'2050 तक की पानी की जरूरतों का रखा जाए ख्याल', फरक्का जल संधि पर बोले JDU के संजय झा
जदयू के 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' कार्यक्रम में संजय कुमार झा ने कहा कि संधि के नवीनीकरण में ...और पढ़ें

फरक्का जल संधि नवीनीकरण में बिहार के हितों की अनदेखी नहीं: संजय कुमार झा
राज्य ब्यूरो, पटना। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को प्रदेश जदयू कार्यालय में आयोजित फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद कार्यक्रम का दीप जलाकार उद्घाटन किया। इस अवसर पर फरक्का बैराज एवं फरक्का जल संधि से बिहार पर पड़ने वाले प्रभावों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री को दिखाया गया।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि फरक्का जल संधि का नवीनीकरण होता है, तो वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। बिहार के हितों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब फरक्का जल संधि के निर्धारण किया गया था तब उस दौरान बिहार के हितों की अनदेखी की गई। बिहार और केंद्र की तत्कालीन सरकारों ने इस संधि के दौरान राज्य के हितों की बलि चढ़ाने का काम किया और इसके दूरगामी प्रभावों पर विचार नहीं किया गया कि इससे बिहार के किसानों की सिंचाई, आम लोगों के पेयजल, उद्योगों की जल आवश्यकताओं, लाखों लोगों की आजीविका और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि आज बिहार में नए उद्योग और कल-कारखाने स्थापित हो रहे हैं, जिससे पानी की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि के प्रविधान के मुताबिक शुष्क मौसम (एक जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़ता है। 1100 क्यूमेक पानी बिहार की आंतरिक नदियों का पानी होता है।
इस अवसर पर बिहार पार्षद ललन कुमार सर्राफ तथा संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी और विधायक श्याम रजक ने भी संबोधित किया।
जदयू के पटना ग्रामीण के जिला अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि पटना महानगर अध्यक्ष राधेश्याम कुशवाहा ने संचालन किया। प्रदेश यूवा अध्यक्ष नीतीश पटेल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में विधायक अरुण मांझी, विधान पार्षद शिवरानी देवी प्रजापति, भारती मेहता तथा ललन मंडल समेत अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
