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'कोटे में कोटा' पर मंत्री संतोष सुमन के 8 सवाल, बोले- जब पिछड़ों में वर्गीकरण तो SC में क्यों नहीं?

Published: Sun, 13 Sep 2026 01:10 PM (IST)

मंत्री संतोष सुमन ने अनुसूचित जाति के भीतर 'कोटे में कोटा' के विरोध पर सवाल उठाए हैं, जिसका उद्देश्य आरक्षण ...और पढ़ें

ब‍िहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन। फाइल

ब‍िहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन। फाइल

HighLights

  1. मंत्री संतोष सुमन ने एससी वर्गीकरण के विरोध पर सवाल उठाए।

  2. 'कोटे में कोटा' का लक्ष्य आरक्षण वंचितों तक पहुँचाना है।

  3. पिछड़ों की तरह एससी में भी वर्गीकरण की वकालत की।

राज्य ब्यूरो, पटना। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्‍यूलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व लघु जल संसाधन मंत्री डाॅ. संतोष कुमार सुमन ने अनुसूचित जाति के भीतर वर्गीकरण के विरोध पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि कोटे में कोटा का उद्देश्य आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि आरक्षण का लाभ सबसे वंचित तबके तक पहुंचाना है।

सुप्रीम कोर्ट की संव‍िधान पीठ का द‍िया हवाला

मंत्री संतोष ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का हवाला देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक अगस्त 2024 को एससी के भीतर उप-वर्गीकरण को संवैधानिक रूप से संभव माना है।

इसके लिए तर्कसंगत आधार और पर्याप्त अनुभवजन्य आंकड़े जरूरी हैं। बिहार में इस मुद्दे को आरक्षण खत्म करने से जोड़कर भ्रम फैलाना ठीक नहीं है।

एससी के भीतर वर्गीकरण क्‍यों नहीं

उन्होंने पूछा कि जब पिछड़े वर्गों में अलग-अलग श्रेणियां बनाई जा सकती हैं तो एससी के भीतर वर्गीकरण क्यों नहीं हो सकता।

उन्होंने एससी समुदायों की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व के जातिवार आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की।

सुमन ने कहा कि नीति नारे से नहीं, आंकड़ों से तय होनी चाहिए। जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी की बात करने वालों को सबसे वंचित दलितों की हिस्सेदारी पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने इस संदर्भ में विरोध करने वालों से आठ सवाल भी पूछे हैं।

आरक्षण को लेकर इन द‍िनों केंद्रीय मंत्री च‍िराग पासवान और संतोष सुमन एक तरह से आमने-सामने आ गए हैं। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी इसको लेकर तंज कस चुके हैं। 

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