विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिहार म्यूजियम की दुनिया में धाक: टॉप-10 सूची में नौवें नंबर पर, लूव्र और द मेट से भी आगे; एशिया का इकलौता संग्रहालय

Published: Thu, 29 Oct 2026 03:38 PM (IST)

बिहार म्यूजियम को वर्ष 2026 के लिए दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची में नौवां स्थान मिला है। यह ...और पढ़ें

बिहार म्यूजियम

बिहार म्यूजियम

HighLights

  1. दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों में नौवां स्थान प्राप्त किया।

  2. भारत और एशिया का एकमात्र संग्रहालय शीर्ष 10 में शामिल।

  3. लूव्र और मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट को पीछे छोड़ा।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित बिहार म्यूजियम ने वैश्विक स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई है। वर्ष 2026 के दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची में इसे नौवां स्थान मिला है।

ट्रैवल गाइड Worth a Journey की ओर से जारी इस सूची में जगह बनाने वाला यह भारत का एकमात्र संग्रहालय है। इतना ही नहीं, दुनिया के शीर्ष 10 संग्रहालयों में शामिल होने वाला यह एशिया का भी इकलौता संग्रहालय है।

इस उपलब्धि ने बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दी है। सूची में पटना के इस संग्रहालय ने पेरिस के प्रसिद्ध लूव्र म्यूजियम और न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट जैसे चर्चित संस्थानों को पीछे छोड़ दिया।

मेक्सिको से वियना तक के संग्रहालय शीर्ष पांच में

Worth a Journey की सूची में मेक्सिको सिटी का म्यूजियो नैशनल डी एंट्रोपोलोजिया पहले स्थान पर है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड स्थित म्यूजियो डेल प्राडो दूसरे स्थान पर रहा।

डेनमार्क के हुमलेबेक स्थित लुइसियाना म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग का स्टेट हर्मिटेज म्यूजियम और ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना का कुन्स्टहिस्टोरिस्चेस म्यूजियम शीर्ष पांच में शामिल हैं।

इन प्रतिष्ठित संग्रहालयों के बीच बिहार म्यूजियम का नौवां स्थान हासिल करना राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सूची में इसकी मौजूदगी भारतीय इतिहास, कला और पुरातात्विक धरोहर को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करती है।

2015 में हुआ था बिहार म्यूजियम का उद्घाटन

पटना के बेली रोड पर स्थित बिहार म्यूजियम का उद्घाटन वर्ष 2015 में हुआ था। इसे इस उद्देश्य से विकसित किया गया कि पुराने पटना म्यूजियम में रखी ऐतिहासिक धरोहरों को बेहतर तरीके से प्रदर्शित किया जा सके।

इसकी इमारत का डिजाइन जापान के प्रित्जकर पुरस्कार विजेता वास्तुकार फुमिहिको माकी ने मुंबई की ओपोलिस आर्किटेक्ट्स के साथ मिलकर तैयार किया।

म्यूजियम में प्राचीन भारत से लेकर वर्ष 1764 तक के इतिहास से जुड़ी कलाकृतियां रखी गई हैं। यहां ऐतिहासिक वस्तुओं, मूर्तियों, सिक्कों, पांडुलिपियों और लोककला का संग्रह मौजूद है।

इसकी दीर्घाओं को अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों के आधार पर व्यवस्थित किया गया है, जिनमें मौर्य, मुगल और सूर वंश से संबंधित विरासत भी शामिल है।

दीदारगंज यक्षी है संग्रहालय की खास पहचान

बिहार म्यूजियम के प्रमुख आकर्षणों में मौर्यकालीन दीदारगंज यक्षी की प्रतिमा शामिल है। प्राचीन भारतीय मूर्तिकला की प्रसिद्ध कृतियों में गिनी जाने वाली इस प्रतिमा की खोज वर्ष 1917 में पटना के पास हुई थी। यह प्रतिमा संग्रहालय के ऐतिहासिक और कलात्मक संग्रह की खास पहचान मानी जाती है।

इसके अलावा, यहां बच्चों के लिए एक विशेष गैलरी भी बनाई गई है, जिसमें जानवरों, लोककला, संस्कृति और विज्ञान से जुड़े प्रदर्शन शामिल हैं। यह गैलरी बच्चों को रोचक तरीके से ज्ञान देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

डायस्पोरा गैलरी में बिहार की वैश्विक पहचान

बिहार म्यूजियम की डायस्पोरा गैलरी राज्य की भौगोलिक सीमाओं से बाहर बिहार की मौजूदगी और उसके प्रभाव को दर्शाती है।

यह गैलरी बताती है कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध व्यापक सामाजिक और ऐतिहासिक अनुभवों से भी है।

इतिहास, कला, वास्तुकला और बच्चों के लिए तैयार विशेष प्रदर्शनों के मेल ने बिहार म्यूजियम को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र बनाया है।

वर्ष 2026 की वैश्विक सूची में नौवां स्थान मिलने से पटना का यह संग्रहालय अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और विरासत के नक्शे पर और अधिक चर्चा में आ गया है।

यह भी पढ़ें- बिहार म्यूजियम–पटना म्यूजियम को जोड़ने वाला अंडरग्राउंड सब-वे बनेगा, सरकार ने जारी किए 13.40 करोड़ रुपये