बिहार कैबिनेट का फैसला: स्टेट हाई-वे पर भी देना होगा टोल टैक्स, सरकारी कर्मियों को मिलेगा सस्ता लोन
बिहार मंत्रिमंडल ने राज्य उच्च पथों पर टोल टैक्स लगाने, सड़कों के रखरखाव के लिए एआई तकनीक का उपयोग करने ...और पढ़ें

बिहार कैबिनेट का फैसला: स्टेट हाई-वे पर भी देना होगा टोल टैक्स, सरकारी कर्मियों को मिलेगा सस्ता लोन

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राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में अब राज्य उच्च पथों, महत्वपूर्ण पुलों और अन्य प्रमुख सड़कों पर सड़क उपयोगकर्ता शुल्क (टोल टैक्स) वसूला जाएगा। इसके लिए बिहार सड़क उपयोगकर्ता शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2026 का गठन किया जा रहा है, जिसे अगले एक महीने में स्वीकृति मिलने की संभावना है।
नियम अधिसूचित होने के तीन महीने के अंदर एजेंसी का चयन कर उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली शुरू कर दी जाएगी और यह राशि राज्य सरकार के खाते में जमा होगी।
इस व्यवस्था से सड़क रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। यह निर्णय बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। मंत्रिमंडल विस्तार के पूर्व बुलाई गई इस बैठक में कुल 20 प्रस्ताव स्वीकृत किए गए।
सड़कों के रखरखाव के लिए 15,967.03 करोड़
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि मंत्रिमंडल ने बिहार में सड़क संरचना को सुदृढ़ और सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य की 19,305.58 किलोमीटर सड़कों सड़कों का रखरखाव एआई तकनीकी से कराया जाएगा।
यह कार्य पथ निर्माण विभाग के दीर्घकालीन अनुरक्षण संविदा प्रणाली के तहत होगा। इसके लिए 15,967.03 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
बनेगा केंद्रीकृत नियंत्रण एवं कमांड केंद्र
योजना के तहत सड़कों के रखरखाव के साथ एक केंद्रीकृत नियंत्रण एवं कमांड केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग कर सड़कों का निरीक्षण और निगरानी की जाएगी, जिससे समय पर मरम्मत और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित हो सके।
यह कार्य सात वर्षों की अवधि में 100 पैकेजों के अंतर्गत कराया जाएगा जिससे कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।
अर्बन ट्रांसफार्मेशन प्रोग्राम से बदलेगी शहरों की सूरत
मंत्रिमंडल ने राज्य के चुनिंदा शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए एक बड़ी पहल की है। चयनित शहरी केंद्रों को आर्थिक रूप से सशक्त और उत्पादक बनाने तथा एकीकृत शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिए विश्व बैंक से पांच से मिलियन डॉलर यानी करीब 4750 करोड़ रुपये का ऋण लेकर बिहार अर्बन ट्रांसफार्मेशन प्रोग्राम लागू किया जाएगा।
विकसित की जाएगी आधारभूत संरचनाएं
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों का सुनियोजित विकास करना है। इसके जरिए शहरों में बेहतर आधारभूत संरचना जैसे सड़क, जल निकासी, और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
साथ ही, शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए नए आर्थिक अवसर भी तैयार किए जाएंगे। इससे न केवल शहरों की स्थिति बेहतर होगी, बल्कि निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
चार सौ नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी
मंत्रिमंडल ने पीएम ई-बस सेवा के तहत सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए 400 नई एसी इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया है। प्रस्ताव के तहत पटना को 150 बसें मिलेंगी, जबकि मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा और पूर्णिया को 50-50 बसें दी जाएंगी।
इससे शहरों में सफर आसान, सस्ता और प्रदूषण रहित होगा। बसों के 12 वर्षो तक परिचालन पर होने वाली अंतर राशि की प्रतिपूर्ति के लिए सरकार ने कैश गैप सब्सिडी के रूप में 517 करोड़ रुपये के वर्षवार व्यय का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया है।
सरकारी सेवकों, पेंशनरों को अब वेतन-पेंशन के आधार पर सस्ता कर्ज
मंत्रिमंडल ने राज्य के सरकारी सेवकों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देने वाला निर्णय लिया है। सरकार ऐसी व्यवस्था लागू करने जा रही है जिसके तहत कर्मचारियों और पेंशनधारकों को उनकी आकस्मिक, अल्पकालिक और दीर्घकालिक वित्तीय जरूरतों के लिए आसान और पारदर्शी तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी सेवक और पेंशनभोगी बैंकों तथा मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थानों के माध्यम से वेतन या पेंशन के आधार पर ऋण ले सकेंगे। इसमें अल्पावधि के लिए वेतन-पेंशन अग्रिम और दीर्घकालिक ऋण की सुविधा शामिल होगी।
सरकार का उद्देश्य है कि जरूरत के समय लोगों को सुलभ और सुरक्षित वित्तीय सहायता मिले। यह पहल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगी और कर्मचारियों को आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाएगी।
साथ ही, पूरी प्रक्रिया को विनियमित और पारदर्शी रखा जाएगा, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या दुरुपयोग की गुंजाइश न रहे। अधिसूचना के साथ ही यह नियम प्रभावी हो जाएगा।
विधायक से अधिकारी तक पढ़ेंगे एआई का पाठ
बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के सदस्यों से लेकर राज्य सरकार के सभी पदाधिकारी से लेकर कर्मियों तक को एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का पाठ पढ़ाया जाएगा। इन्हें एनयूएस, सी-डैक की पटना शाखा, आईआईटी, नाइलिट औरसीआइएमपी जैसे संस्थानों में इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा।
शोध, नवाचार और इस क्षेत्र के अग्रणी उद्योग एवं संस्थाओं का सहयोग प्राप्त कर एआई के क्षेत्र में बिहार को एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने के उदेश्य से बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन का गठन किया गया है।
मिशन के उदेश्यों में एक प्रमुख उदेश्य राज्य में तकनीकी संस्थानों के माध्यम से एआई के क्षेत्र में शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना, जिससे एआई प्रौद्योगिकी अनुकूलन को बढ़ावा मिले।
एआई प्रशिक्षण के माध्यम से इसके प्रति समझ विकसित कर प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, मानव संसाधन का उफयोग, आधारभूत संरचना का निर्माण, कृषि जनित क्षेत्र, समाज कल्याण, कला संस्कृति एवं पर्यटन के विकास में प्रभावकारी परिणाम लाया जा सकता है। इससे सरकारी व्यवस्था और योजनाएं पारदर्शी, जवाबदेही और डाटा आधारित हो सकेगी।
नगरपालिका चुनाव में ई-वोटिंग से घर बैठे वोट की सुविधा
नगरपालिका आम, उप चुनाव 2026 में बुजुर्ग, दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार और बाहर रह रहे मतदाताओं के लिए खास सुविधा शुरू की जा रही है। अब ऐसे मतदाता अपने स्थान पर ही आसानी से मतदान कर सकेंगे। इसके लिए ई-वोटिंग सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया गया है।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए हैदराबाद की संस्था सी-डैक को एजेंसी बनाया गया है। इस परियोजना पर कुल 31.45 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक सरल, सुरक्षित और सभी के लिए सुलभ बनने की उम्मीद है।
