प्रैक्टिस के लिए नहीं था मैदान तो पिता ने खुद बनाई पिच, आज बिहार महिला क्रिकेट टीम में नाम कमा रही हैं मुस्कान
नारदीगंज, नवादा की मुस्कान वर्मा ने कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से बिहार महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाई है।

मुस्कान वर्मा। (जागरण)
HighLights
नारदीगंज की मुस्कान वर्मा बिहार क्रिकेट टीम में शामिल।
17 वर्ष की उम्र में अंडर-19 टीम की नियमित खिलाड़ी।
पिता ने घर पर ही अभ्यास के लिए पिच बनाई।
अमरेन्द्र कुमार मिश्र, नारदीगंज (नवादा)। मुश्किलें इंसान के हौसलों को और मजबूत करती हैं, बशर्ते परिवार का साथ मिले और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो।
नारदीगंज प्रखंड क्षेत्र के गोतरायन गांव निवासी बबलू वर्मा की पुत्री मुस्कान वर्मा ने अपनी कड़ी मेहनत और परिवार के समर्थन के बल पर महिला क्रिकेट जगत में एक उभरता हुआ खिलाड़ी बनकर यह साबित कर दिखाया है।
अपनी प्रतिभा के दम पर बिहार टीम में जगह बनाकर पूरे जिले का मान बढ़ाया है। वह बैटिंग के साथ आलराउंड प्रदर्शन करती हैं।
महज 17 वर्ष की उम्र में मुस्कान वर्तमान में बिहार महिला क्रिकेट टीम से रेगुलर अंडर-19 खिलाड़ी के तौर पर खेल रही हैं। वह लगातार बेहतरीन मैच प्रैक्टिस और मैदान पर अपने शानदार प्रदर्शन से विरोधी टीमों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। पढ़ाई में भी वह बेहतर हैं।
वर्ष 2017 से प्रेरणादायक सफर
वर्ष 2017 से मुस्कान का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। बिहार क्रिकेट वीमेंस टीम में पहली बार चयन के बाद शानदार प्रदर्शन की अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बिहार का प्रतिनिधित्व किया है।
मुस्कान ने बताया कि वर्ष 2022-23 (अंडर-19) में, 25 सितंबर 2022 को चेन्नई और 28 दिसंबर 2022 को इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय मुकाबलों में शानदार भागीदारी दी।
वर्ष 2023-24 (अंडर-15 व अंडर-19) में, 29 अक्टूबर 2023 को देहरादून में हुए मुकाबलों में अपनी प्रतिभा दिखाई।
पिता ने घर के पास बनाई प्रैक्टिस पिच
साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली मुस्कान के पिता बबलू वर्मा एक छोटे व्यवसायी हैं। माता रेखा वर्मा गृहिणी हैं। मुस्कान के घर में क्रिकेट का कोई पुराना माहौल नहीं था, लेकिन पिता की सोच कुछ अलग करने की थी।
शुरुआत में जब अभ्यास के लिए कोई ढंग का खेल मैदान नहीं मिला, तो पिता ने घर के पास (जमीन के हिस्से) को ही साफ कर प्रैक्टिस पिच बना दिया। वहीं से उन्होंने खेलना शुरू किया।
नारदीगंज इंटर विद्यालय के मैदान में अभ्यास शुरू कराया, जहां जमीन उबड़-खाबड़ और गड्ढों से भरी थी। इस संघर्ष में उनके छोटे भाई और जिला स्तर के क्रिकेटर वीर धर्म सेन ने भी अहम भूमिका निभाई।
मुस्कान बताती हैं कि उनके पिता की दूरगामी सोच और अटूट विश्वास के कारण ही आज वह इस मुकाम पर हैं।
यह भी पढ़ें- मां ने गहने गिरवी रखकर पढ़ाया, राष्ट्रपति से मिला सम्मान; अब आरा में जिंदगियां बचा रहीं छपरा की ममता