गंगा जल संधि पर आर-पार के मूड में बिहार सरकार, सेमिनार से तय होगी पानी और गाद पर रणनीति
बिहार सरकार 'गंगा जल संधि-बिहार की जल सुरक्षा' विषय पर सेमिनार आयोजित कर केंद्र सरकार पर दबाव बनाएगी। इसका उद्देश्य ...और पढ़ें

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।
HighLights
गंगा जल संधि की विसंगतियों पर केंद्र पर दबाव।
बिहार की भविष्य की जल आवश्यकताओं पर जोर।
गाद प्रबंधन नीति और जल सुरक्षा महत्वपूर्ण।
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य सरकार "गंगा जल संधि-बिहार की जल सुरक्षा" विषय पर सेमिनार का आयोजन कर केंद्र सरकार का ध्यान विसंगतियों की ओर आकृष्ट करेगा।
साथ ही बिहार गंगा जल संधि से जुड़े तकनीकी एवं नीतिगत पहलुओं, बिहार की वर्तमान एवं भावी जल आवश्यकताओं, गंगा नदी में गाद के जमाव, बाढ़ प्रबंधन तथा जल की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाएगा।
इसके लिए जल संसाधन विभाग विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करेगा। बांग्लादेश के साथ जल संधि करते समय बिहार की अनदेखी को लेकर भी गहन मंथन किया जाएगा।
बक्सर से फरक्का तक गंगा नदी में गाद के जमाव की स्थिति का निर्धारित हवाई सर्वेक्षण स्थगित कर दिया गया है।
बिहार की जल सुरक्षा सर्वोपरि
राज्य सरकार का कहना है कि भारत एवं बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 वर्षों के लिए हस्ताक्षरित गंगा जल संधि की अवधि 11 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। संधि के अंतर्गत फरक्का बैराज से निम्न धार में जल के बंटवारे की व्यवस्था की गई है।
बिहार की बढ़ती जल आवश्यकताओं और बदलती जलवैज्ञानिक परिस्थितियों को देखते हुए संधि की भावी व्यवस्था पर विचार करते समय बिहार की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं का समग्र आकलन आवश्यक है।
बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2051 तक की अनुमानित जल आवश्यकता का वैज्ञानिक आकलन कराया गया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बिहार को गैर-मानसून अवधि (जनवरी से मई तक) में भी न्यूनतम लगभग 10,000 क्यूसेक जल की आवश्यकता है।
राज्य में जलाशयों एवं अन्य जल स्रोतों में पर्याप्त जल उपलब्धता के अभाव में इनकी उपयोगिता प्रभावित होती है। ऐसे में गंगा से जल की वर्षपर्यंत उपलब्धता बिहार की जल सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
सेमिनार का उद्देश्य इन आवश्यकताओं को वैज्ञानिक तथ्यों एवं तकनीकी आकलन के आधार पर प्रस्तुत करना तथा गंगा जल संधि की भावी व्यवस्था के संदर्भ में बिहार के हितों से जुड़े विषयों पर सार्थक विमर्श करना है।
राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की आवश्यकता
गाद का जमाव न केवल बाढ़ के जोखिम को प्रभावित करता है, बल्कि नदियों, बराजों, जलाशयों एवं अन्य जल स्रोतों की जलवहन और जलधारण क्षमता पर भी असर डालता है। इससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा अन्य उपयोगों के लिए जल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
जलवायु परिवर्तन, वर्षा के स्वरूप में बदलाव, बढ़ती जनसंख्या, कृषि की आवश्यकताओं, शहरीकरण एवं औद्योगीकरण के कारण जल प्रबंधन की चुनौती और महत्वपूर्ण हो गई है।
बिहार में गाद प्रबंधन एवं रिवर सिस्टम के पुनर्स्थापन की आवश्यकता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा "बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति", 2026 लागू की गई है।
चूंकि गंगा नदी में गाद की समस्या अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रकृति की है, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट गाद प्रबंधन नीति, दीर्घकालिक कार्ययोजना तथा गंगा बेसिन के राज्यों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय कोष की आवश्यकता है।
सेमिनार में विशेषज्ञों से बिहार की अपेक्षा है कि वे उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों, तकनीकी अध्ययनों और अपने अनुभवों के आधार पर बिहार की वर्तमान एवं भावी जल मांग के आकलन, जल के न्यायसंगत उपयोग, गाद प्रबंधन, बाढ़ जोखिम में कमी तथा जल की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के व्यावहारिक विकल्पों पर सुझाव देंगे।
विचार-विमर्श के आधार पर तकनीकी एवं नीतिगत अनुशंसाएं तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि बिहार का पक्ष भारत सरकार एवं संबंधित संस्थाओं के समक्ष तथ्यात्मक आधार पर प्रस्तुत किया जा सके।
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