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फरक्का बराज से हो रहे नुकसान पर बिहार करेगा गंगा जल संधि राष्ट्रीय सम्मेलन, पटना में जुटेंगे एक्सपर्ट

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:06 PM (IST)

बिहार का जल संसाधन विभाग गंगा में गाद और फरक्का बराज के नुकसान पर 30 अक्टूबर को पटना में 'गंगा ...और पढ़ें

फरक्का बराज से हो रहे नुकसान पर बिहार करेगा गंगा जल संधि राष्ट्रीय सम्मेलन, पटना में जुटेंगे एक्सपर्ट

फरक्का बराज से हो रहे नुकसान पर बिहार करेगा गंगा जल संधि राष्ट्रीय सम्मेलन, पटना में जुटेंगे एक्सपर्ट

HighLights

  1. गंगा में गाद व फरक्का बराज के नुकसान पर सम्मेलन।

  2. 'गंगा जल संधि: बिहार की जल सुरक्षा' मुख्य विषय।

  3. बिहार की जल सुरक्षा हेतु वैज्ञानिक फ्रेमवर्क पर विमर्श।

राज्य ब्यूरो, पटना। गंगा में बेतहाशा बढ़ रही गाद व फरक्का बराज से बिहार को हो रहे नुकसान को लेकर जल संसाधन विभाग ने पटना में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय ‘गंगा जल संधि: बिहार की जल सुरक्षा’ रखा गया है।

आगामी 30 अक्टूबर आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में तकनीकी व नीतिगत पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ विमर्श होगा। सम्मेलन से निकले विमर्श के बाद दिल्ली में भी इस तरह का सम्मेलन की योजना है। पटना एवं दिल्ली के विमर्श से निकले निष्कर्ष से केंद्र सरकार को भी अवगत कराया जाएगा।

सम्मेलन में देश-विदेश के नामी-गिरामी जल विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा रहा है। सम्मेलन के एक दिन पहले 29 अक्टूबर को विशेषज्ञों को बक्सर से फरक्का तक गंगा नदी का हवाई सर्वेक्षण कराया जाएगा, ताकि सम्मेलन में वे तथ्यपरक बात रख सकें।

सम्मेलन के लिए आयोजन समिति बनाई गई है जिसके मुख्य संरक्षक उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी हैं। अभियंता प्रमुख (मुख्यालय) ब्रजेश मोहन सहित अन्य को इस समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया है।

सम्मेलन को सफल बनाने के लिए विभाग ने माडरेशन समिति, लाजिस्टिक समिति, सम्मेलन व्यवस्था समिति, आमंत्रण समिति, स्वागत समिति, प्रतिवेदक समिति, मीडिया प्रबंधन समिति का गठन किया है।

सम्मेलन में गंगा में गाद प्रबंधन और फरक्का प्रभाव पर मंथन होगा। इसका मकसद गंगा जल बंटवारे के नए समझौते से पहले बिहार की जल सुरक्षा के लिए एक वैज्ञानिक और ठोस फ्रेमवर्क तैयार करना है।

चूंकि गंगा एक अंतरराज्यीय और सीमा-पार नदी है। बिहार गंगा बेसिन में सबसे नीचे बसा है, जहां घाघरा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, सोन, पुनपुन और महानंदा जैसी बड़ी नदियां मिलती हैं।

ये नदियां अपने साथ भारी मात्रा में पानी और गाद लाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में नदियों के रूप में बदलाव, ऊपर से आ रही गाद का बिहार में जमा होना, फरक्का बराज का डाउनस्ट्रीम पर असर और जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के पैटर्न में बदलाव ने बिहार में बाढ़ और जल संकट को और गंभीर बना दिया है।

ज्यादा गाद जमने से नदी की धारा छोटी हो रही है और बाढ़ का लेवल हर साल बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे का समझौता जल्द ही रिन्यू होने वाला है। सरकार चाहती है कि इस समझौते में बिहार की भविष्य की पानी की जरूरत को भी शामिल किया जाए।

सम्मेलन में होगा इस पर विमर्श

  • गंगा में गाद का वैज्ञानिक प्रबंधन
  • फरक्का के बाद नदी की स्थिति
  • समाधान में केंद्र के साथ ही नेपाल का सहयोग
  • पूरे बेसिन को एक साथ मैनेज करना
  • गंगा जल बंटवारा में बिहार का हित

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