बिहार के नए मंत्रिमंडल में दिखेगा सामाजिक समीकरण: JDU नए चेहरों को देगी मौका, मगध-तिरहुत से सवर्ण बनेगा मंत्री
बिहार में मंत्रिमंडल (Samrat Cabinet) विस्तार की चर्चा तेज है, जिसमें सम्राट चौधरी सरकार में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण का नया स्वरूप दिखेगा।
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CM सम्राट चौधरी, नीतीश कुमार और ललन सिंह। फाइल फोटो

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भुवनेश्वर वात्स्यायन, पटना। बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा तेज है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरण का नया स्वरूप दिख सकता है।
अगड़ी, पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति तीनों के संदर्भ में यह बात कही जा रही है। वहीं, जदयू अपने कुछ पूर्व मंत्रियों के नाम पर यथास्थिति मोड में हैं। भाजपा कुछ पुराने चेहरे पर दृढ़ तो है ही, लेकिन क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरण को ध्यान में रख कई नए नाम काे मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय समीकरण को साधेगी बीजेपी
भाजपा में क्षेत्रीय समीकरण के मामले को सामाजिक समीकरण से जोड़ा जा रहा। मगध क्षेत्र से भाजपा ने अति पिछड़ी जाति को महत्वपूर्ण पद पर जगह दिया हुआ है। इसलिए यह कहा जा रहा कि मगध क्षेत्र से किसी सवर्ण जाति के विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है।
जिस जिले में भाजपा ने 2025 के विधानसभा चुनाव में बेहतर उपलब्धि हासिल की है, वहां से किसी सवर्ण विधायक को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। इसी तरह तिरहुत प्रमंडल के बारे में भी बात की जा रही। तिरहुत इलाके से पिछली सरकार में अति पिछड़ा वर्ग से एक महिला मंत्री थीं भाजपा कोटे से।
इसलिए तिरहुत से भी किसी सवर्ण विधायक को भाजपा कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है। दरभंगा इलाके से किसी ब्राह्मण विधायक को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
पूर्व में भाजपा ने दो बार अपने कोटे से ब्राह्मण समाज के विधायक को मंत्री बनाया था। एक महिला विधान पार्षद को भी सम्राट सरकार में जगह मिल सकती है। अभी तक वह मंत्री नहीं रही हैं।
जदयू में कुछ नए चेहरे को पहली बार मिलेगा मौका
जदयू कोटे से सम्राट सरकार में कौन-कौन मंत्री बनेंगे? इस बारे में यह कहा जा रहा कि कई नामों पर यथास्थिति रहेगी। जिन नामों पर यथास्थिति की बात कही जा रही उनमें वे लोग शामिल हैं, जो नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में कई बार मंत्री रह चुके हैं। इनकी संख्या 8 से 9 के बीच रह सकती है।
वहीं, जदयू कोटे से कई युवा विधायक जो पहली बार चुनाव जीतकर आए हैं, उनको इस बार मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की चर्चा है। इस क्रम में वैसे विधायकों का नाम लिया जा रहा, जिन्होंने बड़े संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
लाेजपा (रामविलास), रालोमो व हम में बदलाव की गुंजाइश नहीं
मंत्रिमंडल विस्तार के तहत एनडीए के तीन अन्य घटक दल लोजपा (रामविलास) रालोमो व हम की सूची में किसी तरह के बदलाव की गुंजाइश नहीं दिख रही। लोजपा (रामविलास) से पूर्व की सरकार में मंत्री रहे एक विधायक को जगह नहीं मिलने की बात चर्चा में जरूर है, लेकिन लोजपा नेतृत्व इसे अफवाह बता रहा।
रालोमो से उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र फिर मंत्री बनेंगे यह तय है। इसी तरह हम से जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष का मंत्रिमंडल में शामिल होना पूर्व के निर्णय के तहत ही है।
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