बिहार में अब कम सजा वाले मुकदमों में भी चलेगा ट्रायल इन एब्सेंशिया, न्याय प्रक्रिया में आएगी तेजी
बिहार में 'ट्रायल इन एब्सेंशिया' का दायरा बढ़ाया गया है, अब दस साल से कम सजा वाले मामलों में भी सुनवाई होगी।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
दस साल से कम सजा वाले मामलों में भी सुनवाई होगी।
फरार अभियुक्तों को सरकार देगी कानूनी सहायता।
बिहार देश का पहला राज्य, प्रक्रिया में तेजी।
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में लंबित मुकदमों के निष्पादन में तेजी लाने के लिए ट्रायल इन एब्सेंशिया का दायरा बढ़ाया जाएगा। अभी तक दस साल से अधिक सजा वाले कांडों को ही ट्रायल इन एब्सेंशिया के लिए चुना जा रहा था।
अब दस साल से कम सजा के मामलों में भी ट्रायल इन एब्सेंशिया के तहत सुनवाई की जाएगी। गृह विभाग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के अंतर्गत इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
इसका उद्देश्य ऐसे मुकदमों का निष्पादन करना है, जिसमें फरार अभियुक्तों के कारण सुनवाई लगातार टल रही है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, ट्रायल इन एब्सेंशिया में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान गैर हाजिर रहने वाले या फरार अभियुक्तों के विरुद्ध भी कोर्ट में सुनवाई किए जाने का प्रविधान है।
अभियुक्त की अनुपस्थिति में भी उस पर जांच, ट्रायल व फैसला सुनाने की अनुमति होगी। बिहार देश का पहला राज्य है जिसने ट्रायल इन एब्सेंशिया के तहत कोर्ट में विचारण की प्रक्रिया शुरू की है। पिछले साल दिसंबर में ही इसकी शुरुआत हुई थी।
अपने खर्च पर फरार अभियुक्त को कानूनी सहायता देगी सरकार
विभागीय जानकारी के अनुसार, किसी भी अभियुक्त के भगोड़ा घोषित होने या आरोप तय होने की तारीख से 90 दिन बाद ही ट्रायल इन एब्सेंशिया की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके पहले कम से कम 30-30 दिनों के अंतराल पर दो गिरफ्तारी वारंट जारी करने की अनिवार्यता भी पूरी करनी होगी। ट्रायल इन एब्सेंशिया के दौरान फरार आरोपी की ओर सरकार अपने खर्च पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी। इस दौरान केस के गवाहों के बयान मोबाइल या इलेक्ट्रानिक साधनों से कराने की अनुमति दी गई है।
आरोपी के खुद अपीलीय अदालत में पेश होने पर अपील की सुविधा भी दी जाएगी। ट्रायल इन एब्सेंशिया के तहत दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील केवल तीन वर्ष के भीतर ही मान्य होगी।
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