गंगा के पानी में बिहार को मिले औपचारिक हिस्सेदारी, जल सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार से 14 मांगें
गंगा जल संधि और फरक्का बैराज पर हुई परिचर्चा में बिहार की जल सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार से 14 मांगें रखी गईं।

फरक्का बराज। फाइल फोटो
HighLights
गंगा जल के न्यायसंगत उपयोग हेतु केंद्र से 14 मांगें।
भारत-बांग्लादेश गंगा जल वार्ता में बिहार को औपचारिक हितधारक बनाएं।
ऊपरी राज्यों द्वारा गंगा जल के अत्यधिक उपयोग पर रोक लगे।
जागरण संवाददाता, पटना। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि और फरक्का बैराज के मुद्दे पर बाबू जगजीवन राम शोध संस्थान में एकदिवसीय परिचर्चा आयोजित की गई।
बिहार पॉलिसी डायलाग के बैनर तले हुई परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि गंगा बिहार और नेपाल के लिए केवल आस्था, सिंचाई और पेयजल का साधन नहीं है। यह राज्य की आर्थिक गतिविधियों और समुद्र तक पहुंच का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
परिचर्चा में गंगा बेसिन के जल के न्यायसंगत उपयोग और बिहार की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार से 14 मांगें रखी गईं। वक्ताओं ने गंगा के ऊपरी राज्यों द्वारा जल के अत्यधिक उपयोग पर रोक लगाने और गंगा बेसिन के सभी आठ राज्यों की भागीदारी वाला औपचारिक तंत्र बनाने की मांग की।
जल की उपलब्धता और राज्यों की जरूरत का आकलन होने तक ऊपरी राज्यों की नई जल परियोजनाओं को मंजूरी नहीं देने की बात भी कही गई।
इस परिचर्चा में प्रमुख वक्ता के तौर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष, राजद मंगनी लाल मंडल, जल विशेषज्ञ नीलय उपाध्याय, सांसद सुधाकर सिंह, एनआइटी पटना के पूर्व प्राचार्य इं. संतोष शिव, राजद नेता शास्वत गौतम, गंगा बेसिन विशेषज्ञ पद्मश्री प्रो. रविंद्र सिन्हा और संयोजक प्रो. सुबोध कुमार मौजूद रहे।
वक्ताओं ने भारत-बांग्लादेश गंगा जल वार्ता में बिहार को औपचारिक हितधारक बनाने और किसी नए या संशोधित समझौते से पहले सभी सह-घाटी राज्यों की सहमति लेने की मांग की। साथ ही गंगा की सहायक नदियों के जल योगदान को भी निर्धारित करने की आवश्यकता बताई।
परिचर्चा में बक्सर से इलाहाबाद तक वर्षभर 2.5 से तीन मीटर नौवहन गहराई बनाए रखने, गाद प्रबंधन के लिए नियमित ड्रेजिंग की व्यवस्था और बक्सर, पटना, सारण, भागलपुर, मोकामा, मुंगेर व कटिहार में मल्टी-मॉडल टर्मिनल विकसित करने की मांग उठी। फरक्का से जल छोड़ने की समय-सारणी बिहार में नौवहन योग्य जल उपलब्ध कराने के अनुरूप तय करने की बात कही गई।
