेंगे।

धनतेरस पर अपनी राशि के अनुसार करें खरीदारी (AI Generated Image)
HighLights
धनतेरस पर हस्त नक्षत्र और वैधृति योग का शुभ संयोग।
सुबह 11:06 बजे से देर रात तक खरीदारी के अवसर।
मां लक्ष्मी, गणेश, धन्वंतरि पूजा और यम दीपदान का महत्व।
जागरण संवाददाता, पटना। दीपोत्सव का आगमन शुक्रवार को धनतेरस के साथ आरंभ हो जाएगा। हस्त नक्षत्र और वैधृति योग के शुभ संयोग में धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी में पड़ने वाले इस पर्व पर खरीदारी और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।
त्रयोदशी तिथि सुबह 11:06 बजे से प्रारंभ होकर पूरे दिन रहेगी। ऐसे में सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारी के शुभ अवसर मिलेंगे। धन, ऐश्वर्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना से श्रद्धालु मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा करेंगे।
परंपरा के अनुसार इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, झाड़ू और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और स्थायित्व लेकर आती हैं।
दिनभर खरीदारी का मुहूर्त:
ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार इस बार धनतेरस पर हस्त नक्षत्र, अमृत सिद्धि योग और प्रीति योग का शुभ संयोग बन रहा है। शुक्रवार को शुक्र प्रदोष होने से पर्व का महत्व और बढ़ गया है। दिनभर खरीदारी के लिए शुभ समय रहने के कारण लोग अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर सकेंगे।
इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, पीतल और अन्य धातुओं के बर्तन, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, भूमि और भवन की खरीदारी शुभ मानी जाती है। इसके अलावा धनिया, कौड़ी, कमलगट्टा, पंच रत्न और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदने की भी परंपरा है।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने को लेकर भी विशेष मान्यता है। माना जाता है कि इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और समृद्धि का वास होता है।
अकाल मृत्यु से बचाव के लिए यम को दीपदान
धनतेरस पर खरीदारी के साथ दीपदान का भी विशेष महत्व है। शुक्र प्रदोष के संयोग में प्रदोषकाल के दौरान घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल के तेल का दीपक जलाकर यमराज को समर्पित किया जाएगा।
धार्मिक मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार को रोग, शोक, संकट तथा दुर्घटनाओं से रक्षा मिलती है। इसके साथ पंच देव के निमित्त पांच दीपक जलाने की भी परंपरा है। संध्या में घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाकर सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की जाएगी।
गुरु और शुक्र ग्रह से जुड़ा है धनतेरस
धनतेरस का संबंध गुरु और शुक्र ग्रह से भी माना जाता है। गुरु आरोग्य, आयु और ज्ञान के कारक हैं, जबकि शुक्र धन, वैभव और ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दिन सोना, चांदी और पीतल जैसी धातुओं की खरीदारी, हल्दी एवं पीली वस्तुओं का दान और दीपदान करना शुभ माना जाता है।
लक्ष्मी पूजन और धातुओं की खरीदारी से शुक्र ग्रह की अनुकूलता की मान्यता जुड़ी है। दोनों ग्रहों की अनुकूलता से जीवन में धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
धनतेरस पर खरीदारी व पूजा मुहूर्त:
- त्रयोदशी तिथि: सुबह 11:06 बजे से पूरे दिन
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:12 बजे से 11:57 बजे तक
- शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 11:11 बजे से 11:55 बजे तक
- चर मुहूर्त: शाम 03:41 बजे से 05:04 बजे तक
- प्रदोषकाल मुहूर्त: शाम 05:04 बजे से रात्रि 07:48 बजे तक
- स्थिर वृष लग्न: शाम 05:45 बजे से रात्रि 07:42 बजे तक
- स्थिर लाभ मुहूर्त: रात्रि 08:19 बजे से 09:56 बजे तक
- कर्क लग्न: रात्रि 09:33 बजे से 12:04 बजे तक
- सिंह लग्न: मध्यरात्रि 12:04 बजे देर रात 02:19 बजे तक
धनतेरस पर राशि के अनुसार खरीदारी:
- मेष: चांदी या तांबा के बर्तन।
- वृष: चांदी या तांबे के बर्तन, वस्त्र, कलश।
- मिथुन: स्वर्ण आभूषण, घरेलू सामग्री।
- कर्क: चांदी के आभूषण , पीतल बर्तन।
- सिंह: तांबे के बर्तन या पीतल के कलश, वस्त्र, सोना।
- कन्या: गणेश की मूर्ति, सोना या चांदी के आभूषण, पीतल के कलश।
- तुला: वस्त्र, सौंदर्य सामान, चांदी, पीतल के बर्तन।
- वृश्चिक: स्वर्ण आभूषण, बर्तन, तांबा या मिट्टी का पात्र।
- धनु: स्वर्ण आभूषण, तांबे या पीतल का बर्तन।
- मकर: वस्त्र ,चांदी के बर्तन या आभूषण।
- कुंभ: सौंदर्य के सामान, स्वर्ण, ताम्र पात्र।
- मीन: स्वर्ण आभूषण, चांदी या पीतल के बर्तन।
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