बिहार के 20000 गांवों तक पहुंचने की तैयारी, 'वोट बचाओ चौपाल' से मोदी सरकार का घेराव करेगी कांग्रेस
बिहार कांग्रेस 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक 'वोट बचाओ, देश बचाओ चौपाल' अभियान चलाएगी। यह अभियान मतदाता सूची में ...और पढ़ें

कांग्रेस का प्रदर्शन। फाइल फोटो
HighLights
कांग्रेस 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक अभियान चलाएगी।
'वोट बचाओ, देश बचाओ चौपाल' का आयोजन होगा।
20 हजार गांवों तक पहुंचने की योजना है।
राज्य ब्यूरो, पटना। एक ओर देश के स्तर पर विपक्ष संयुक्त रूप से मतदाता सूची में गड़बड़ी को मुद्दा बनाकर प्रदर्शन कर रहा है तो इसी कड़ी में अब बिहार कांग्रेस मतदाता सूची में गड़बड़ी वोट चोरी को मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
प्रदेश कांग्रेस ने उच्च स्तरीय बैठक के बाद निर्णय लिया है कि पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक राज्य के जिला, प्रखंड और गांव स्तर पर वोट बचाओ, देश बचाओ चौपाल आयोजित करेगी।
अपने इस अभियान के जरिये पार्टी की योजना करीब 20 हजार गांवों तक पहुंचने की है। पार्टी इसे मतदाता सूची से जुड़े सवालों को उठाने और लोगों से सीधे संवाद करने के अभियान के रूप में आगे बढ़ाएगी।
नाम कटने वालों को किया जाएगा शामिल
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिन स्थानों पर चौपाल आयोजित होंगे, उसमें सूची से नाम कटने की शिकायत करने वाले लोगों को भी शामिल किया जाएगा।
कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे मतदाताओं से बातचीत करेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और सूची में नाम शामिल कराने या नाम कटने से संबंधित शिकायतों को प्रमुखता से उठाएंगे।
पार्टी की कोशिश इन मुद्दों को स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाने के साथ मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
कांग्रेस ने इस अभियान की सफलता के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला और प्रखंड स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है।
चौपालों के माध्यम से पार्टी गांव-गांव तक अपनी पहुंच बढ़ाने के साथ मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों को जुटाने पर भी जोर देगी। पार्टी का यह अभियान चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा के सवाल पर केंद्रित रहेगा।
कांग्रेस काफी दिनों से उठा रही वोट चोरी का मुद्दा
बता दें कि कांग्रेस पहले भी वोट बचाओ, देश बचाओ नारे के साथ चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाती रही है।
अब एक महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम के जरिए वह इस मुद्दे को जिला मुख्यालयों से लेकर ग्रामीण स्तर तक ले जाने की तैयारी में है।
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