यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सोशल मीडिया: जीएसटी का जश्न और महागठबंधन का प्यार-तकरार
बिहार की राजनीति के बदलते रंग और रूठने-मनाने के सिलसिले के बीच एक और मुद्दा जीएसटी ने पूरे देश में ...और पढ़ें

पटना [काजल]। बिहार की राजनीति के बदलते रंग और रूठने-मनाने के सिलसिले के बीच एक और मुद्दे ने पूरे देश में तहलका मचा दिया है, और वो है जीएसटी। शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ मिलकर आधी रात को संसद के सेंट्रल हॉल में भव्य समारोह के बीच घंटा बजाकर एक देश एक कर की व्यवस्था यानि जीएसटी लागू कर दिया।
इस बीच चर्चा गर्म रही कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी केंद्र सरकार द्वारा आयोजित जीएसटी के जश्न में शामिल होंगे लेकिन व्यस्तता की वजह से शायद वो नहीं जा सके और जदयू की ओर से प्रतिनिधि के रूप में राज्य के ऊर्जामंत्री विजेंद्र सिंह को भेजा गया।
वजह जो भी हो लेकिन उनके इस फैसले से विपक्षी पार्टियों ने चैन की सांस ली है और गठबंधन पर मंडरा रहे खतरे से अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने जीएसटी को काला कानून करार देते हुए कहा कि नोटबंदी की तरह यह भी जनता को परेशान करने वाला कानून ही साबित होगा। लालू यादव ने तंज कसते हुए कहा कि आधी रात में साधु-संत लोग घंटा बजा रहे हैं। इससे पता नहीं जनता का ये लोग कितना भला करेंगे।
याद हो कि जीएसटी बिल का नीतीश कुमार ने समर्थन किया था और महागठबंधन में खलबली मच गई थी। इस फेैसले के बाद रूठने-मनाने का सिलसिला चला था और बिल पास होने के बाद बिहार सरकार ने विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाकर जीएसटी पर अपनी मुहर लगाई थी।
जिसके लिए उस वक्त भी सोशल मीडिया ने राज्य सरकार की सराहना की थी और अब जीएसटी के लागू होने पर सोशल मीडिया ने केंद्र सरकार को सराहा है। लेकिन कुछ लोगों ने पूछा है कि बड़ा कंफ्यूजन हैं भाई, आखिर कोई तो कोई बताओ कि आखिर ये जीएसटी क्या है?
जीएसटी हो या रामनाथ कोविंद जैसे मुद्दे, महागठबंधन में रूठने-मनाने, प्यार और तकरार की त्रिकोणीय श्रृंखला चलती रहती है। इन बनते-बिगड़ते रिश्तों के कंफ्यूजन को गहरा रंग देनेे में रंगरेज की भूमिका निभा रही पार्टियां जहां नीतीश का गुणगान कर लोगों का कंफ्यूजन बढ़ा देती हैं तो वहीं नीतीश केे इंस्टैंट फैसले से सहयोगियों की नींद उड़ जाती हैं।
रामनाथ कोविंद के समर्थन का मुद्दा हो या नोटबंदी का, सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा हो या जीएसटी का। नीतीश भी एक बार जो कमिटमेंट कर दें तो वो किसी की नहीं सुनते, इसे लेकर सभी परेशान रहते हैं और डरना भी स्वाभाविक है कि कब नीतीश कौन-सा बड़ा फैसला ले लें?
कोई उन्हें बहका दिया तो.... लेकिन इन सबके बीच महागठबंधन में जारी जंग की वजह से सोशल मीडिया पर बिहार की बहुत जगहंसाई हुई और लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। वहीं, इस बार के प्यार-इजहार को लेकर जहां एक ओर राजनीतिक विशेषज्ञों की भौहें तनी है, वहीं युवावर्ग भी इस तकरार को लेकर काफी संजीदा है।
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वहीं, लालू यादव की परेशानी भी कम होने का नाम नहीं ले रही। चारा घोटाला मामले में वो अपनी पेशी को लेकर परेशान हैं तो दूसरी ओर उन्हें बेनामी संपत्ति के मामले में सुशील मोदी बख्शने के मूड में नहीं दिख रहे।
परेशान लालू ने रांची में पेशी के दौरान कोर्ट से गुहार लगाई कि हुजूर हम पॉलिटिकल आदमी हैं और अभी रैली भी करना है तो बार-बार हमारा कोर्ट आना संभव नहीं है तो न्यायाधीश ने भी जवाब दिया कि अभी तो जमाना सोशल मीडिया का है ऑनलाइन सबकुछ निपटा लीजिए ना....।