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रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे: बिहार के 12 जिलों से गुजरेगा 6-लेन कॉरिडोर, नेपाल तक होगी कनेक्टिविटी

Published: Mon, 21 Sep 2026 04:42 PM (IST)

Raxaul Haldia Expressway News: रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे 2028 तक बनकर तैयार होगा। यह एक्सप्रेस-वे बिहार के 12 जिलों से होकर ...और पढ़ें

रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे। (AI Generated Image)

रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे। (AI Generated Image)

HighLights

  1. रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे 2028 तक होगा तैयार।

  2. 6-लेन कॉरिडोर बिहार के 12 जिलों से गुजरेगा।

  3. पूर्वी भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

डिजिटल डेस्क, पटना। Raxaul Haldia Expressway: पूर्वी भारत में व्यापार, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रस्तावित रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का काम तेजी पर है।

लगभग ₹39,000 से ₹54,000 करोड़ के अनुमानित बजट और 2028 के डेडलाइन वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 406 किमी) बिहार में बनने जा रहा है।

जबकि झारखंड में करीब 90 किलोमीटर और पश्चिम बंगाल में लगभग 90 से 100 किलोमीटर तक इसका निर्माण किया जाएगा।

बिहार के 12 जिलों को जोड़ते हुए यह एक्सप्रेस-वे नेपाल के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार के लिए 'गेम-चेंजर' साबित होगा। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों यह एक्सप्रेस-वे तीन राज्यों और दो देशों की अर्थव्यवस्था की नई लाइफलाइन बनने जा रहा है...

1. क्यों खास है यह कॉरिडोर?

वर्तमान में नेपाल के अधिकांश आयात-निर्यात और कार्गो का परिवहन पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह (Haldia Port) के माध्यम से होता है। हालांकि, बेहतर और सीधे हाई-स्पीड कनेक्टिविटी कॉरिडोर के अभाव में ट्रकों और मालवाहकों को काफी समय लगता है।

  • लंबाई: लगभग 650 से 719 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल (पूर्वी चंपारण, बिहार) से शुरू होकर हल्दिया पोर्ट (पश्चिम बंगाल) तक जाएगी।
  • समय में भारी बचत: एक्सप्रेस-वे बनने के बाद रक्सौल से हल्दिया के बीच यात्रा और माल ढुलाई का समय 17-18 घंटे से घटकर मात्र 9 से 10 घंटे रह जाएगा।
  • डिजाइन व स्पीड: एक्सेस-कंट्रोल (नियंत्रित प्रवेश/निकास) वाले इस 6-लेन एक्सप्रेस-वे को 120 किमी/घंटे की रफ्तार के अनुकूल डिजाइन किया गया है।


2. एलाइनमेंट और मुख्य रूट: किन-किन क्षेत्रों से गुजरेगा?

Raxaul Haldia Expressway Route: यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे तीन राज्यों के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक शहरों से गुजरेगा।

बिहार (लगभग 400-585 किमी): यह एक्सप्रेस वे बिहार के पूर्वी चंपारण (रक्सौल/मोतिहारी), शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका से होकर गुजरेगा।

रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे परियोजना के तहत गंगा नदी पर प्रस्तावित पुल के साथ शाम्हो को बेगूसराय जिला मुख्यालय से जोड़ने के लिए अलग एप्रोच सड़क (पहुंच पथ) बनाने की योजना पर प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है।

झारखंड: यह एक्सप्रेस-वे झारखंड के देवघर, दुमका और जामताड़ा जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे देवघर के लिए पटना और कोलकाता की दूरी काफी कम हो जाएगी।

पश्चिम बंगाल: यह सड़क पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान (आसनसोल/दुर्गापुर), बांकुरा, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर होते हुए यह सीधे हल्दिया पोर्ट पर समाप्त होगा।

Raxaul haldia Expressway

3. 'ट्रेड व लॉजिस्टिक्स' की लाइफलाइन क्यों?

रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को 'ट्रेड व लॉजिस्टिक्स' की लाइफलाइन कहा जा रहा है। इस एक्सप्रेस वे के निर्माण से व्यापार को गति मिलेगी।

  • नेपाल व्यापार को गति: नेपाल एक लैंडलॉक्ड (भू-आबद्ध) देश है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भारत के बंदरगाहों पर निर्भर है। रक्सौल में बना ड्राइव-इन इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) और प्रस्तावित रक्सौल एयरपोर्ट इस एक्सप्रेस-वे से जुड़कर एक एकीकृत 'लॉजिस्टिक्स हब' बनाएंगे।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: सीधा रास्ता और हाई-स्पीड मूवमेंट मिलने से ईंधन और समय दोनों की बचत होगी, जिससे निर्यातकों और आयातकों की लॉजिस्टिक्स लागत में 15 से 20% तक की कमी आने का अनुमान है।
  • उत्तर बिहार में औद्योगिक विकास: एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक गलियारे, फूड प्रोसेसिंग पार्क और वेयरहाउसिंग हब विकसित किए जाने की योजना है।

4. वर्तमान स्थिति और लागत

इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹39,000 करोड़ से ₹54,000 करोड़ के बीच आंकी गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा इसके एलाइनमेंट को हरी झंडी मिल चुकी है और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा भूमि अधिग्रहण (Bhoomi Rashi Portal के माध्यम से) की प्रक्रिया जारी है।

बिहार के लगभग 11-12 जिलों में इस परियोजना के लिए भूमि सत्यापन और प्रशासनिक गतिविधियां तेज़ कर दी गई हैं। पूर्वी चंपारण में करीब 72 किमी का हिस्सा प्रस्तावित है।वहीं, बांका जिले के पांच प्रखंडों के 58 राजस्व ग्रामों की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इस मेगा प्रोजेक्ट को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे केवल एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में व्यापारिक कनेक्टिविटी (Regional Connectivity) का नया प्रतीक है। नेपाल से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली यह 'सड़क-लाइफलाइन' पूर्वी भारत के राज्यों में निवेश, रोजगार और लॉजिस्टिक्स क्रांति को गति देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

(सोर्स- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार (MoRTH) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI))

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