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दुलारचंद हत्याकांड: चुनाव प्रचार के दौरान चली थी गोली, एक साल बाद फिर जेल जाएंगे अनंत सिंह 

Published: Sat, 31 Oct 2026 09:39 AM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया ...और पढ़ें

दुलारचंद यादव और अनंत सिंह। फाइल फोटो

दुलारचंद यादव और अनंत सिंह। फाइल फोटो

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को सरेंडर का आदेश दिया।

  2. दुलारचंद यादव हत्याकांड में विधायक की बढ़ीं मुश्किलें।

  3. पीड़ित परिवार ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

संवाद सूत्र, मोकामा। बिहार की मोकामा विधानसभा चुनाव के दौरान जसुपा उम्मीदवार प्रियदर्शी पीयूष के प्रचार में जुटे दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हत्या की पहली बरसी पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है।

दुलारचंद यादव की 30 अक्टूबर 2025 को उनके पैतृक गांव तारतर के पास पंडारक प्रखंड के बसावनचक गांव में हत्या हुई थी। उनके पोते नीरज कुमार ने हत्या का आरोप अनंत सिंह पर लगाया था।

प्राथमिकी में अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर दुलारचंद के पैर में गोली मारने और चार चक्का गाड़ी से कुचलकर हत्या करने का आरोप है।

विपक्षी दलों के विरोध और चुनाव आयोग के निर्देश पर अनंत सिंह को 1 नवंबर 2025 को बाढ़ के कारगिल मार्केट से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद भी उन्होंने मोकामा विधानसभा क्षेत्र से रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की और सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को हराया।

19 मार्च को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बेल बांड की प्रक्रिया पूरी कर अनंत सिंह 23 मार्च को बेऊर जेल से बाहर आए। जमानत के खिलाफ दुलारचंद के पोते ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

परिवार को मिली राहत

अनंत सिंह की दोबारा जेल जाने की संभावना पर दुलारचंद के पुत्र रंजीत यादव ने खुशी जताई, लेकिन परिवार की सुरक्षा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि हत्या के एक साल बाद भी परिवार को सुरक्षा नहीं मिली है और बाढ़ स्टेशन मार्ग स्थित उनका परिवार दहशत में जी रहा है। सरकार के रवैये से क्षुब्ध होकर अनुमंडल मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है।

दुलारचंद ने लोकदल से चुनाव लड़ा था और करीब 22 हजार मत पाकर हारने के बावजूद पहचान बनाई थी। उनकी बढ़ती सियासी ताकत के सम्मान में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव और नीतीश कुमार ने तारतर गांव में समारोह आयोजित कर उन्हें जनता दल में शामिल किया था।

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