फाइलों में उलझी बिहार के 3 नए एक्सप्रेस-वे की रफ्तार, 120KM की स्पीड के लिए अभी करना होगा और इंतजार
बिहार में तीन प्रमुख एक्सप्रेस-वे - रक्सौल-हल्दिया, गोरखपुर-सिलीगुड़ी और पटना-पूर्णिया - आवश्यक सरकारी अनुमतियों के अभाव में अटके हुए हैं। ...और पढ़ें

बिहार के तीन महत्वपूर्ण एक्सप्रेस-वे निर्माण सरकारी अनुमतियों के कारण अटके (AI Generated Image)
HighLights
बिहार के तीन एक्सप्रेस-वे अनुमतियों के कारण अटके पड़े हैं।
मानसून के बाद भी निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना कम है।
रक्सौल-हल्दिया, गोरखपुर-सिलीगुड़ी, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे प्रभावित हैं।
भुवनेश्वर वात्स्यायन, पटना। बिहार के लिए पूर्व में घोषित तीन एक्सप्रेस-वे के निर्माण का मामला अभी दाे स्तर की अनिवार्य अनुमति के बीच अटका पड़ा है। इस वजह से मानसून के बाद आरंभ होने वाले निर्माण सीजन में इन तीवों एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य आरंभ संभव नहीं है।
ये तीनों एक्सप्रेस-वे क्रमश: रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे पटना पूर्णिया एक्सप्रेस-वे हैं।
इनका मामला अभी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप एप्रेजल कमेटी के पास
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे तथा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे के निर्माण से जुड़ा मामला अभी केंद्र सरकार की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप एप्रेजल कमेटी के पास है।
इस कमेटी की अनुशंसा के बाद इन दोनों एक्सप्रेस-वे के निर्माण का मामला केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा। इसके बाद इन दोनों प्रोजेक्ट के निर्माण को निविदा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के निर्माण को अभी केंद्रीय कैबिनेट की अनुमति का इंतजार है। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही निर्माण की अन्य अनिवार्य औपचारिकताओं पर काम आरंभ होगा।
दो एक्सप्रेस-वे अंतरराज्यीय और एक राज्य के भीतर ही
जिन तीन एक्सप्रेस-वे के निर्माण को ले अनुमति का इंतजार हो रहा उनमें दो अंतरराज्यीय हैं और एक राज्य के भीतर की हैं। छह लेन का रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे बिहार से झारखंड होते हुए पश्चिम बंगाल तक जाएगा। तय योजना के तहत इसे 2028 तक पूरा किया जाना है।
इसकी अनुमानित निर्माण लागत 60 हजार करोड़ रुपए तक है। वैसे इस प्रोजेक्ट का एलायनमेंट तय और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसकी कुल लंबाई 719 किमी। बिहार में इसका हिस्सा 585 किमी तक है।
वहीं, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश और बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल तक जाएगी। वैसे इसका बड़ा हिस्सा बिहार होकर गुजरेगा। लागत 32 हजार करोड़ रुपए है। इसके निर्माण को भी 2028 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है। छह लेन का यह एक्सप्रेस-वे 520 किमी लंबा होगा। बिहार में इसका हिस्सा 417 किमी है।
वहीं, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे बिहार के भीतर ही कई जिलों से होकर गुजर रहा। इसे नेशनल एक्सप्रेस-वे-9 के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है। इसकी लंबाई 282 किमी है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इस पर वाहन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकें।
