बिहार में उद्योगों को बूस्टर डोज: अब दूसरे राज्यों से मंगाया जा सकेगा छोआ और मेथनॉल
बिहार सरकार ने पशु आहार और रासायनिक उद्योगों के लिए दूसरे राज्यों से कच्चा माल (छोआ, मेथनॉल) मंगाने की छूट दी है।

बिहार में उद्योगों को बूस्टर डोज: अब दूसरे राज्यों से मंगाया जा सकेगा छोआ और मेथनॉल (AI Generated Image)
HighLights
छोआ आयात से पशु आहार इकाइयों को मिलेगी बड़ी राहत।
मेथनॉल उपलब्धता से रासायनिक उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ।
बिहार में औद्योगिक निवेश और विकास को मिलेगा बढ़ावा।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में पशु आहार और रासायनिक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कच्चे माल की उपलब्धता आसान करने की पहल की है। अब राज्य में संचालित पशु आहार (कैटल फीड) इकाइयां पशु आहार बनाने के लिए दूसरे राज्यों से छोआ मंगा सकेंगी।
इसी तरह बायोडीजल और फार्मलडीहाइड के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मेथनाल का भी दूसरे राज्यों से आयात किया जा सकेगा।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के इस निर्णय से राज्य की पशु आहार निर्माण इकाइयों को कच्चे माल की कमी से राहत मिलने की उम्मीद है। छोआ पशु आहार तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
इसकी उपलब्धता बढ़ने से कैटल फीड उद्योग में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही पशुओं को बेहतर गुणवत्ता वाला आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे पशुओं की सेहत और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में भी सहायता मिल सकती है।
वहीं, मेथनॉल की उपलब्धता आसान होने से कई दूसरे उद्योगों को भी लाभ होगा। इसका इस्तेमाल बायोडीजल और फार्मलडीहाइड के अलावा विभिन्न रासायनिक उत्पादों के निर्माण में होता है। इससे पेंट, प्लाईवुड, रेजिन, ईंधन, दवा और रसायन उद्योगों को कच्चा माल मिलने में सहूलियत होगी।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों के लिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति सुगम बनाना, निवेश आकर्षित करना और राज्य में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना है।
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