बिहार MLC चुनाव रिजल्ट के बाद NDA में रार, सांसद राजीव प्रताप रूडी के बयान से गरमाई बिहार की सियासत
विधान परिषद चुनाव परिणामों के बाद एनडीए में आंतरिक कलह बढ़ गई है, खासकर जदयू की हार और भाजपा द्वारा निर्दलीय विजेताओं को शामिल करने के प्रयासों से।

सांसद राजीव प्रताप रूडी। (फाइल फोटो)
HighLights
विधान परिषद चुनाव परिणाम से एनडीए में आंतरिक तनाव।
जदयू की हार, भाजपा पर निर्दलीय को शामिल करने का आरोप।
राजीव प्रताप रूडी के राजपूत नेताओं पर बयान से विवाद।
अरुण अशेष, पटना। विधान परिषद की शिक्षक एवं स्नातक सीटों पर हुए चुनाव ने एनडीए को तनाव में डाल दिया है। पहले तनाव परिणाम पर हुआ, जब जदयू अपने कोटे की चार में से तीन सीटों पर हार गया।
लेकिन, दो निर्दलीय विधान पार्षदों-वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज को भाजपा में शामिल कराने के प्रयास के बाद तनाव बढ़ता ही जा रहा है।
हालांकि कानूनी बाधाओं के कारण दोनों निर्दलीय भाजपा में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हो पाए।अब वे कह रहे कि भाजपा का समर्थन कर रहे हैं।
उधर भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद राजीव प्रताप रूडी ने यह कह कर अलग मोर्चा खोल दिया कि भाजपा नेतृत्व ने किसी राजपूत नेता की ऐसी हैसियत नहीं है कि उनके कहने पर कोई राजपूत चुनाव मैदान से हट जाए।
उन्होंने कहा-आपको क्या लगता है कि आज बीजेपी किसी राजपूत नेता को इतना महत्व दे रही है कि उसकी कही बातों को लोग मान लें। राज्य में ऐसा कोई राजपूत नेता नहीं है, जिसके कहने पर इस जाति के लोग किसी दल को वोट दें।
आनंद पुष्कर के आरोप पर जवाब
रुडी की यह टिप्पणी सारण शिक्षक क्षेत्र से जदयू के पराजित उम्मीदवार आनंद पुष्कर के इस आरोप पर आई है कि भाजपा के तीन सांसद-राजीव प्रताप रुडी, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और राधामोहन सिंह ने इस चुनाव में गठबंधन धर्म का पालन करते हुए उनकी मदद नहीं की।
रूडी, सिग्रीवाल और राधामोहन क्रमश: छपरा,महाराजगंज और पूर्वी चंपारण के भाजपा सांसद हैं। यह तीनों संसदीय क्षेत्र सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है।
पुष्कर का आरोप इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उन्हें पराजित करने वाले निर्दलीय राहुल राज भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य थे।
बागी उम्मीदवार बनने के कारण उन्हें भाजपा ने छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। लेकिन, जीत के बाद उन्हें भाजपा में शामिल कराने का प्रयास किया गया। इसमें रुडी की भी भूमिका थी।
उधर तिरहुत स्नातक क्षेत्र से पराजित जदयू उम्मीदवार अभिषेक झा ने भी एनडीए नेताओं पर उन्हें पराजित करने के लिए चक्रव्यूह रचने का आरोप लगाया।
इस क्षेत्र में भी सारण वाला प्रयोग दोहराया गया। अभिषेक को पराजित करने वाले निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी को भी भाजपा में शामिल कराने का प्रयास किया गया। प्रदेश जदयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इसका विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले छह साल के लिए निष्कासित किसी नेता को भाजपा में शामिल कराने के प्रश्न पर भाजपा नेतृत्व को विचार करना चाहिए। परिणाम की समीक्षा के लिए जदयू ने पांच नवंबर को बैठक बुलाई है। इसके बाद ही जदयू के आधिकारिक रूख का पता चल पाएगा।
चिराग और संतोष का मिला साथ
भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि लोजपा रा के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष संतोष सुमन ने दोनों निर्दलीय विधायकों के भाजपा का समर्थन देने की घोषणा पर कोई आपत्ति नहीं की।
दोनों नेताओं ने कहा कि कोई निर्वाचित सदस्य किसी दल को समर्थन दे, इसमें कोई बुराई नहीं है। हां, कानूनी बाध्यता अलग विषय है।
संतोष सुमन राज्य सरकार के मंत्री भी हैं। उन्होंने निर्दलीय विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मुद्दे पर कहा-यह विधान परिषद के सभापति के क्षेत्राधिकार का मामला है।
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