बिहार चुनाव में SIR का असर या हार का बहाना? 9 सीटों के आंकड़े दिखाकर महागठबंधन ने खोला मोर्चा
महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी हार का कारण मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को बताया है, आरोप ...और पढ़ें
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एसआईआर पर महागठबंधन ने फिर उठाए सवाल।
HighLights
महागठबंधन ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को हार का कारण बताया।
लाखों मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया गया।
एनडीए ने आरोपों को हार का बहाना कहा।
विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। इस बीच दीपावली और छठ का दूसरा अवसर बन आया, लेकिन मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर छिड़ा विवाद समाप्त नहीं हुआ।
महागठबंधन तना हुआ है। एसआईआर को वह अपनी पराजय का मूल कारण मानते हुए चुनाव परिणाम की पुनर्व्याख्या कर रहा।
इस क्रम में कम अंतर से हारी गई सीटों के लिए उसे अधिक मलाल है। दरअसल, उन विधानसभा क्षेत्रों में जितने मतों के अंतर से जीत-हार का निर्णय हुआ, उससे काफी अधिक संख्या में मतदाताओं की छंटनी हुई।
चुनाव परिणाम की पुनर्व्याख्या कर रहा महागठबंधन
महागठबंधन की मानें तो इसी राजनीतिक षड्यंत्र के कारण उसकी राजनीतिक संभावना धूमिल हुई, अन्यथा इस बार बिहार की सत्ता पर उसका अधिकार तय था।
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में सत्ता का निर्णय मात्र 11150 मतों के अंतर से हुआ था। वर्ष 2025 मेंं यह अंतर 4753027 मतों का रहा, जबकि एसआइआर के जरिये मतदाता-सूची से 6564075 नाम हटाए गए।
महागठबंधन का दावा है कि उनमें से अधिसंख्य उसके मतदाता थे। हालांकि, वह निर्वाचन आयोग को इसका कोई साक्ष्य नहीं सौंप पाया। महागठबंधन में एकमात्र भाकपा (माले) ने लगभग डेढ़ दर्जन नामों पर आपत्ति की थी।
पराजय का सारा दोष SIR पर
राजद-कांग्रेस आदि ने इतनी जहमत भी नहीं उठाई। अलबत्ता उन चार विशेष ट्रेनों को लेकर आपत्ति हुई, जो पिछले वर्ष तीन नवंबर को करनाल और गुरुग्राम से भागलपुर और बरौनी के लिए चली थीं।
उनसे लगभग 6000 लोग दीपावली और छठ मनाने हेतु घर पहुंचे थे। संयोग यह कि छह और 11 नवंबर को मतदान की तिथियां थीं। उसी हवाले से महागठबंधन ने उन्हें एनडीए का पेशेवर मतदाता बताया।
प्रतिवर्ष की भांति विशेष ट्रेनें इस बार भी चलाई जा रहीं, लेकिन अब इसमें कोई राजनीति नहीं दिख रही। एनडीए के पलटवार का यह बड़ा आधार है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेमरंजन पटेल का कहना है कि महागठबंधन की स्थिति ''खिसयानी बिल्ली खंभा नोंचे'' जैसी है।
साक्ष्य का संदर्भ: माले ने पिछले दिनों एसआईआर पर जन-सुनवाई की। राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने दावा किया कि एसआईआर के दौरान लगभग 150000 नाम फर्जी तरीके से हटाए गए।
साक्ष्य के रूप में उन्होंने कुछ लोगों को सामने भी किया, जिनके नाम मतदाता-सूची से कटे हैं। बहरहाल 10 विधानसभा क्षेत्रों में 110 मतदान-केंद्रों पर घर-घर जाकर आंकड़े जुटाए गए हैं। कई ठोस साक्ष्य यथाशीघ्र सामने लाए जाएंगे।
पराजय की पीड़ा: राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन बता रहे कि जिन सीटों पर जीत-हार का अंतर बहुत कम था, वहां मतदाता-सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए।
गठबंधनों के बीच तुलनात्मक विश्लेषण से यह अंतर और भी स्पष्ट हो जाता है। एनडीए ने 150 से कम वोटों के अंतर से तीन सीटें जीतीं, जबकि महागठबंधन इस श्रेणी में कोई सीट नहीं जीत पाया।
इसके उलट, महागठबंधन ने 1500 से अधिक वोटों के अंतर से तीन सीटें जीतीं, जबकि एनडीए ऐसी मात्र एक सीट ही जीत पाया।
| विधानसभा क्षेत्र | विजेता | EVM वोट | PB | कुल मत | जीत का अंतर | कटे नाम | रनर के PB | PB में अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| संदेश | जदयू | 80,072 | 526 | 80,598 | 27 | 25,062 | 463 | 63 |
| अगिआंव | भाजपा | 69,039 | 373 | 69,412 | 95 | 20,316 | 425 | -52 |
| नबीनगर | जदयू | 80,115 | 265 | 80,380 | 112 | 24,530 | 291 | -26 |
| बलरामपुर | लोजपा (रा.) | 80,349 | 110 | 80,459 | 389 | 29,254 | 72 | 38 |
| बख्तियारपुर | लोजपा (रा.) | 88,329 | 191 | 88,520 | 981 | 17,719 | 166 | 25 |
| तरैया | भाजपा | 85,401 | 163 | 85,564 | 1329 | 32,095 | 165 | -2 |
| नरकटिया | जदयू | 1,04,104 | 346 | 1,04,450 | 1443 | 23,431 | 578 | -232 |
| डुमरांव | जदयू | 78,884 | 527 | 79,411 | 2105 | 21,733 | 637 | -110 |
| रामगढ़ | बसपा | 72,383 | 307 | 72,689 | 30 | 1,197 | 321 | -14 |
नोट: PB = पोस्टल बैलेट। दिए गए आंकड़ों के अनुसार कुछ सीटों पर पोस्टल बैलेट के अंतर को लेकर परिणाम प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। आरोप यह है कि पोस्टल बैलेट को मनमाने तरीके से स्वीकृत या निरस्त किया गया।
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