बिहार MLC चुनाव संपन्न: शिक्षक सीटों पर 74.55% मतदान, स्नातक में 43.87 प्रतिशत वोटिंग; 27 को रिजल्ट
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ, जिसमें शिक्षक सीटों पर 74.55% और स्नातक सीटों पर 43.87% ...और पढ़ें

शिक्षक सीटों पर सारण में सबसे ज्यादा मतदान
HighLights
शिक्षक सीटों पर 74.55%, स्नातक सीटों पर 43.87% मतदान।
27 अक्टूबर को मतगणना, 150 प्रत्याशियों का भाग्य होगा तय।
मोकामा में अनंत सिंह समर्थकों और नीरज कुमार समर्थकों में झड़प।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक कोटे की आठ सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान संपन्न हो गया। शिक्षक कोटे की सीटों पर मतदाताओं ने अधिक उत्साह दिखाया, जबकि स्नातक कोटे की सीटों पर मतदान का प्रतिशत काफी कम रहा।
शिक्षक सीटों पर औसतन 74.55 प्रतिशत और स्नातक सीटों पर 43.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अब सभी की निगाहें 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।
इन चुनावों से राज्य सरकार की संरचना पर सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन परिणाम राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। कम मतदान ने खासकर स्नातक कोटे की सीटों पर प्रत्याशियों की चिंता बढ़ा दी है।
शिक्षक सीटों पर सारण में सबसे ज्यादा मतदान
शिक्षक कोटे की चार सीटों पर कुल 40,253 मतदाता थे। इनमें औसतन 74.55 प्रतिशत मतदान हुआ। सारण सीट पर सबसे अधिक 87.16 प्रतिशत वोट पड़े। दरभंगा में 79 प्रतिशत, तिरहुत में 78.19 प्रतिशत और पटना में 56.89 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
इन चार सीटों पर कुल 60 प्रत्याशी मैदान में हैं। अधिक मतदान से प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के बीच जीत-हार को लेकर गुणा-गणित तेज हो गया है।
स्नातक सीटों पर 43.87 प्रतिशत वोटिंग
स्नातक कोटे की चार सीटों पर मतदान का औसत 43.87 प्रतिशत रहा। कुल 4,92,594 मतदाताओं वाली इन सीटों पर 90 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। कोसी सीट पर सबसे अधिक 52.51 प्रतिशत मतदान हुआ।
तिरहुत में 42.15 प्रतिशत, दरभंगा में 42 प्रतिशत और पटना में सबसे कम 36.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पटना स्नातक सीट इस बार राजनीतिक कारणों से भी चर्चा में रही।
13 शिकायतें मिलीं, सभी का निष्पादन
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय के अनुसार, मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रहा। स्नातक कोटे की सीटों के लिए 598 और शिक्षक कोटे की सीटों के लिए 335 मतदान केंद्र बनाए गए थे। नियंत्रण कक्ष को कुल 13 शिकायतें मिलीं, जिनका निष्पादन कर दिया गया।
हालांकि, मतदान के दौरान राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। सारण शिक्षक सीट से जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी आफाक अहमद के विरुद्ध आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
आरोप है कि इंटरनेट मीडिया पर शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने का उल्लेख करते हुए उन्हें भारी मतों से जिताने की अपील की गई थी।
मोकामा में अनंत सिंह और नीरज कुमार के समर्थक भिड़े
मतदान शुरू होने के साथ ही मोकामा में जदयू विधायक अनंत सिंह और जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के समर्थकों के बीच झड़प की घटना सामने आई।
इस मामले में अनंत सिंह के निजी सुरक्षा गार्ड विपिन सिंह, समर्थक राजेश सिंह और नगर भाजपा अध्यक्ष राहुल रंजन को हिरासत में लिया गया।
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की लगातार चौथी जीत की कोशिश और उनके विरोध में सक्रिय राजनीतिक गुटों के कारण मुकाबला खासा चर्चित रहा। अनंत सिंह जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में सक्रिय बताए गए।
महागठबंधन में कई सीटों पर दोस्ताना मुकाबला
आठ सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों के कुल 14 प्रत्याशी मैदान में रहे। पांच सीटों पर राजद और कांग्रेस के बीच दोस्ताना मुकाबले की स्थिति बनी। इससे गठबंधन के भीतर मतों के बंटवारे की आशंका भी रही।
दरभंगा स्नातक सीट पर कांग्रेस के विधान पार्षद डा. मदन मोहन झा के सामने राजद के कुमर राय मैदान में हैं। यहां भाकपा (माले) ने भी अपना प्रत्याशी उतारा। कुल मिलाकर राजद के सात, कांग्रेस के पांच और भाकपा तथा भाकपा (माले) के एक-एक प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
27 अक्टूबर को खुलेगा किस्मत का पिटारा
आठ सीटों पर कुल 150 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतगणना के बाद होगा। शिक्षक कोटे की सीटों पर अधिक मतदान और स्नातक सीटों पर कम वोटिंग के राजनीतिक मायने क्या होंगे, यह परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा। एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज पार्टी के लिए ये नतीजे आगे की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।
