बिहार में 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप की तैयारी तेज, दूसरे चरण के 6 शहरों के लिए बनेगा नक्शा
राज्य में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप में से अब दूसरे चरण में मुजफ्फरपुर, दरभंगा सहित छह शहरों के लिए टाउन प्लानिंग स्कीम तैयार की जाएगी।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
दूसरे चरण में मुजफ्फरपुर, दरभंगा सहित छह शहरों में टाउनशिप बनेगी।
नगर विकास विभाग सलाहकार एजेंसी का चयन कर योजना बनाएगा।
जमीन के उपयोग, सड़क, पार्क, जल निकासी का विस्तृत सर्वे होगा।
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में प्रस्तावित सभी एक दर्जन ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप को जमीन पर उतारने की तैयारी अब तेज हो गई है।
पटना, गया, सीतामढ़ी, भागलपुर, डेहरी और सारण के बाद अब दूसरे चरण में अन्य छह शहरों के लिए टाउन प्लानिंग स्कीम तैयार करने की तैयारी है।
इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग सलाहकार एजेंसी का चयन करेगा। एजेंसी केवल नक्शा तैयार नहीं करेगी, बल्कि जमीन के मौजूदा उपयोग से लेकर भविष्य में सड़क, आवास, पार्क, जल निकासी और दूसरी सुविधाओं के लिए भूमि के इस्तेमाल की पूरी योजना तैयार करेगी।
राज्य में कुल 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप प्रस्तावित हैं। इन्हें चार समूहों में बांटा गया है। तीसरे समूह में दरभंगा की मिथिला, सहरसा की कोसी और मुजफ्फरपुर की तिरहुत टाउनशिप हैं।
चौथे समूह में पूर्णिया, मुंगेर की अंग और सोनपुर की हरिहरनाथपुरम टाउनशिप शामिल हैं। योजना बनाते समय बिहार टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली, 2025 और बिहार अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 2012 के प्राविधानों को आधार बनाया जाएगा।
जमीन की हर जानकारी होगी दर्ज
टाउन प्लानिंग स्कीम की शुरुआत जमीन की वास्तविक स्थिति जानने से होगी। कैडेस्ट्रल और बेस मैप तैयार करने के बाद पूरे क्षेत्र का टोपोग्राफिक सर्वे कराया जाएगा।
टोटल स्टेशन और ड्रोन सर्वे जैसी तकनीक से खाता-खसरा, जमीन का क्षेत्रफल, चौहद्दी और वर्तमान मालिकाना हक दर्ज किया जाएगा। जमीन अभी किस काम में इस्तेमाल हो रही है, इसका भी रिकॉर्ड तैयार होगा।
सड़क नेटवर्क का भी विस्तृत नक्शा बनेगा। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग से लेकर जिला सड़क, पहुंच पथ, निजी सड़क और पैदल रास्ते तक दर्ज किए जाएंगे।
डिवाइडर, यातायात चौकी और बस स्टॉप जैसी सुविधाओं को भी मैप किया जाएगा। झील, तालाब, कुआं, नहर, पानी की टंकी और जल निकासी व्यवस्था की स्थिति भी सर्वे में शामिल होगी।
जमाबंदी से मिलाया जाएगा सर्वे का आंकड़ा
टाउनशिप के लिए जमीन जुटाने में लैंड पूलिंग को प्राथमिकता दी जानी है। इसलिए भू-स्वामियों का पूरा ब्योरा तैयार होगा। राजस्व रिकार्ड, खसरा नंबर और जमीन के क्षेत्रफल को सर्वे डेटा तथा जमाबंदी से मिलाया जाएगा।
इसके आधार पर यह भी तय होगा कि लैंड पूलिंग में भू-स्वामी को बदले में किस तरह की जमीन दी जा सकती है। सड़क, नाला, पार्क और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए सरकारी जमीन का भी अलग से रेखांकन होगा।
विभाग ने मई 2026 में भी एजेंसी चयन के लिए निविदा जारी की थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार तकनीकी कारणों से अब दोबारा निविदा निकाली गई है।
सर्वे में क्या-क्या आएगा
- खाता-खसरा
- जमाबंदी
- मालिकाना हक
- जमीन का क्षेत्रफल
- चौहद्दी
- वर्तमान उपयोग
- सड़क नेटवर्क
- जलस्रोत
- जल निकासी
- बस स्टॉप
- सार्वजनिक जमीन
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