Chhath Puja 2026: छठ महापर्व कब से शुरू? जानिए नहाय-खाय और अर्घ्य की तिथियां
लोक आस्था का महापर्व छठ 13 नवंबर को नहाय-खाय से शुरू होकर 16 नवंबर को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा।

13 नवंबर को नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ आरंभ
HighLights
13 नवंबर को नहाय-खाय से छठ महापर्व शुरू।
15-16 नवंबर को अस्ताचलगामी, उदयीमान सूर्य को अर्घ्य।
प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, आत्मसंयम का प्रतीक पर्व।
जागरण संवाददाता, पटना। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की श्रद्धा और उदयीमान सूर्य के स्वागत की आस्था के बीच लोक आस्था का महापर्व छठ (Chhath Puja Date 2026) 13 नवंबर को नहाय-खाय से आरंभ होगा। वहीं, 14 नवंबर को खरना का प्रसाद बनेगा।
15 नवंबर को व्रती अस्ताचलगामी एवं 16 नवंबर को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा। शनिवार 14 नवंबर को खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास का संकल्प लेंगी।
रविवार की शाम नदी, तालाब और अन्य जलाशयों के घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। सोमवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होगा।
छठ महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, आत्मसंयम, स्वच्छता और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। इस पर्व में उगते सूर्य के साथ अस्त होते सूर्य को भी समान श्रद्धा से अर्घ्य दिया जाता है। यह परंपरा जीवन की प्रत्येक अवस्था के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश देती है।
पंडित राघव नाथ झा ने बताया कि छठ की विशिष्टता है कि इसमें प्रकृति को ही आराध्य के रूप में पूजा जाता है। सूर्य, जल और पृथ्वी के प्रति आभार व्यक्त करने वाला यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के संबंधों की सहज व्याख्या करता है।
व्रती निर्जला उपवास, नियम-निष्ठा और पवित्रता के साथ भगवान सूर्य तथा उनकी शक्ति उषा-प्रत्युषा की उपासना करते हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य देना जीवन के हर पड़ाव को स्वीकार करने का संदेश देता है, जबकि उगते सूर्य की आराधना नई ऊर्जा, आशा और नवजीवन का प्रतीक बन जाती है।
बांस के सूप-दउरा में मौसमी फल, पारंपरिक प्रसाद के माध्यम से लोक संस्कृति तथा प्रकृति के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। घाटों की सफाई और सामूहिक सहभागिता पर्व को सामाजिक एकता का प्रतीक बनाती है।
छठ का मूल संदेश है कि आस्था केवल पूजा तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे व्यवहार में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और लोक कल्याण के रूप में भी दिखाई दे।
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