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दुनिया में नौवीं रैंक के बाद बिहार संग्रहालय का अगला लक्ष्य, अब AI से बदलेगा इतिहास देखने का अंदाज

Published: Fri, 30 Oct 2026 06:58 PM (IST)

बिहार संग्रहालय, जो दुनिया के शीर्ष 100 में नौवें और एशिया में पहले स्थान पर है, अब वैश्विक स्तर पर ...और पढ़ें

एआई से बदलेगा बिहार संग्रहालय का स्वरूप। फाइल

एआई से बदलेगा बिहार संग्रहालय का स्वरूप। फाइल

जागरण संवाददाता, पटना। बिहार की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने वाला बिहार संग्रहालय अब भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को विकसित करने की तैयारी में है।

दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों में नौवां और एशिया में पहला स्थान हासिल करने के बाद अब इसकी नजर वैश्विक स्तर पर और बेहतर पहचान बनाने पर है।

इसके लिए संग्रहालय परिसर में युवाओं को केंद्र में रखकर आधुनिक संग्रहालय विकसित करने की योजना है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा।

संग्रहालय प्रशासन अगले 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर इसकी रूपरेखा तैयार करेगा। योजना के तहत प्रयोगशालाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस करने, पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाने और एआइ आधारित सूचना प्रणाली विकसित करने पर भी जोर रहेगा।

इससे दर्शक किसी कलाकृति या पुरावशेष के सामने खड़े होकर उसके इतिहास, निर्माण काल और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

Bihar Museaum

अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में मिली पहचान

बिहार संग्रहालय को इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि मिली है। जर्मनी के म्यूनिख से संपादित होने वाली वैश्विक ट्रैवल गाइड और पत्रिका 'वर्थ अ जर्नी' की रैंकिंग में इसे एशिया का सर्वश्रेष्ठ और दुनिया के 100 बेहतरीन संग्रहालयों में नौवां स्थान दिया गया है।

संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संस्था अपने स्तर पर दुनिया के विभिन्न संग्रहालयों का सर्वे करती है। इसकी प्रक्रिया गोपनीय रहती है और संबंधित संग्रहालय को इसकी पूर्व जानकारी नहीं होती।

सर्वे में पुरावशेषों और कलाकृतियों की गुणवत्ता, संरक्षण, स्वच्छता, प्रदर्शन व्यवस्था और दर्शकों को उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी सहित कई मानकों का मूल्यांकन किया जाता है। इसी आधार पर बिहार संग्रहालय को यह स्थान मिला है।

40 हजार से अधिक धरोहरों का संग्रह

बिहार संग्रहालय प्रदेश की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, कला और संस्कृति को समझने का प्रमुख केंद्र है। यहां 40 हजार से अधिक दुर्लभ पुरावशेष और कलाकृतियां हैं।

इनमें करीब ढाई हजार वर्ष पुरानी विश्वप्रसिद्ध दीदारगंज की यक्षिणी प्रतिमा, मौर्यकालीन मूर्तियां, पालकालीन कांस्य प्रतिमाएं और मिथिला पेंटिंग सहित अनेक ऐतिहासिक धरोहरें शामिल हैं।

महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह के अनुसार, संग्रहालय की परिकल्पना केवल आधुनिक भवन बनाने तक सीमित नहीं थी। इसका उद्देश्य बिहार की समृद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाना था।

इसी दिशा में बिहार म्यूजियम बिनाले की शुरुआत की गई। इसके माध्यम से दुनिया के विभिन्न संग्रहालयों, संस्कृतियों और कलाओं को एक मंच पर लाया जाता है।

अगले वर्ष संग्रहालय परिसर में विश्व की लोक कलाओं पर आधारित बिनाले आयोजित करने की योजना है। इसमें विभिन्न देशों की लोक कलाओं का प्रदर्शन होगा।

Bihar Museaum 1

पांच सरकारी आवास हटाकर हुआ निर्माण

बिहार संग्रहालय बनाने की योजना वर्ष 2009 में तैयार हुई थी। इसके लिए तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी अंजनी कुमार सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया।

नेहरू पथ स्थित पांच बड़े सरकारी आवासों को हटाकर जुलाई 2013 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। संग्रहालय की अवधारणा और डिजाइन की जिम्मेदारी कनाडा की लार्ड कल्चरल रिसोर्सेज, वास्तुकला का काम जापान की माकी एंड एसोसिएट्स और निर्माण की जिम्मेदारी एलएंडटी को सौंपी गई।

सात अगस्त 2015 को ओरिएंटेशन और बाल दीर्घा के साथ संग्रहालय की शुरुआत हुई। इसके बाद दो अक्टूबर 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया।

हालांकि, संग्रहालय के निर्माण के फैसले को लेकर उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर आलोचना भी हुई थी और मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा था। बाद में यह प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा।

भूमिगत सुरंग से जुड़ेंगे दोनों संग्रहालय

बिहार संग्रहालय की भावी योजनाओं में पटना संग्रहालय से उसका जुड़ाव भी अहम है। दोनों संग्रहालयों को जोड़ने के लिए करीब 542 करोड़ रुपये की लागत से लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग बनाई जा रही है।

इसकी खुदाई मार्च से शुरू हो चुकी है। यह जमीन से 15 से 20 मीटर नीचे बनेगी और पूरी तरह वातानुकूलित होगी।सुरंग के दोनों छोर पर लिफ्ट की सुविधा होगी।

पैदल यात्रियों के लिए सीढ़ियां और सुरक्षित मार्ग बनाया जाएगा। बच्चों और बुजुर्गों की सुविधा के लिए बैटरी चालित वाहन चलाने की भी योजना है।

इसकी दीवारों पर मिथिला पेंटिंग के जरिए बिहार की लोक संस्कृति और विरासत प्रदर्शित की जाएगी। सुरंग बनने के बाद पर्यटक एक ही यात्रा में पटना संग्रहालय और बिहार संग्रहालय दोनों की धरोहरों को देख सकेंगे। इससे पटना के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी विस्तार मिलेगा।

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